Sunday, May 3, 2020

गर्मियों में गुणकारी है पलाश का शरबत


अचानक एक स्टोर पर मेरी नजर पलाश के फूल से बने शरबत पर पड़ी। गर्मियों मे गुलाब, खस, बुरांश, ब्राह्मी, बेल  आदि के शरबत का सेवन तो मैं करता हूं पर पलाश के फूलों से बने शरबत को देखकर मैं चौक गया। मैंने तुरंत इसे खरीद लिया। इसे हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले पावंटा साहिब की एक कंपनी ने बनाया है। पलाश का ये शरबत औषधीय गुणों वाला होता है। गर्मियों इसका सेवन कई रोगों भी लाभकारी है।

गर्मियों की शुरुआत के साथ जहां चारों तरफ पतझड़ नजर आने लगता जाता है, तो उस समय कौन सा फूल है  जो मुरझाए हुए पेड़ों के बीच सुर्ख रंग में खिलकर मन को सुकून देने का काम करता हैं। जी हां पलाश। बसंत शुरू होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों तथा जंगलों में पलाश फूल खिलना शुरू हो जाते हैं। पलाश फूलों से छटा सिंदूरी रंग की हो जाती है।

पलाश को कई नामों से जाना जाता है। इसे ब्रह्मवृक्ष भी कहा गया है। यह पलास, छूल, परसा,  ढाक, टेसू, किंशुक, केसू ( पंजाबी में) भी कहा जाता है। इसका वनस्पतिक नाम बूटी मोनोसपेरमा (BUTEA MONOSPERMA) है।  इसका वृक्ष विशाल होता है। इसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलो के कारण इसे जंगल की आग भी कहा जाता है। 

झारखंड का राज्य पुष्प पलाश - भारत के सभी प्रकार के प्रदेशों और क्षेत्रों में पाया जाता है। यह एक ऐसा फूल है जो कि मैदान या जंगलों में ही नहीं बल्कि पहाड़ियों की चोटी पर किसी न किसी रूप में अवश्य ही मिल जाता है। आपको पता है कि पलाश का फूल झारखंड राज्य का राज्य पुष्प है। झारखंड के जंगलों में पलाश बहुतायत पाया जाता है। आदिवासी संस्कृति में भी पलाश का खास महत्व है। आदिवासी स्त्रियां इन फूलों को अपने जूड़े में लगाती हैं। पलाश तीन  प्रकार का होता है। एक वह जिसमें सफेद फूल उगते हैं और दूसरा वह जिसमें पीले फूल लगते हैं। तीसरा वह जिसमें लाल-नारंगी फूल लगते हैं। हम ज्यादातर लाल फूलों वाले पलाश को देखते हैं।

होली के रंग भी बनते हैं - पलाश के पत्तों का उपयोग ग्रामीण दोने-पत्तल बनाने के लिए करते हैं जबकि इसके फूलों से होली के रंग बनाए जाते हैं। बहुत से लोगो को अपने बचपन की टेसू के फूलों के रंग से खेली गई होली याद होगी।

कई औषधीय गुण हैं पलाश में  - आयुर्वेद में पलाश के जड़, बीज, तनाफूल और फल का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों के उपचार के लिए किया जाता है। पलाश के फूलों में कई चमत्कारिक औषधीय गुण भी हैं। इसके फूलों को पीसकर चेहरे में लगाने से चमक बढ़ती है। वहीं पलाश की फलियां कृमिनाशक का काम करती हैं। इसके नियमित उपयोग से बुढ़ापा भी दूर रहता है। यह त्वचा संबधी रोग में भी लाभदायक सिद्ध हुआ है। पलाश की जड़, पलाश की छाल, पलाश का तना, पलाश की पत्ती, पलाश का पुष्प, पलाश का फल, पलाश का तेल आदि घरेलू इलाज करने के लिए काम में लाया जा सकता है।

लू से बचाता है - पलाश का फूल त्वचा संबंधी रोगों के लिए रामबाण इलाज होता है। इसके फूल को पानी में उबालकर नहाने से त्वचा संबंधी कई समस्या दूर हो जाती है। अगर किसी को लू भी लग गई है तो पलाश का फूल उसके लिए काफी फायदेमंद होता है।
हड्डियों को करें मजबूत - पलाश के पत्तों में भी बहुमूल्य तत्व होते है जो कि शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते है। इसके पेड़ से निकलने वाले गोंद से हड्डियों को  भी मजबूती मिलती है।

साहित्यकारों ने पलाश पर खूब लिखा है। रविंद्रनाथ त्यागी के लोकप्रिय ललित निबंध संग्रह का नाम है पूरब खिले पलाश। इसमें वे गीत - पूरब खिले पलाश पिया.... की चर्चा करते हैं। पूरब में पलाश खिल जाने का मतलब वसंत आ गया है। विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर जब वसंत के आगमन की बात करते हैं तो पलाश को याद करते हैं। रांगा हांशी राशि-राशि अशोके पलाशे, रांगा नेशा मेघे मेशा प्रभात आकाशे, नबीन पाताय लागे रांगा हिल्लोल द्वार खोल द्वार। मतलब - कैसे राशि-राशि अशोक और पलाश के पेड़ रंगों में विहंस रहे हैं।  

-- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
(PALASH, SHARBAT )


10 comments:

  1. पलाश के बारे में बहुत उपयोगी जानकारी दी आपने। वैसे मैंने भी पलाश के शर्बत पहली बार ही सुना है। कहीं बिक्री होता मिला तो अवश्य खरीदूँगा।
    Sachin3304.blogspot.com

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    1. मेरे मुहल्ले में मिलता है।

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  2. असल में अंतरजाल पर सार्थक लेखन तो आप ही कर रहे हैं सर । पलाश के फूलों की सुंदरता के ही बारे में आज तक देखा पढ़ा व सुना था । किंतु पलाश के शरबत के औषधीय गुण किस राज्य से संबंध रखता है आदि के बारे में विस्तार से जानकारी देकर आपने बहुत ही सुंदर पोस्ट हमारे लिए साझा की । बहुत-बहुत शुक्रिया और आभार सर।

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  3. धन्यवाद अजय जी

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  4. अच्छी जानकारी. टेसू के फूल से रंग बहुत बनाया होली पर बचपन में

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    1. हां मधुर स्मृतियां हैं

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  5. पलाश के बारे में तो इतनी जानकारी नहीं थी .. बहुत बढ़िया लेख !

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