Tuesday, May 5, 2020

चलो केदारनाथ – ऋषिकेश से हिमालय की ओर


महादेव शिव हैं वो, वह रामेश्वरम में समंदर के किनारे भी हैं। वह महाराष्ट्र के घने जंगलों में भीमाशंकर में भी हैं। वह गुजरात में समंदर के किनारे सोमनाथ में भी हैं। वह कश्मीर के अमरनाथ की गुफाओं में भी बसते हैं। वह हमारे गांव के शिवाले में भी रहते हैं। पर हम उसकी तलाश में उसके दर्शन के लिए उसका आशीर्वाद पाने के लिए चलकर कहां-कहां नहीं जाते हैं। मैं सन 1991 में कांवर लेकर पैदल 120 किलोमीटर चलकर बोलबम यानी सुल्तानगंज से देवघर गया था। अब बारी है उत्तराखंड के केदारनाथ धाम तक पदयात्रा करने की। 


देश के अलग अलग हिस्सों में स्थित शिव के 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरो में से साल 2018 तक मैं 11 ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर चुका था। पर 12वें ज्योतिर्लिंग के दर्शन का सौभाग्य मिल सका साल 2019 के सितंबर महीने में। उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ ज्योतिर्लिंग में पांचवे नंबर पर आता है।  पर दिल्ली से करीब होने के कारण मैं सोचता था यहां तो कभी भी पहुंच जाउंगा  मैं ऐसा सोचता था,  लिहाजा पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश , दक्षिण भारत में स्थित प्रमुख शिव मंदिरों के दर्शन कर लिए जाएं। इसलिए बाबा केदारनाथ के दर्शन का मौका मुझे 11 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद मिला।

केदारनाथ की यात्रा मई से अक्तूबर नवंबर के बीच होती है। मंदिर के कपाट अक्षय तृतीय के आसपास खुलते हैं और दिवाली के आसपास बंद हो जाते हैं। मई जून में यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है। इसलिए हमने सितंबर का महीना चुना जब यात्रियों की भीड़ कम हो जाती है। 

केदारनाथ की औपचारिक यात्रा शुरू होती है हरिद्वार या ऋषिकेश से। हरिद्वार तक मुझे जाने के मौके अक्सर मिलते रहते हैं। पर केदारनाथ जाने का कार्यक्रम कभी बन नहीं पाया। पर इस बार मौका मिल गया। 

इससे पहले दिल्ली से हरिद्वार पहुंचने की बात। रात को 12 बजे के बाद हमने गाजियाबाद के मोहन नगर चौराहे से हरिद्वार की बस लेना तय किया था। दिल्ली से हरिद्वार ऋषिकेश के बीच 24 घंटे बसें चलती रहती हैं। इनमें निजी लग्जरी, एसी स्लिपर बसें भी हैं। पर हमारे दूसरे साथियों के इंतजार में एसी बस छूट गई। तो हम यूपी रोडवेज की बस में सवार हुए। रात में बस में दुखद नजारा था। कुछ यात्री बस में बैठे शराब पी रहे थे तो एक यात्री हर थोड़ी देर पर सिगरेट की कश उड़ा रहा था। रात एक बजे के बाद मोहन नगर से मिली बस ने सुबह सवा छह बजे हमें ऋषिकेश बस स्टैंड में छोड़ दिया। हालांकि चार धाम यात्रा मार्ग की बसें हरिद्वार बस स्टैंड से भी मिलती हैं। पर हमने ऋषिकेश से आगे की बस लेना तय किया।

ऋषिकेश बस स्टैंड काफी साफ-सुथरा और सुविधाजनक है। यहां पर शौच, ब्रश आदि करने के बाद हमने चाय पी। बस स्टैंड परिसर में ही यात्रा के लिए बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन का काउंटर भी है। हमने अपना पंजीकरण यहीं पर करा लिया। वैसे ये पंजीकरण केदारनाथ के मार्ग में सोन प्रयाग में भी होता है। ऋषिकेश में पंजीकरण काउंटर पर भीड़ बिल्कुल नहीं थी। पंजीकरण के वक्त काउंटर मौजूद कन्या ने हमें कुछ पंपलेट दिए जिसमें यात्रा मार्ग के बारे में समान्य जानकारियां थीं।

बस स्टैंड में जगह जगह सशुल्क शौचालय और स्नानागार बने हैं। यात्री यहां घंटो अपना वक्त गुजार सकते हैं। बैठने के लिए बेंच भी बनी है। दूर-दूर से आए वैसे तीर्थ यात्री जो होटल नहीं ले सकते हैं, वे बस अड्डे के परिसर में रात भी गुजार लेते हैं। बस स्टैंड के दो हिस्से हैं। पहले हिस्से से दिल्ली समेत दूर की बसें मिलती हैं। जबकि दूसरे हिस्से से पहाड़ पर जाने वाली मिनी बसें मिलती हैं। तो हमें जो बस लेनी थी वह दूसरी तरफ से मिलेगी, जहां से मिनी बसें चलती हैं।

