Thursday, May 7, 2020

ऋषिकेश से देवप्रयाग तक का सफर – गंगा के संग संग


ऋषिकेश से गौरीकुंड की दूरी 225 किलोमीटर के आसपास है। हमारे बस के संवाहक ने बताया है कि वह पांच से छह बजे के बीच हमें गौरीकुंड से 30 किलोमीटर पहले सोन प्रयाग पहुंचा देगा। हमारी में बस ज्यादातर यात्री केदानाथ  यात्रा पर जाने वाले हैं। टू बाई टू मिनी बस में मेरे बगल वाले यात्री रुद्रप्रयाग तक जा रहे हैं। बस में दिल्ली का एक परिवार भी है जिसमें सात सदस्य हैं। सबसे बुजुर्ग दादा जी की उम्र 83 साल है। वे सभी लोग केदारनाथ जा रहे हैं। 

ऋषिकेश से आगे मैं नीर झरना तक ही गया हूं। उसके आगे का रास्ता मेरे लिया नया है। ऋषिकेश से देव प्रयाग की दूरी तकरीबन 70 किलोमीटर है। ये पूरा रास्ता गंगा नदी के संग-संग चलता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो आप समंदर के किनारे मरीन ड्राईव पर चल रहे हों। इस मार्ग  में पहला पड़ाव आता है शिवपुरी। जो ऋषिकेश से 13 किलोमीटर है। ऋषिकेश में गंगा में राफ्टिंग करने वाले लोग शिवपुरी तक आते हैं। पूरे रास्ते में गंगा नदी सड़क से काफी नीचे गहराई में बहती हुई नजर आती हैं।

तीन धारा में नास्ता - शिवपुरी के बाद अगला पड़ाव है व्यासी। व्यासी के बाद आता है कौंडियाला। कौंडियाला की दूरी ऋषिकेश से 38 किलोमीटर है। इसके बाद करीब 20 किलोमीटर चलने पर हमलोग तीन धारा (दनाड़ा) पहुंच गए हैं। यहां पर हमारी बस नास्ता-भोजन के लिए रुक जाती है।  साढ़े दस बजे हैं अभी भोजन नहीं किया जा सकता तो हमलोग पराठे का आर्डर दे देते हैं। बद्री-केदार जाने वाली ज्यादातर बसें नास्ते और भोजन के लिए तीन धारा में ही रुकती हैं। यहां नास्ते में 40 रुपये में एक पराठा मिल रहा है। इसके साथ दाल और सब्जी भी दी जा रही है। पूरा खाना चाहें तो 80 रुपये की थाली है। तीन धारा में एक साथ तीन होटल हैं। ये लोग जितनी देर बस रुकती है उतने ही समय में फटाफट सभी यात्रियों को भोजन उपलब्ध करा देते हैं। 

होटल के बाहर 20 रुपये में एक ग्लास नींबू पानी या जल जीरा भी मिल रहा है। हमने यहां पर पहाड़ी खीरा भी खाया। यह समान्य खीरा से आकार में मोटा दिखाई देता है।
तीनधारा से देवप्रयाग की दूरी लगभग 10 किलोमीटर है। जबकि देवप्रयाग की दूरी शिवपुरी से 57 किलोमीटर  है। वहीं ऋषिकेश से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर है। देव प्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा नदियों का संगम है। बस की सीट पर बैठे-बैठे मुझे नींद आ गई है इसलिए कब देव प्रयाग शहर निकल गया मुझे पता नहीं चला। तो वापसी में देव प्रयाग की चर्चा करेंगे।

एक साथ चार धाम या अलग अलग - चार धाम की यात्रा आप कई तरीके से कर सकते हैं। अगर आप एक ही छुट्टी में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाना चाहते हैं तो 10 से 12 दिनों का अवकाश लें। चार धाम में टैक्सी से नौ दिन और बस से दस दिन लगते हैं। यह एक थका देने वाला सफर हो सकता है। तो अच्छा रहेगा कि एक बार में केदार और बद्रीनाथ जाएं दूसरी बार में गंगोत्री और युमनोत्री। या हर बार एक धाम की ही यात्रा करें।


पैकेज टूर या फिर बस से यात्रा - आप चाहें तो हरिद्वार या ऋषिकेश से ट्रैवल एजेंट से एक धाम , दो धाम या चार धाम का पैकेज टूर बुक करा सकते हैं। पर अपना खर्च कम करना चाहते हैं तो खुद यात्रा की योजना बनाएं और शेयरिंग बस सेवा और टैक्सी सेवा से यात्राएं करें। अगर भीड़ से बचना चाहते हैं तो मई जून के बजाय आगे के महीनों में यात्रा की योजना बनाएं। फिलहाल हम तो एक धाम की यात्रा पर ही जा रहे हैं। तो चलिए हमारे साथ। आगे के सफर पर।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
( RISHIKESH TO DEV PRAYAG WITH GANGA, KEDAR-02 ) 



2 comments:

  1. अच्छी जानकारी ..

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    1. धन्यवाद सर, आगे भी पढ़ते रहिए

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