Friday, May 15, 2020

केदारनाथ की ओर – गौरीकुंड से जंगलचट्टी तक

केदारनाथ के लिए पदयात्रा का मार्ग गौरी कुंड से आरंभ होता है। यह दूरी आजकल 16 किलोमीटर है। रामबाड़ा से अगर आप नए रास्ते से जाएं तो यह दूरी 18 किलोमीटर हो जाती है। साल 2013 में आई आपदा से पहले यह दूरी 14 किलोमीटर थी। पर रामबाड़ा के आसपास नए रास्ते के कारण दूरी में थोड़ा इजाफा हुआ है। सवाल की कितना समय लगेगा चलने में। तो यह आपके चलने की क्षमता पर निर्भर करता है कि पहाड़ों पर चढ़ाई वाली यह दूरी आप कितने घंटे में तय कर पाते हैं। कुछ लोग तो पांच घंटे में भी पहुंच जाते हैं। पर हर किसी को अपनी क्षमता के अनुरूप ही चलना चाहिए।


गौरी कुंड को यह नाम शिव की अर्धांगिनी पार्वती के नाम पर मिला है। गौरी कुंड 1981 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गौरी कुंड बाजार को देखकर हमें साल 2019 में आई केदारनाथ फिल्म की याद आ गई। इस फिल्म की कहानी को गौरी कुंड बाजार की पृष्ठभूमि में फिल्माया गया है। गौरी कुंड से केदारनाथ जाने के लिए पैदल के अलावा भी कुछ तरीके हैं। आप घोड़े से जा सकते हैं। पिट्ठू से जा सकते हैं। या फिर पालकी से जा सकते हैं। पालकी को चार लोग मिलकर ढोते हैं। घोड़े का किराया 2300 रुपये सरकार की ओर से तय है। पालकी और पिट्ठू के लिए मोलभाव करना पड़ता है। यह 5 से 15 हजार रुपये तक कुछ भी हो सकता है। किराया आदमी के वजन पर निर्भर करता है।

मुझे गौरीकुंड बाजार में ऑक्सीजन सिलेंडर भी बिकते हुए नजर आए। काफी लोग खरीदकर साथ ले जाते हैं। कई पुराने यात्रा वृतांत लेखकों ने ऑक्सीजन सिलेंडर लेने की सलाह दी है। पर स्वस्थ व्यक्ति को इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ती। हमें भारतीय डाक विभाग का पोस्ट ऑफिस नजर आया। भले ही अब खतो-किताबत का दौर कम हो गया है, पर देश में डाक विभाग की अहमियत कम नहीं हुई है। गौरीकुंड के बाजार में जो आप रंग बिरंगी घंटियों से सजी दुकानें देख रहे हैं, वास्तव में ये उन हजारों घोड़ों के लिए है जो केदारनाथ के मार्ग  पर चलते हैं। 

गौरी कुंड में हमने अपना अतिरिक्त सामान एक दुकान में जमा कर दिया। मैंने अपने साथ डिकैथेलॉन का एक मिनी पिट्ठू बैग ही अपने साथ रखा है। जिसमें एक विंडचिटर, स्वेटर और एक पायजामा है। जिस दुकान में सामान जमा किया उसका नाम है ओम शक्ति जनरल स्टोर। स्टोर वाले ने सामान रखने का 50 रुपये प्रति बैग किराया लिया।
यहीं से हमलोगों ने 25-25 रुपये में एक छड़ी खरीदी, जो पदयात्रा में सहायक होगी। छड़ी में नीचे लोहे की नोक लगी हुई है। (ओम शक्ति जनरल स्टोर -  9456554660, 8979096299 ) ओम शक्ति स्टोर के पास रहने के लिए कमरे भी उपलब्ध हैं। स्टोर के बगल में देव दर्शन रेस्टोरेंट है, जहां हमने एक-एक पराठे खाए। लंबी पदयात्रा करनी है ना तो एक बार में ज्यादा खाना भी ठीक नहीं होता। 



जय बाबा केदारनाथ यात्रा आरंभ - सुबह तकरीबन पौने 11 बजे हमलोग यात्रा पर चल पड़े हैं। तकरीबन आधा किलोमीटर तक गौरीकुंड का भीड़भाड़ वाला बाजार है। यहां आप अपनी जरूरत की चीजें खरीद सकते हैं। फिर आगे कुछ नहीं मिलेगा। गौरीकुंड के भीड़भाड़ वाले बाजार में खड़ी चढ़ाई को पार कर हम घोड़ा पड़ाव पहुंच गए हैं। यहां घोड़ा पड़ाव में सैकड़ो घोड़े खड़े हैं। हम सितंबर महीने में केदारनाथ की यात्रा कर रहे हैं। आजकल श्रद्धालुओं की भीड़ कम है। मई जून महीने में यहां 15 हजार घोड़े और 10 हजार पिट्ठू लगातार लोगों को लेकर चल रहे होते हैं तब यहां पैदल यात्रा मार्ग पर भारी भीड़ का आलम होता है।


