Sunday, May 17, 2020

श्री केदारनाथ की ओर - जंगल चट्टी से भीमबली


बाबा केदार के मार्ग पर हमलोग जंगल चट्टी से आगे बढ़ चले हैं। रास्ते में कुछ लोग दर्शन करके लौटते हुए मिले। भोजपुरी में बातें करते ग्रामीण लोग। मैं भी उनसे अपनी मातृभाषा में बोल पड़ा। पता चला उनका घर नेपाल में बीरगंज से 20 किलोमीटर दूर गांव में है। नेपाल का तराई क्षेत्र भी भोजपुरी भाषी है। वहां से हिंदू लोग हर साल बड़ी संख्या में केदारनाथ के दर्शन के लिए आते हैं। बुजुर्ग लोग पैरों में चप्पल पहने ही यात्रा कर रहे हैं। कुछ महिलाएं तो नंगे पांव भी चलती नजर आ रही हैं।

रास्ते में मिले उन बुजुर्ग ग्रामीण लोगों ने मुझे सलाह दी- मन ढीला मत करब, खात पीयत चलत जाईं। खाली पेट जादे दूर चलल ठीक नइखे। मन में बाबा के दर्शन के ललक बनल रहे के चाहीं। जरूर पहुंच जाइब। तो हमने उनकी सलाह गांठ बांध कर याद कर ली है। दरअसल बड़ी संख्या में शहरी लोग जिन्हे पैदल चलने की आदत नहीं है, वे इस यात्रा को पूरा नहीं कर पाते। फिर रास्ते में उन्हें घोड़ा या पिट्ठू का सहारा लेना पड़ता है। 

जंगल चट्टी के दो किलोमीटर बाद अगला पड़ाव आया जिसका नाम भीमबली है। यहां पर कई दुकानें हैं खाने पीने की। यहां सभी लोग यात्रा विराम जरूर लेते हैं। घोड़े वाले भी रुक जाते हैं और पदयात्री भी। तो यह एक व्यस्त ठहराव है केदारनाथ मार्ग का। भीमबली में आमने सामने की दो दुकानों में गर्मागर्म पकौड़े बन रहे हैं। यहां पर हमने भी थोड़े पकौड़े खाए। चालीस रुपये की एक प्लेट। हमारे साथियों ने चाय भी पी। आसमान में बादल घुमड़ रहे हैं। हालांकि अभी बारिश नहीं हो रही है। 

रास्ते में महाबली भीम का मंदिर - भीमबली में महाभारत के लोकप्रिय और बलशाली पात्र महाबली भीम का एक मंदिर है। जाते समय ये मंदिर बायीं तरफ दिखाई देता है। उनके नाम पर ही इस स्थल का नाम भीमबली है। मंदिर के पुजारी ने मेरे माथे पर भभूत का तिलक लगाया और आशीर्वाद भी दिया। उनके आशीर्वाद से यात्रा को संबल मिला। कहा जाता है कि बाबा केदारनाथ का मंदिर महाबली भीम ने ही बनाया था। तो उनके सम्मान में बसा है भीमबली का ये पड़ाव। बाद में यहां महाबली भीम का मंदिर बनवा दिया गया। 

बायोमेट्रिक पर्ची की जांच - भीमबली में ही आपकी यात्रा की बायोमेट्रिक पर्ची की जांच होती है। जांच करने वाले के पास जीपीएस मशीन होती है, जिससे हर यात्री का रिकॉर्ड दर्ज हो जाता है। केदारनाथ की यात्रा में आप गौरीकुंड में तकरीबन 2000 मीटर की ऊंचाई पर होते हैं। भीमबली तक पदयात्रा करते हुए आप 2670 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं। यहां आकर मौसम थोड़ा ठंडा होने लगता है।



कई लोगों को केदारनाथ की इस यात्रा में भीमबली से आगे ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है। ऐसे लोगों के लिए गौरीकुंड में ऑक्सीजन का सीलिंडर भी मिलता है। एक सीलिंडर की कीमत 250 से लेकर 400 रुपये तक होती है। हालांकि हमें रास्ते में इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ी। भीमबली से आगे का रास्ता थोड़ा सा उतार वाला है। पहाड़ी रास्ते में लगातार चढ़ने के बाद उतरने को मिले तो बड़ी राहत महसूस होती है। 

भीमबली से महज एक किलोमीटर चलने के बाद हमलोग रामबाड़ा पहुंच गए हैं।रामबाड़ा गौरी कुंड से सात किलोमीटर की दूरी पर है। पहले यह केदारनाथ यात्रा के बिल्कुल मध्य में हुआ करता था। यहां आपको आगे की यात्रा के लिए मंदाकिनी नदी को पार करना पड़ता है। यहां पर मंदाकिनी नदी पर दो पैदल पार पुल बने हैं। 

पहले पुल से घोड़े वाले जाते हैं जबकि दूसरे पुल से पैदल यात्री। पहले पुल वाला रास्ता दो किलोमीटर लंबा है। पुराने पुल से घोड़े वालों को जाने की अनुमति नहीं है। अगर आप छोटा रास्ता अपनाना चाहते हैं तो आगे की यात्रा के लिए पुराने पुल का ही चयन करें। हमें रास्ते में मिले एक सफाई कर्मी ने यही सलाह दी। उनकी सलाह दुरुस्त रही। 

तो रामबाड़ा में हमने पुराने रास्ते का ही चयन किया। यहां पर भी चाय नास्ते, मैगी आदि की कुछ दुकानें हैं। मंदाकिनी की धारा के किनारे छतरियां लगी हैं। यहां पर थोड़ी देर बैठना अच्छा लगता है। यहां पर हमारी मुलाकात फिर अवस्थी जी और श्रीवास्तव जी के परिवार से हुई। अगर आप रुकना चाहें तो रामबाड़ा में रहने के लिए टेंट का भी इंतजाम है। दरअसल काफी लोग केदारनाथ की यात्रा एक दिन में पूरा नहीं कर पाते तो वे रास्ते में कहीं रुक जाते हैं।
केदारनाथ - पैदल मार्ग
गौरीकुंड से केदारनाथ 16 किमी    - घोड़ा पड़ाव - 0.5 किमी
भैरव मंदिर चिरवासा  - 2.5 किमी  - जंगलचट्टी - 04 किलोमीटर पर
भीमबली - 6 किमी पर  -  रामबाड़ा  - 07 किलोमीटर
छोटी लिनचौली – 8.5 किलोमीटर -  बड़ी चिनचोली - 11 किमी पर
छानी कैंप - 12 किमी पर  -  रुद्रा प्वाइंट – 14 किमी पर
बेस कैंप - 14.5 किमी पर  - हेलीपैड15.5 किमी पर।
बाबा केदार का मंदिर - 16 किलोमीटर पर 
-- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( JANGNAL CHATTI, BHIMBALI, BHIMA OF MAHABHARAT TEMPLE, RAMBARA, KEDAR-08 ) 

7 comments:

  1. वाह सर ,आपके साथ साथ हम भी चल रहे हैं। आम आदमी की सरल भाषा में जिस तरह से आप एक एक बात का वर्णन करते हैं और साथ में फोटोज़ डालते हैं वो आनंदित कर देता है। बहुत सुन्दर सर बहुत ही उम्दा

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  2. बहुत बढ़िया विवरण है ----

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  3. सचित्र भ्रमण लेख बहुत रोचक लगा ।

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    1. धन्यवाद रेखा जी, आगे भी पढ़ते रहिए, केदारनाथ, तुंगनाथ , त्रियुगीनारायण की यात्रा 26 कड़ियों में है

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