Wednesday, May 13, 2020

गुप्तकाशी से गौरीकुंड – बाबा केदार के लिए चढ़ाई


गुप्त काशी की भोर सुहानी है। हमारे होटल की बालकोनी से सामने उखी मठ दिखाई दे रहा है। उधर से ही सुबह का सूरज उग रहा है। उसकी किरणें हमारे चेहरे को चूम रही है। गुप्त काशी से उखीमठ ऊंचाई पर बसा हुआ है। इसलिए गुप्त काशी से पूरा शहर नजर आता है। हमलोग सुबह-सुबह आगे की यात्रा के लिए तैयार हो गए हैं। गुप्त काशी की सड़क पर मुझे एक एंबेस्डर कार दिखाई देती है। अतीत की कार। मैदानी इलाकों में अब ये कार भले नजर नहीं आती हो पर अभी पहाड़ के लोगों ने अभी इसे अपने सिर आंखों पर बिठा रखा है। इससे पहले मुझे एंबेस्डर मध्य प्रदेश के सीहोर में चलती नजर आई थी।  

गुप्त काशी में सुबह छह बजे हमलोग स्नान करके आगे के सफर के लिए तैयार हो गए हैं। हमारे होटल के नीचे ही एक टैक्सी लगी है जो गौरी कुंड तक जा रही है। गुप्त काशी से सोन प्रयाग 27 किलोमीटर है। सोन प्रयाग से गौरी कुंड 5 किलोमीटर। इस टैक्सी में कुछ सवारियां पहले से हैं। उन्हें कुछ और लोगों की जरूरत है। तो हमलोग ने जाकर इसी टैक्सी में जगह ले ली। 

टैक्सी में कानपुर से सत्य प्रकाश अग्निहोत्री और उन्नाव के अजय श्रीवास्तव जी का परिवार जा रहा है। चलते-चलते उन लोगों से जान पहचान हुई जो आगे जाकर और प्रगाढ़ होती चली गई। अग्निहोत्री जी और श्रीवास्तव जी पहले भी केदारनाथ की यात्रा पर आ चुके हैं। वैसे आपको बता दें कि कुछ दशक पहले केदारनाथ की पैदल यात्रा गुप्त काशी से ही आरंभ हो जाती थी। जाहिर है तब बाबा तक पहुंचने के लिए लंबी पदयात्रा करनी पड़ती थी। अब तो गौरी कुंड तक सड़क बन गई है।

टैक्सी ने गुप्त काशी से पांच किलोमीटर का सफर किया होगा कि नारायण कोटि से आगे जाकर रुक गई। पता चला कि पिछली रात अच्छी बारिश में पहाड़ से पत्थर गिरे हैं और रास्ता बंद हो गया है। हमें इस बारे में गुप्त काशी में ही पता चल गया था। पर चालक ने बताया था कि सुबह सुबह रास्ता खुल जाएगा। और ठीक सुबह सात बजे क्रेन पहुंच चुकी है रास्ता साफ करने का काम तेजी से जारी है। पहाड़ों में रास्ता बंद होने की घटना कभी भी हो सकती है। यहां आधे घंटे से ज्यादा खड़े होने के बाद रास्ता खुल पाया।

गुप्त काशी में ही हेलीपैड भी है। जो लोग केदारनाथ की यात्रा हेलीकॉप्टर से करते हैं उन्हें गुप्त काशी में रुकना पड़ता है। यहां से हेलीकाप्टर से महज 15 मिनट में केदारनाथ पहुंचा जा सकता है। उड़ान का किराया आमतौर पर एक तरफ का 4000 रुपये होता है। आने जाने का 8000 रुपये होता है। हमारे होटल में एक तमिल सज्जन रुके थे। वे एक दिन और रुकेंगे, क्योंकि उन्हें आज हेलीकॉप्टर का टिकट नहीं मिल पाया है।

नारायण कोटि में बंद हुआ रास्ता अब खुल गया है। हमारी टैक्सी बढ़ चली है। पर मौसम ठंडा है। आसपास बादल अटखेलियां करते हुए दिखाई दे रहे हैं। सोन प्रयाग से पहले रास्ते में फाटा नामक पड़ाव भी आता है। फाटा में भी यात्रियों का पंजीकरण होता है। फाटा में हेलीपैड भी है। इसलिए फाटा के आसपास सड़क पर कई होटल बने हुए हैं। अक्सर हेलीकॉप्टर सेवा के टिकट के इंतजार में रहने वाले लोग इन होटलों में रुकते हैं। फाटा का पूरा इलाका लैंड स्लाइड जोन में आता है। हल्की बारिश में भी यहां रास्ता बंद होने की संभावना रहती है।

फाटा के पास ब्युंग में मंदाकिनी में मिलने वाली ब्युंग नदी पर एक हाईड्रो इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट भी बना है। फाटा के बाद सरसी, रामपुर जैसे छोटे छोटे गांव आते हैं रास्ते में। इन सब जगह पर आवासीय होटल बने हुए हैं। मतलब आप अपने निजी वाहन से जा रहे हैं तो कहीं भी रुक सकते हैं। रामपुर में तो जीएमवीएन का रेस्ट हाउस भी है। इस मार्ग में मंदाकिनी नदी की धारा सड़क से थोड़ी दूर चलती है। 
और पहुंच गए हम सोन प्रयाग। 