घोड़ा पड़ाव से आगे भी चढ़ाई शुरू हो गई है। जैसा कि हर पहाड़ की पद यात्रा का तकाजा होता है कि शुरू में तेज चलकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखाना चाहिए। इसलिए हमलोग धीरे-धीरे ही चल रहे हैं। एक किलोमीटर चलने पर एक जगह हम सुस्ताने के लिए बैठे। 
थोड़ी दूर चलने पर ही रास्ते में दो तीन सुंदर झरने हमारी नजरों के सामने हैं। पैदल का ये रास्ता भी मंदाकिनी नदी के साथ साथ चलता है। राह में मिलने वाले झरनों का पानी इसी मंदाकिनी में समाहित होता जाता है।

हर आधे किलोमीटर के बाद चाय नास्ता और भोजन की दुकानें हैं। पर रास्ते में खाने-पीने की वस्तुओं की दरें बढ़ने लगी हैं। जैसे चाय 20 रुपये, 10 वाली फ्रूटी या एपल जूस 20 रुपये में। मैगी नूडल्स 40 से लेकर 60 रुपये में। घोड़ा पड़ाव के बाद ढाई किलोमीटर पर चिरवासा नामक जगह आई। यहां पर भैरव मंदिर बना हुआ है। यहां पर एक अस्थायी हेलीपैड भी बना है। ऐसे हेलीपैड आपदा की स्थित में लोगों को निकालने के लिए बनाए गए हैं।





किसी जमाने में हिमालय में सभी लोग पदयात्रा करते हुए ही आते थे। जहां कोई चट्टी नामक जगह मिले तो समझिए वहां कोई दुकान होगी। कुछ खाने पीने का इंतजाम होगा  और रात में सोने का इंतजाम भी होगा। उत्तराखंड में कई पदयात्रा के मार्ग पर इस तरह की चट्टी आती है। तो हमलोग चीरबासा के बाद पहुंचने वाले हैं जंगल चट्टी। 



और तकरीबन चार किलोमीटर के सफर के बाद हम जंगल चट्टी पहुंच गए हैं। जंगल चट्टी में खाने पीने की दुकाने हैं। शौचालय की भी सुविधा है। जंगल चट्टी पहुंचकर लगा कि हमारी चलने की गति कुछ ज्यादा ही धीमी है। हम एक घंटे में दो किलोमीटर भी नहीं चल रहे हैं। पर यात्रा जारी है बने रहिए हमारे साथ...
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
जंगल चट्टी से ठीक आगे रुद्रा फॉल। ऐसे कई सुंदर झरने केदारनाथ के पदयात्रा मार्ग में आते हैं। 

केदारनाथ - पैदल मार्ग - पड़ाव और दूरियों पर एक नजर - 
गौरीकुंड से केदारनाथ 16 किमी    - घोड़ा पड़ाव - 0.5 किमी
भैरव मंदिर चिरवासा  - 2.5 किमी  - जंगलचट्टी - 04 किलोमीटर पर
भीमबली - 6 किमी पर  -  रामबाड़ा  - 07 किलोमीटर
छोटी लिनचौली – 8.5 किलोमीटर -  बड़ी चिनचोली - 11 किमी पर
छानी कैंप - 12 किमी पर  -  रुद्रा प्वाइंट – 14 किमी पर
बेस कैंप - 14.5 किमी पर  - हेलीपैड - 15.5 किमी पर।
बाबा केदार का मंदिर - 16 किलोमीटर पर 
(GAURIKUND, CHIRVASA, JANGALCHATTI, KEDAR 07 )




8 comments:

  1. सजीव एवं रोचक चित्रण ।

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  2. बहुत ही सुंदर ढंग से वर्णन किया है ,इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद ,सजीव और रोचक चित्रण ,घर बैठे दर्शन कर लिया बाबा केदारनाथ मंदिर का, गौरीशंकर को प्रणाम जय हो

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    1. धन्यवाद अभी तो हम रास्ते पर ही हैं। चार कड़ियों बाद अपलोड होने वाले पोस्ट में बाबा के दर्शन होंगे। आप लगातार पढ़ते रहिए। और प्रतिक्रिया देते रहिए।

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    1. धन्यवाद वंदना जी, आगे भी पढ़ते रहिेए

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  4. सुन्दर यात्रा ---
    बने हुए हैं आपके साथ हम भी !

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