Saturday, May 9, 2020

देव प्रयाग से रुद्र प्रयाग– अलकनंदा के संग संग


देव प्रयाग में हमारी बस पहले भागीरथी नदी के पुल का पार करती है फिर अलकनंदा नदी के पुल को पार कर नदी की धारा के दाहिनी तरफ बने सड़क पर आगे बढ़ने लगती है। देव प्रयाग से आगे हमलोग अलकनंदा नदी के साथ साथ चल रहे हैं। हिमालय क्षेत्र में कई नदियां गंगा में आकर मिलती हैं। पर अलकनंदा उनमें सबसे बड़ी नदी है। दरअसल अलकनंदा से मिलन के बाद ही उसे गंगा नाम मिलता है। इससे पहले तो वह भागीरथी कहलाती है।

अलकनंदा का दूसरा नाम विष्णु गंगा भी है। यह हिमालय के संतोपंथ ग्लेसियर से निकलती है। देव प्रयाग के बाद बद्रीनाथ की ओर जाने वाली सड़क अलकनंदा नदी के साथ साथ ही चलता जाता है। अलकनंदा की कुल लंबाई 195 किलोमीटर है। नंदाकिनी, पिंडर, मंदाकिनी,  ऋषिगंगा,  धौलीगंगा जैसी तमाम नदियां रास्ते में अलकनंदा से मिलती हैं। जलराशि (वाटर डिस्चार्ज) के लिहाज से यह गंगा से बड़ी नदी है। यह पौड़ी गढ़वाल, चमोली, रुद्र प्रयाग जैसे जिलों से होकर गुजरती है।

अलकनंदा – उत्तराखंड की सबसे बड़ी नदी - पौड़ी जिले का शहर श्रीनगर, रुद्र प्रयाग और बद्रीनाथ अलकनंदा नदी के तट पर बसे हैं। अलकनंदा कहीं तो गहरी कहीं उथली है। इसकी औसत गहराई 5 फीट और अधिकतम गहराई 14 फीट है। जल क्षमता के लिहाज से अलकनंदा उत्तराखंड की सबसे बड़ी नदी है। राज्य के लोग अलकनंदा का बहुत सम्मान करते हैं। गोविंद घाट में लक्ष्मण गंगा नदी का मिलन अलकनंदा में होता है। उत्तराखंड में जहां दो नदियों का संगम होता है वैसे कुछ शहरों को प्रयाग नाम दिया गया है। उत्तराखंड शहर में पांच प्रयाग हैं। ये सभी प्रयाग अलकनंदा नदी के तट पर बने हैं।

उत्तराखंड के पांच प्रयाग
पहला प्रयाग विष्णु प्रयाग  - यहां पर अलकनंदा नदी से से धौली गंगा आकर मिलती है।
दूसरा प्रयाग  नन्द प्रयाग -  यहां पर नन्दकिनी नदी अलकनंदा में आकर समाहित हो जाती है।
तीसरा प्रयाग कर्ण प्रयाग – यहां पर पिंडर नदी आकर अलकनंदा नदी में मिलती है
चौथा प्रयाग रुद्र प्रयाग – यहां पर केदानाथ की ओर आ रही मंदाकिनी नदी  अलकनंदा नदी से आकर मिल जाती हैं।

पांचवां देव प्रयाग  - यहां पर भागीरथी में अलकनंदा नदी समाहित हो जाती है। पर अलकनंदा का नाम खत्म हो जाता है। दोनों नदियों के मिलन के बाद नया मिलता है-  गंगा। इसके अलावा सोन प्रयाग को छठे प्रयाग की संज्ञा दी जाती है। 

पहुंच गए हम श्रीनगर -  हमारी बस देव प्रयाग से आगे अलकनंदा नदी के साथ साथ चल रही है। रास्ते में एक दो जगह जाम मिला। इस जाम में बस को थोड़ी देर रुकना पड़ा। कई जगह सड़क को चौड़ा करने का काम जारी है। इसलिए निर्माण कार्य के दौरान बसों को रोक देते हैं। देव प्रयाग से 35 किलोमीटर चल कर हमलोग श्रीनगर शहर पहुंच गए हैं। यहां के बस स्टैंड में हमारी बस थोड़ी देर के लिए रुकी। यहां कुल लोग बस से उतर गए। उसके बाद आगे के सफर पर चल पड़ी।

टैक्सी बुक कर चार धाम यात्रा -  आप चार धाम की यात्रा आरक्षित टैक्सी बुक करके भी कर सकते हैं। अगर आपके समूह में 8 से 10 लोग हैं तो यह आपके लिए किफायती सौदा हो सकता है। 3500 से 4000 रुपये प्रतिदिन पर बुलेरो या इनोवा जैसी गाड़ियां बुक की जा सकती हैं। इसके अलावा आप चाहें तो बाइक से भी चार धामों की यात्रा पर निकल सकते हैं। इसके लिए आप ऋषिकेश से प्रतिदिन की दर पर बाइक किराये पर भी ले सकते हैं।



पहुंच गए हम रुद्र प्रयाग - श्रीनगर से 35 किलोमीटर का सफर करके दोपहर के बाद हमलोग रुद्र प्रयाग शहर में पहुंच गए हैं। यहां हमारी बस से काफी सवारियां उतर गईं। रुद्र प्रयाग वह शहर है जहां से बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने का रास्ता बदल जाता है। लिहाजा यह बदरी केदार तीर्थ यात्रा का मुख्य पड़ाव है। यह शहर रुद्र प्रयाग जिले का मुख्यालय भी है। पहले यह चमोली जिले का ही हिस्सा हुआ करता था।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( ALAKNANDA RIVER, SRINGAR, RUDRA PRAYAG, KEDAR -03 ) 
 आगे पढ़िए -  मंदाकिनी के संग संग - गुप्तकाशी तक...

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