Saturday, May 2, 2020

मथुरा का होली गेट और कई तरह का स्वाद


मथुरा शहर में डैंपियर से आगे चलकर मैं पैदल पैदल होली गेट के आसपास पहुंच गया हूं। रास्ते में शहर का प्रमुख अस्पताल, धर्मशाला, गुरुद्वारा और खादी ग्रामोद्योग संघ का शोरुम दिखाई देता है। मैं पुराने मथुरा शहर में पहुंच गया हूं। होली गेट के आसपास पुराने मथुरा का प्रमुख बाजार है। बाजार में खूब भीड़भाड़ है। होली गेट सुंदर नक्काशीदार प्रवेश द्वार है। इसके ऊपर के विशाल घड़ी भी लगी हुई है। कुछ लोगों ने इसका नाम बदलकर तिलक द्वार रख दिया है। यहां पर पास में अग्रवाल समाज मथुरा द्वारा संचालित अग्रसेन धर्मशाला है। इसके पास ही गुरुद्वारा श्री तेगबहादुर साहिब जी भी स्थित है।

होली गेट से पहले सड़क के एक तरफ शंकर मिठाई वाला का बोर्ड नजर आता है। ये शहर की लोकप्रिय मिठाई दुकानों में से है। यहां खरीददारों की भीड़ लगी है। थोड़ा आगे चलकर मैं होली गेट के ठीक अंदर प्रवेश कर जाता हूं। गेट के अंदर दाहिनी तरफ एक कचौड़ी और जलेबी वाली दुकान है। ये ओमा पहलवान की कचौड़ी वाली दुकान के नाम से पीढ़ियों से प्रसिद्ध दुकान है। यहां पर एक कचौड़ी 15 रुपये की है। बैठने की जगह नहीं है। लोग खड़े खड़े कचौड़ियां खाते हैं या फिर पैक कराकर ले जाते हैं। एक कचौड़ी के साथ सब्जी 15 रुपये में। खाने में स्वाद अच्छा है।

मैं उनसे जलेबी भी मांगता हूं। वे कहते हैं कि पहले कचौड़ी खा लिजिए। फिर ले लिजिएगा जलेबी। वैसे जलेबी के भाव है 10 रुपये प्रति नग। उनकी जलेबियां देसी घी में बनती हैं। ऐसा कहा जाता है। बाहर से आने वाले लोग भले ही इस दुकान के बारे में ज्यादा न जानते हों पर स्थानीय लोगों में ओमा पहलवान की दुकान काफी प्रसिद्ध है। 
ओमा पहलवान की दुकान के ठीक सामने बृजवासी की प्रसिद्ध मिठाइयों की दुकान का शोरूम है। वैसे तो मथुरा में बृजवासी की कई दुकानें हैं। पर होली गेट की दुकान सबसे पुरानी दुकानों में से एक है। यहां आप मथुरा के प्रसिद्ध पेड़े समेत तमाम तरह की मिठाइयां खरीद सकते हैं।


होली गेट के पास ही बुलाकी शाह दूधवाला की दुकान नजर आती है। पुराने मथुरा की ये प्रसिद्ध दूध की दुकान है। यहां पर कई ऐसे होटल और ढाबे हैं जो सौ साल से ज्यादा पुरानी हैं। इनमें से कई दुकाने पीढ़ी दर पीढ़ी से चलाई जा रही हैं। प्रेम होटल के साइन बोर्ड पर लिखा है स्थापित 1930 मतलब आज से 90 साल पुरानी दुकान है। शुद्ध शाकाहारी भोजन।

होली गेट के अंदर पैदल घूमते जाइए। मथुरा शहर की पुरानी दुकाने हैं। परंपरागत बाजार। आप महानगरों के शॉपिंग मॉल में घूमते होंगे। पर इन पुराने बाजारों में घूमने का भी अपना मजा है। स्कूटर, रिक्शा, आटो रिक्शा के बीच भीड़भाड़ में बचते बचाते जगह बनाते पैदल यात्री।



होली गेट के चौराहे पर एक बनारसी पान की दुकान भी है। हांलाकि मैं पान नहीं खाता पर उनकी दुकान की तस्वीर ले लेता हूं। मथुरा के लैंडमार्क के तौर पर। होली गेट से वापस रेलवे स्टेशन की तरफ जाना है। यहां से तमाम बैटरी रिक्शा मिल रहे हैं। स्टेशन की तरफ जाने वाले। मैं भी एक बैटरी रिक्शा में बैठ जाता हूं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( MATHURA, HOLI GATE, TILAK DWAR, OMA PAHLWAN KACHAURI WALE )

2 comments:

  1. वाह ! बहुत अच्छी जानकारी !

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    1. धन्यवाद संगीता जी,

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