गुप्त काशी से सोन प्रयाग के बीच सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। सारा रास्ता लगभग कच्चा है। इसलिए सफर में ज्यादा समय लग रहा है। इस तरह गौरीकुंड से लगभग 23 किलोमीटर का सफर तय करके हमलोग सोन प्रयाग पहुंच गए हैं। सोन प्रयाग में विशाल पार्किंग बनी हुई है। बाहर से आने वाली बसें और टैक्सियां यहीं रुक जाती है। अगर निजी वाहन यानी कार या बाइक से आप पहुंचे हैं तो यहीं पार्किंग में वाहन लगाना होगा। 


सोन प्रयाग के बाजार में महिलाएं फुटपाथ पर कस्तूरी बेच रही हैं। कहतीं है इसको लगाने से देर तक खुशबू बनी रहती है। यह कितना असली है पता नहीं।एक बुजुर्ग महिला मेरे हाथों पर कस्तूरी रगड़ कर उसकी खूशबू का प्रमाण देती हैं, पर मैं उसे खरीदता नहीं हूं।

छठा प्रयाग है सोन प्रयाग - हां जी,पांच नहीं छह प्रयाग हैं उत्तराखंड में। सोन प्रयाग उत्तराखंड का छठा प्रयाग है। यहां पर बासुकी नदी मंदाकिनी में आकर मिलती है। सोन प्रयाग 1829 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियां दिखाई देने लगती हैं। सोनप्रयाग से 13 किलोमीटर की दूरी पर त्रियुगी गांव में त्रियुगीनारायण का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। वहां हम केदारनाथ से वापसी में जाएंगे।

सोन प्रयाग में केदारनाथ के यात्रियों का बायोमेट्रिक पंजीकरण काउंटर भी है। हमलोग अपना पंजीयन ऋषिकेश में ही करा चुके हैं। पर कानपुर वाले परिवार के लोग यहां पर अपना पंजीयन करा रहे हैं। सोन प्रयाग में रहने के लिए कई होटल और गेस्ट हाउस भी उपलब्ध हैं। केदारनाथ के यात्रियों का यह भी बड़ा पड़ाव होता है। खास तौर पर उन लोगों के लिए जो अपने वाहन से यात्रा पर आते हैं।


यहां से जा सकते हैं बद्रीनाथ - केदारनाथ से वापसी के बाद आप सोन प्रयाग से बद्रीनाथ जाने के लिए बसें ले सकते हैं। यहां से सुबह 5.00 बजे, 5.30 बजे, 6.00 बजे और 8.10 बजे बद्रीनाथ के लिए सीधी बसें जाती हैं। ये बसें कुंड से गोपेश्वर होते हुए चमोली होकर जाती हैं। वहीं सोन प्रयाग से हरिद्वार देहरादून के लिए भी सीधी बसे हैं। रुद्रप्रयाग के लिए आखिरी बस दोपहर तीन बजे है। सोन प्रयाग से बद्रीनाथ की दूरी 230 किलोमीटर जबकि जोशीमठ की दूरी 185 किलोमीटर है।

गौरी कुंड की ओर - पंजीयन का का पूरा होने के बाद हमारी टैक्सी एक बार फिर आगे चलने के लिए तैयार है। सोन प्रयाग से गौरी कुंड की दूरी सिर्फ पांच किलोमीटर है। यहां सड़क की हालात ठीक है। पर इस सड़क पर सिर्फ उत्तराखंड की स्थानीय टैक्सियां ही चलती हैं। टैक्सी वाले सोन प्रयाग से गौरी कुंड का किराया 10 रुपये लेते हैं। सुबह के 10 बजने वाले हैं और हमलोग गौरी कुंड पहुंच गए हैं।

एक सुंदर झरने के पास टैक्सी वाले ने रोक दिया। कहां यहां से आप लोग पैदल चले जाएं। हालांकि टैक्सी थोड़ी आगे तक जा सकती थी। हमारे आसपास घोड़े वाले और पिट्ठू वालों की भीड़ लगी है। वे हर किसी से पूछ रहे हैं, घोड़ा चाहिए... पिट्ठू चाहिए... पर हमलोग तो पदयात्रा करने वाले हैं। इसलिए घोड़े वालों को सम्मान से मना करते हुए आगे की ओर बढ़ चले।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com 
(GUPT KASHI, AMBASSADOR CAR, NARAYAN KOTI, FATA, SARSI, RAMPUR, SON PRAYAG, GAURI KUND, KEDAR-06 )

5 comments:

  1. हमेशा की तरह बहुत ही कमाल और उम्दा पोस्ट | आपका ब्लॉग एक बेहतरीन गाईड बुक है हमारे जैसे यात्रा प्रेमी साथियों के लिए | मुझे तो हमेशा ही ऐसा लगता है मानो आपके साथ ही आपकी बगल में बिलकुल संग इस और आपकी हर यात्रा में रहता हूँ | बहुत ही यादगार पोस्ट सर |

    ReplyDelete
  2. धन्यवाद सर, आपकी प्रतिक्रियाएं प्रेरणा देती हैं।

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छा सचित्र यात्रा वृत्तांत.

    ReplyDelete
  4. उम्दा बेहतरीन गाईड बुक

    ReplyDelete