Thursday, July 26, 2012

बोल बम - पदयात्रा में होते हैं भोले बाबा के दर्शन


आनंदित करती है तीन दिन की पदयात्रा 
आस्था की यात्रा बोलबम में बाबा के मंदिर में जलाभिषेक करने का जो आनंद है, उतना ही या फिर उससे कहीं ज्यादा आनंद की अनुभूति सुल्तानगंज से देवघर पहुंचने की तीन दिन की पदयात्रा में है। ये सफर इतना विविधापूर्ण है कि आपको आनंदित करता है। वास्तव में शिव से साक्षात्कार तो इस यात्रा के क्रम मेंं ही हो जाता है। यह आपके अनुभूति की बात है कि शिव आपको किस रूप में मिलते हैं।  


दर्शनिया में होते हैं बाबा मंदिर के दर्शन - देवघर में बाबा वैद्यनाथ धाम मंदिर से एक किलोमीटर पहले आता है दर्शनिया। यह वैद्यनाथ देवघर शहर का बाहरी इलाका है। यहां से बाबा मंदिर के त्रिशूल के दर्शन हो जाते हैं इसलिए इसका नाम है दर्शनिया। अगर आप सीधे देवघर पहुंचना चाहते हैं दिल्ली हावड़ा लाइन पर जैसीडीह नामक रेलवे स्टेशन से वैद्यनाथ देवघर की दूरी 6 किलोमीटर है। हालांकि देवघर तक भी सीधी रेलवे सेवा है।

पंडो का शहर है देवघर - देवघर शहर में बाबा मंदिर पहुंचने से पहले दर्शनिया में ही हम अपने पंडा रत्नेश्वर मठपति झा के घर में रुके। उनका घर हिंदी विद्यापीठ गेट के पास है। शायद अब वे इस दुनिया में नहीं होंगे, क्योंकि वे काफी बुजुर्ग हो चुके थे। उनके बेटे अपने पुरोहितों का ख्याल रखते होंगे। वैसे पूरा देवघर शहर पंडों से पटा पड़ा है। जो लोग नियमित जाते हैं उनका कोई न कोई तय पंडा पहले से ही होता है। ये सारे पंडा लोगों ने अपने आवास में धर्मशाला बना रखी है। उनके ठहरने का कोई शुल्क तय नहीं है। जैसा भक्त वैसी सेवा। कुछ पंडों ने वातानुकूलित कमरे भी बनवा रखे हैं अपने भक्तों के लिए। 
इन पंडा परिवारों की साल एक महीने यानी सावन में ही इतनी कमाई हो जाती है कि साल के 11 महीने कुछ खास काम करने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। 



देवघर से बाबा बासुकी नाथ की ओर - बोलबम की यात्रा में कांवर मे ंदो जल पात्र होते हैं। एक बाबा धाम के लिए दूसरा दुमका जिले में स्थित बासुकीनाथ मंदिर के लिए। ऐसी मान्यता है कि बासुकीनाथ में पूजा किए बिना सिर्फ देवघर मंदिर का पूजा अधूरी है। बासुकीनाथ देवघर-दुमका मुख्य पर 40 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पहुंचने में एक घंटे में लगते है। बासुकीनाथ झारखंड के दुमका जिले में जरमुंडी कस्बे के पास स्थित है। दुमका से बासुकीनाथ की दूरी 25 किलोमीटर है। बासुकी नाथ को नागेश या फौजदारी बाबा के नाम से जाना जाता है। 


कहा जाता है कि ये बाबा लोगों की जल्द सुन लेेते हैं और तुरंत न्याय भी करते हैं। किसी समय में बासुकीनाथ मंदिर के आसपास का इलाका सघन वन वाला हुआ करता था। कहा जाता है कि प्राचीन समय में बासुकी नाम का एक किसान जमीन पर हल चला रहा था तभी उसके हल का फाल किसी पत्थर के टुकड़े से टकरा गया। इसके बाद वहां दूध की धारा बहने लगी। इसे देखकर बासुकी भागने लगा तब आकाशवाणी हुई, तुम भागो नहीं मैं शिव हूं।  इसके बाद यहां पूजा होने लगी। उसी बासुकी के नाम पर इस मंदिर का नाम बासुकीनाथ धाम पड़ा। 

बाबा धाम में जलाभिषेक के बाद अगले दिन सुबह हमलोग बासुकीनाथ धाम के लिए चल पड़े। देवघर से हमने बस से बासुकीनाथ धाम तक की यात्रा की। सावन में देवघर से बासुकीनाथ के लिए 24 घंटे बसें चलती रहती हैं। दुमका जिले में जरमुंडी से थोड़ा आगे बाबा बासुकीनाथ का मंदिर है। ज्यादातार बोलबम के यात्री देवघर से बासुकीनाथ बस से ही जाते हैं। पर कुछ लोग ये यात्रा भी पैदल ही करते हैं।



देवघर की तुलना में बासुकीनाथ मंदिर में  जलाभिषेक करने में ज्यादा समय नहीं लगा। पर दर्शन की लाइन में मैं और पिताजी अलग हो गए। मंदिर में जल चढ़ाने के बाद निकलते वक्त किसी ने जेबकतरे ने मेरे निक्कर की जेब से सारे पैसे निकाल लिए। हालांकि रुपये कुछ ज्यादा नहीं थे। बासुकीनाथ से लौटकर हमलोग जैसीडीह रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां से हमने पटना के लिए ट्रेन ली। शाम तक हमलोग हाजीपुर अपने घर पहुंच चुके थे।

- विद्युत प्रकाश मौर्य  -vidyutp@gmail.com

(DEVGHAR, DEOGHAR, SULTANGANJ, BABADHAM, BOLBAM, SAWAN, SHIVA, BASUKINATH, DUMKA, JHARKHAND) 

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