Tuesday, June 2, 2020

केदारनाथ से वापसी – सात घंटे का सफर


केदारनाथ मंदिर के प्रांगण में 32 घंटे रहने के दौरान हमने मंदिर को कई बार कई तरफ से देखने की कोशिश की। देर रात में, प्रातःकालीन वेला में, सुबह की खिली धूप में तो शाम को बारिश के बाद, रात को आरती के समय। हर बार मंदिर कुछ अलग नजर आता है। चलते चलते भी मंदिर को एक बार फिर निहार लेना चाहता हूं।


प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद काउंटर बना हुआ है। आप चाहें तो चलते चलते यहां से प्रसाद क्रय कर सकते हैं। वैसे दर्शन के समय यहां कई प्रसाद और चित्रों मूर्तियों की दुकानें भी गुलजार रहती हैं। सुबह सुबह  दर्शनार्थियों की चहल पहल मंदिर के पास शुरू हो जाती है। पर रात को दस बजने के बाद वातावरण में नीरवता छा जाती है।

केदारनाथ धाम में भारतीय डाक विभाग का एक डाकघर भी है। यह देश के सबसे ऊंचाई पर स्थित डाक घरों में से एक है। डाकघर से मेरा बचपन से ही भावनात्मक लगाव है। इसलिए पहाड़ों पर डाकघर देखकर काफी खुशी होती है। केदारनाथ में अभी कोई बैंक एटीएम नहीं है। एचडीएफसी बैंक की कोशिश यहां एक एटीएम स्थापित करने की है। 

केदारनाथ के डाकघर में जाकर अमित ने एक लिफाफा और कागज खरीदा।योजना थी कि यहां से एक खत लिखेगा। पर वह खत लिखा नहीं जा सका। सुबह के साढ़े चार बजे हमलोग केदारनाथ से वापसी की राह पर निकल पड़े हैं। धर्मशाला से कमरा खाली कर हमलोग औंधे मुंह ही चल पड़े। तय किया है कि शौच, हाथ मुंह धोने के काम रास्ते में कर लेंगे। आधा किलोमीटर चलने के बाद बेस कैंप पार करने के बाद थोड़ा उजाला हो गया है।

हेलीकॉटरों का शोर - पर इस उजाले के साथ केदार घाटी में हेलीकाप्टरों का शोर शुरू हो चुका है। दर्शन के लिए उड़ कर आने वाले यात्री आने लगे हैं। आजकल तो शोर थोड़ा कम है। मई जून के महीने में 12 कंपनियां रोज केदारनाथ के लिए हेली सेवा का संचालन करती हैं। जो लोग पैदल चलने में सक्षम नहीं हैं वे लोग हेली सेवा से आते हैं। पर बड़ी संख्या में वैसे लोग भी हेली सेवा से आते हैं जो अमीर पर पर चाहें तो पैदल चल सकते हैं। लगातार उड़ रहे ये हेलीकॉप्टर भी केदारघाटी के आसपास हिमालय के वातावरण में शोर और प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। मुझे लगता है हेलीसेवा का लाभ सिर्फ उन्ही लोगों को मिलना चाहिए तो पैदल चल पाने में शारीरिक रूप से अक्षम हैं।

उतरते समय मैं अपने साथियों से थोड़ा आगे चल रहा हूं। केदारनाथ के मार्ग में हर थोड़ी दूर पर पेयजल के लिए नल और शौचालय आदि का इंतजाम है। मैं छानी कैंप से पहले एक नल पर रुक कर ब्रश कर लेता हूं।  हमारे उतरने की गति चढ़ाई की तुलना में थोड़ी तेज हैं। लिंचोली में कामधेनु रेस्टोरेंट पहुंच कर सुबह की चाय का आर्डर करके बैठ जाता हूं। थोड़ी देर बाद पीछे से मेरे साथी भी पहुंच गए।

वापसी में छानी कैंप आते आते सुबह का उजाला हो चुका है। तेजी से उतरते हुए मैं बड़ी और छोटी लिंचोली को नापने लगा हूं। हां हमलोग लिंचौली में कामधेनू रेस्टोरेंट में थोड़ी देर के लिए रुके। वहां एक छपरा की महिला मिलीं जो धीरे धीरे केदारनाथ जा रही हैं। वे एक दिन में 16 किलोमीटर नहीं चल सकती हैं तो लिंचोली में टेंट में रुक गई हैं। बाकी का सफर आज तय करेंगी। यहां पर सुबह की चाय पी। यहां से चलने के बाद मैं सीधे रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी का पुल पार करने के बाद जाकर रुका। 

