Thursday, June 25, 2020

वैष्णो देवी - हिमकोटि मार्ग से माता के दरबार की ओर


कटरा के विशाल रेलवे स्टेशन से बाहर निकलने पर पार्किंग में हमें मारुति वैन के एक ड्राईवर मिले। उन्होंने बताया कि हमारा होटल है जहां आपको 1000 रुपये में 24 घंटे के लिए कमरा मिलेगा। अगर आप कमरा कुछ घंटे के लिए स्नान आदि के लिए लेते हैं तो 800 रुपये देने होंगे। उसके बाद लगेज छोड़कर आप भवन की ओर प्रस्थान कर सकते हैं। 
उन्होंने बताया कि हम आपको स्टेशन से होटल तक छोड़ेंगे। फिर होटल से वैष्णो देवी की यात्रा की चढ़ाई वाले प्वाइंट तक टैक्सी छोड़ेगी। वापसी में आपको होटल वापस भी लाएंगे। अंत में आपको रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड भी छोड़ देंगे।

 हमें यह पैकेज अच्छा लगा तो हम उनके साथ हो लिए। वे हमें होटल साई वाटिका में ले गए। होटल का कमरा अच्छा है तीन बेड वाला। हमलोग थोड़ी देर में स्नान करके आगे के सफर के लिए तैयार हो गए। होटल की टैक्सी ने हमें वाणगंगा तक छोड़ दिया। रास्ते में टैक्सी थोड़ी देर बस स्टैंड में रूकी। क्योंकि हमारे कुछ सहयात्रियों ने पर्ची नहीं बनवाई थी। वे यहां पर्ची बनवाने गए तब तक हमने कटरा के छोले कुलचे उदरस्थ किए।

वाणगंगा से शुरू हो गया सफर - वाणगंगा में हमने यात्रा के लिए तीन लाठियां किराये पर ली। पिछली यात्राओं के अनुभव से जानता हूं कि पहाड़ों पर चढ़ाई में ये लाठियां साथ निभाती हैं। माथे पर जय माता दी की पट्टी बांधी और हो गए तैयार माता के दरबार की ओर प्रस्थान करने के लिए।

नया ताराकोट मार्ग - ये मेरी वैष्णो देवी के छठी यात्रा है। इस बार वाणगंगा में एक बड़ा चेकपोस्ट बन गया है। यहां पर यात्रा पर्ची की स्कैनिंग होती है, फिर आप आगे बढ़ते हैं। पर वाणगंगा से ही अब एक नया रास्ता बन गया है जो अपेक्षाकृत चौड़ा है। यह ताराकोट मार्ग कहलाता है जो लोगों को अधकुआंरी पहुंचाता है। पर हमें थोड़ी पूछताछ पर पता चला कि नया रास्ता दूरी की लिहाज से थोड़ा लंबा है। तो हमने पुराने रास्ते से ही चलना तय किया। दोपहर के दो बजे हमने भवन के लिए चढ़ाई शुरू कर दी। अनादि की माता वैष्णो देवी के दरबार में ये पहली यात्रा है। थोड़ी दूर आगे चलकर तुलसी भोजनालय में हमने दोपहर का भोजन किया। रोटी, दाल, सब्जी आदि।

हमलोग बड़े उत्साह से पर धीरे-धीरे आगे की ओर बढ़ रहे हैं। सफर की सौंदर्य का आनंद लेते हुए। साथ में हल्की पेट पूजा भी करते हुए। गुरुकुल , चरण पादुका से आगे बढ़ते हुए हमलोग अध कुआंरी पहुंचने वाले हैं। कई जगह हमने सीढ़ियों वाले रास्ते का चयन भी किया। यह थोड़ी दूरी कम कर देता है, पर थकान भी बढ़ा देता है।

वैष्णो देवी के मार्ग में रास्ते में बने कॉफी शॉप मुझे काफी आकर्षित करते हैं। यहां कॉफी की दरें काफी रियायती हैं। प्राकृतिक नजारों के बीच बैठकर कॉफी पीना काफी सुखकर लगता है। हमलोग पहले कॉफी शॉप में ही रुक गए। यहां बैठकर कॉफी पी। बैठने के लिए यहां स्थायी बेंच बनी हुई हैं। जो आनंद यहां बैठक 10 से 20 रुपये वाली कॉफी पीेने का है वह आनंद दिल्ली मुंबई के महंगे कॉफी शॉप में नहीं। इन कॉफी घरों के नाम भी बड़े सुंदर हैं – आलोक, समीर , अंबालिका आदि।