भूख हड़ताल सेवा से सफर – हमें पता चला कि केदारनाथ मार्ग पर सोन प्रयाग तक जाने वाली अगली बस सुबह 8 बजे हैं। यही आखिरी बस भी है। इसके बाद खुलने वाली बसें सोनप्रयाग तक नहीं जातीं। इस बस का नाम भूख हड़ताल सेवा है। इसके बाद ऋषिकेश से खुलने वाली बसें रुद्र प्रयाग तक ही जाती हैं। सवा छह बजे जब हम इस बस के पास पहुंचे तो सारी सीटें खाली थी। पर एक घंटे बाद पहुंचे तो ज्यादातर सीटें भर गई थीं। हमें पीछे जाकर सीट मिल सकी। 



मुझे कौतुहल हुआ, आखिर इस बस का नाम भूख हड़ताल क्यों है। पता चला कि कई दशक पहले एक व्यक्ति ने ऋषिकेश से सोनप्रयाग फिर सोनप्रयाग से बद्रीनाथ और बद्रीनाथ से ऋषिकेश की बस चलाने की मांग करते हुए लंबी भूख हड़ताल की थी। लंबे संघर्ष के बाद बस चली तो उसका नाम भूख हड़ताल सेवा रख दिया गया। तब से लोगों के बीच ये बस इसी नाम से लोकप्रिय है। ऋषिकेश से हमारी बस ठीक आठ बजे केदानाथ मार्ग के लिए प्रस्थान कर गई है। तो चलते हैं आगे के सफर पर।

कुछ ऐसा है केदारनाथ मार्ग -
दिल्ली से हरिद्वार : 205 किलोमीटर 
हरिद्वार से ऋषिकेश - 25 किलोमीटर-  
ऋषिकेश से श्रीनगर 109 किमी –
श्रीनगर से रुद्रप्रयाग 33 किमी – 
रुद्रप्रयाग से तिलवारा 9 किमी –
तिलवारा से अगस्त मुनि 10 किमी
अगस्त मुनि से गुप्तकाशी 20 किमी –
गुप्तकाशी से सोनप्रयाग 23 किमी (पार्किंग) –
सोनप्रयाग से गौरीकुंड 5 किमी (टैक्सी)
गौरीकुंड से केदारनाथ – 16 किलोमीटर पैदल यात्रा। 
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- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( HARIDWAR, RISHIKESH, KEDARNATH, BHOOKH HARTAL BUS SERVICE, KEDAR-01 ) 

8 comments:

  1. महत्वपूर्ण जानकारी. चित्रमय पोस्ट से स्थान और समय विशेष के साथ आसानी से तारतम्य जुड़ जाता है.

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  2. वाह बहुत ही उपयोगी जानकारी सर | मैं भी आज तक केंदारनाथ और बद्री नाथ जी के दर्शन नहीं कर पाया हूँ | भूख हड़ताल बस सेवा के बारे में जानकर तो अचरज में ही पड़ गया | जितनी रोचक शैली में आप लिखते हैं उतनी ही खूबसूरत तस्वीरों से पोस्ट को सज़ा भी देते हैं | पढ़ते हुए ऐसा लगता है मानो सफ़र में हम भी आपके साथ साथ चल रहे हैं |

    सर हर सफ़र के लिए कपड़ों बैग जरूरी सामान इत्यादि को भी शामिल करने से हम पाठकों के लिए ये और भी उपयोगी साबित होगा | अगले अंक की प्रतीक्षा रहेगी |

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    1. धन्यवाद, कोशिश करूंगा, दरअसल कपड़े, दवाएंं खाने की पीने की चींजों के मामले में हर किसी की पसंद अलग-अलग होती है। मैं जरूरत भर कपड़े लेकर ही सफर करता हूं ताकि ज्यादा वजन न ढोना पड़े। आपकी सलाह पर इस पर कभी अलग से पोस्ट लिखूंगा....

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  3. शानदाऱ। चलो चलते हैं आपके साथ बाबा के दर्शनार्थ। जय़ बाबा केदार

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    1. हां, जरूर, पढ़ते रहिए.... आगे भी...

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  4. बढ़िया पोस्ट काफी जानकारी मिलेगी जो व्यक्ति केदारनाथ जाना चाहता हो।
    वैसे दिल्ली से कुंड तक कि भी बस मिल जाती है।
    Sachin3304.blogspot.com

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    1. हां कुछ बसें दिल्ली से सीधे जाती हैं।

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