हमारे साथी थोड़ा पीछे चल रहे हैं। उनके इंतजार में आधा घंटा से ज्यादा रुकना पड़ा। एक चाय और चाउमीन वाली दुकान के बाहर बैठ गया हूं। मैं देख रहा हूं कि यहां पर सन 2013 के आपदा में मारे गए लोगों की याद में एक सामूहिक समाधि बनाई गई है। मैंने उन्हें नमन किया। रामबाड़ा में भी रात्रि विश्राम के लिए टेंट की सुविधा उपलब्ध है। इस बीच हमारे साथी आ गए हैं। हम एक बार फिर आगे बढ़ चले हैं। 

भीमबली में हमलोग वापसी में नहीं रुके। काफी तेजी से चलते हुए हमलोग अब सीधे जंगल चट्टी में जाकर रुके हैं। वापसी में जंगल चट्टी में एक बार फिर पंजीयन कार्ड की जांच होती है। इससे ये गिनती भी पता चलती है आज कितने लोगों ने केदारनाथ के दर्शन कर लिए।

रास्ते में देख रहा हूं कि खच्चरों पर केदारनाथ मंदिर के लिए लोहे के बड़े बड़े गर्डर ले जाए जा रहे हैं। सीमेंट की बोरियां जा रही हैं। इन सबस नए नए भवनों का निर्माण होगा। आखिर इनकी जरूरत क्या है। सिर्फ अस्थायी तंबूओं से काम नहीं चलाया जा सकता है क्या...

बुरांश का जूस -  जंगल जट्टी से आगे एक स्टाल पर हमने बुरांश का जूस पीया। पूरे केदार क्षेत्र में जगह बुरांश के जूस वाली दुकाने मिल जाती हैं। बुरांश दिल के लिए काफी बेहतर होता है। कई सालों से यह मेरा प्रिय शरबत है। खास तौर पर गर्मियों में मैं इसे खूब पीता हूं। आप इन क्षेत्रों से जूस की बोतल खरीदकर ले भी जा सकते हैं। यहां माल्टा का जूस भी उपलब्ध है।

गर्म जल कुंड में स्नान -  हमलोग दोपहर 12 बजे के आसपास गौरीकुंड पहुंच गए हैं। जिस दुकान में हमने सामान रखा था उन्होंने गर्म पानी के कुंड में स्नान की सलाह दी। इससे थकान दूर हो जाती है। मैंने उनकी सलाह मान ली। उन्होंने एक बड़ा प्लास्टिक का डिब्बा दिया जिसकी सहायता से मैंने गर्म पानी के कुंड में स्नान कर लिया। आपदा से पहले बताते हैं कुंड बड़ा सुसज्जित था। स्नान के बाद महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए कमरे बने हुए थे। पर आपदा में सब तबाह हो गया। गौरी कुंड में एक गर्म पानी का सोता है जिसके पानी में औषधीय गुण भी है।

समुद्र तल से 1982 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गौरीकुंड केदारनाथ का एक प्रमुख आकर्षण है। यहां पर एक प्राचीन गौरी माई का मन्दिर है जो पार्वती को समर्पित है। लोककथाओं को अनुसार यहीं पर देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या की थी। मंदिर के पास ही एक कुंड है। इस कुंड में भी पितरों का पिंडदान करने की भी परंपरा है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com 
( KEDAR NATH, RETURN, BURANS JUICE, KEDAR-16 ) 

6 comments:

  1. केदारनाथ धाम में भारतीय डाक विभाग का एक डाकघर भी है। यह देश के सबसे ऊंचाई पर स्थित डाक घरों में से एक है। डाकघर से मेरा बचपन से ही भावनात्मक लगाव है। इसलिए पहाड़ों पर डाकघर देखकर काफी खुशी होती है। केदारनाथ में अभी कोई बैंक एटीएम नहीं है। एचडीएफसी बैंक की कोशिश यहां एक एटीएम स्थापित करने की है।
    मुझे भी डाकघर से लगाव है ,बचपन से ही इससे मेरा नाता रहा ,बाबा केदारनाथ धाम का सचित्र वर्णन बहुत ही सुंदर है ,धन्यवाद आपका

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    1. आपको अच्छा लगा , बहुत बहुत धन्यवाद

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  2. सचित्र वर्णन हमें केदारनाथ की यात्रा करवा रहा है । आभार !

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    1. धन्यवाद रेखा जी, अब त्रियुगीनारायण और तुंगनाथ चलेंगे, पढ़ते रहिए

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