नया हिमकोटी मार्ग - अधकुंवारी से ठीक पहले हमें भवन जाने वाले नए रास्ते के बारे में पता चला। इस नए हिमकोटी वाले रास्ते में चढ़ाई  भी कम है। जहां से दो रास्ते अलग होते हैं उस जंक्शन से हिमकोटी मार्ग से भवन दूरी 5.5 किलोमीटर है तो पुराने मार्ग से 6.5 किलोमीटर। साथ ही इस रास्ते पर बैटरी कार से जाने का भी विकल्प है। यह माता के दरबार तक थोड़ी दूरी भी कम कर देता है। तो हमने इस नए रास्ते से चलना तय किया। पर हमने बैटरी कार का सहारा नहीं लिया। पैदल चलते रहे। वैसे बैटरी कार का एक व्यक्ति का किराया 354 रुपये है।

नए हिमकोटी मार्ग पर घोड़े-खच्चर आदि नहीं चलते। इसका रास्ता भी काफी चौड़ा है। इसलिए रास्ते पर साफ सफाई अच्छी नजर आती है। बस बीच-बीच में बैटरी वाहन आते-जाते हैं। इस रास्ते पर माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ओर से संचालित कई रेस्टोरेंट आते हैं। इनके खाने पीने का स्वाद उम्दा और दरें रियायती हैं।

एक जगह सत्या भोजनालय में हमने सांभर बडा का आनंद लिया। तो कई बार कॉफी भी पी गई। रास्ते कैफे कॉफी डे का भी आउटलेट खुला हुआ है। यहां अनादि ने अपनी पसंद की कॉफी पी। वो क्या नाम था उनकी पसंद का... इस तरह के रास्ते में यात्रा का आनंद बढ़ जाता है। 

तो बिना कहीं लंबा विराम लिए हुए करीब साढ़े छह घंटे की पदयात्रा करके हमलोग रात साढ़े आठ बजे भवन पहुंच चुके हैं। माता के दरबार में काफी भीड़ है। यहां तक की लगेज जमा करने वाले काउंटरों पर भी लंबी लाइन लगी है।
पर संयोग कुछ ऐसा बना कि हमें मात्र एक सवा घंटे में दर्शन करने का मौका मिल गया। यूं तो दर्शन के लिए एक किलोमीटर लंबी लाइन लगी थी। हम इस लाइन में लगने की सोच ही रहे थे तभी आर्मी के एक जवान आए और उन्होंने एक दूसरी लाइन लगाने को कहा। वे आगे आगे चलने लगे उनके पीछे दूसरी लाइन के लोग चलने लगे। और बड़ी तेजी से उन्होंने हमें सीधे वीआईपी गेट तक पहुंचा दिया। इस तरह हमें जल्दी दर्शन का सौभाग्य मिल गया बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के। 

मंदिर के अंदर माता रानी के दर्शन आसानी से हो गए। अंदर पहुंचने के बाद हमें ज्यादा भीड़ का सामना नहीं करना पड़ा। मंदिर की गुफा में प्रवेश के लिए अब नया रास्ता खुला रहता है। इस रास्ते में इंतजाम अच्छे हैं। यहां पर पुराना गुफा वाला रास्ता भी देखा जा सकता है। इस पुराने रास्ते से लोगों को लेटकर आना पड़ता था। 



-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( KATRA TO BHAWAN, MATA VASHINO DEVI, TARAKOT MARG, HIMKOTI MARG )

7 comments:

  1. वाह मोरिया साहब बहुत ही गजब का यात्रा वृतांत हम भी होटल टैक्सी वाले के पैकेज से ही चलते हैं

    स्टेशन से लेकर जाता है फिर बाणगंगा तक छोड़ कर आता है ठीक है यह पैकेज
    अच्छा यात्रा बर्तन

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    1. धन्यवाद सर, आगे भी पढ़िएगा

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  2. बहुत अच्छा यात्रा वृतांत लिखा आपने। शुभकामनाएँ।

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    1. धन्यवाद, अगली कड़ी भी हाजिर है

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  3. बहुत सुंदर यात्रा वृतांत

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  4. अरे ओ यायावार! रोम- रोम रोमांचित करा देता, तेरे द्वारा कराया गया शाब्दिक यात्रा।

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  5. अरे ओ यायावर।

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