Tuesday, May 19, 2020

साल 2013 की आपदा में तबाह हो गया था रामबाड़ा


केदारनाथ क्षेत्र में 2013 के 14-15 जून को आई भीषण आपदा में रामबाड़ा पूरी तरह तबाह हो गया। यहां पर जो भी घर और दुकानें बनीं थी, उसे मंदाकिनी नदी ने अपनी तीव्र धारा में समाहित कर लिया। रामबाड़ा में कुछ नहीं बचा। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग कुछ मिनट में ही काल के गाल में समा गए। हमें रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी पर बना पुराना पुल दिखाई देता है जो बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। 

अब उस पुल के बगल में ही एक नया पुल बना दिया गया है। इस पुल के पास थोड़ी देर रुक कर आपदा की भयावहता की कल्पना करने के बाद हमलोग आगे की ओर बढ़ चले। केदारनाथ की यात्रा पर आते-जाते लोग यहां पर ठिठकर रुक जाते हैं और पुराने बर्बाद हुए पुल को देखते हैं। यात्रा में हमें कई लोग ऐसे मिले जो सालों से केदारनाथ आते रहे हैं। उन्होंने हमें पुराने रामबाड़ा की रौनक के बारे में बताया।

साल 2013 से पहले तक रामबाड़ा में खाने-पीने के लिए कई होटल हुआ करते थे। रुकने का भी अच्छा खासा इंतजाम हुआ करता था। पर उस आपदा में एक ही झटके में सब कुछ तबाह हो गया। खत्म हो गया। केदारनाथ आपदा के एक साल बाद रामबाड़ा के पास नए रास्ते का निर्माण कराया गया। पर रामबाड़ा फिर आबाद नहीं हो सका। रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी का पुल पार करते ही हमें अदभुत नजारा दिखाई देता है।

बाबा केदार के लिए असली चढ़ाई की शुरुआत तो यहीं से होती है। दूर से सीढीदार रास्ते और उस पर चढ़ते उतरते लोग नजर आते हैं। यहां आपको साफ दिखाई देता है कि आपको किस ऊंचाई तक चढ़ते जाना है।

रामबाड़ा के बाद आगे तकरीबन पांच किलोमीटर तक यानी छानी कैंप तक का रास्ता वास्तव में खड़ी चढ़ाई वाला है। ये सीढ़ीदार रास्ता है। इस मार्ग में काफी लोग थकते हुए नजर आते हैं। रामबाड़ा से मंदाकिनी के तट से जब नजरें उठाकर देखेंगे तो काफी दूर तक लोग आपको चढ़ते उतरते नजर आते हैं। ये रास्ता दूर से तो काफी मनोरम दिखाई देता है। पर केदारनाथ के मार्ग में ये रास्ता ही सबसे चुनौतीपूर्ण है। तो चलिए आगे चलते हैं।

पर इस रास्ते में मैं पूरी ऊर्जा से तेजी से आगे बढ़ रहा हूं। मेरे साथी पीछे छूट रहे हैं। आगे रुक कर मैं उनका इंतजार करता हूं। पर वे पीछे दूर तक कहीं नजर नहीं आते। इस बीच हमारी मुलाकात कानपुर के अग्निहोत्री जी और श्रीवास्तव जी के परिवार से होती है। वे लोग सुबह गौरी कुंड से हमारे साथ चले थे। श्रीवास्तव जी का बेटा रुद्राक्ष भी थकने लगा है। मैं उसे उत्साहित करने की कोशिश करता हूं। कई बार केदार की यात्रा कर चुके उनके पिताजी भी जोश भरने की पूरी कोशिश में लगे हैं। फिर हम आगे बढ़ चलते हैं।
 

रामबाड़ा से डेढ़ किलोमीटर आगे छोटी लिंचोली और वहां से ढाई किलोमीटर आगे बड़ी लिंचोली आता है। बड़ी लिंचोली में कामधेनु रेस्टोरेंट है। यहां खाने पीने का अच्छा इंतजाम है। अगर आप इधर रुकना चाहें तो आपके ठहरने के लिए सरकारी टेंट सुविधा भी है। यहां पर एक इमरजेंसी हेलीपैड भी है। अगर आप एक दिन में केदारनाथ की पूरी पदयात्रा नहीं कर सकते तो लिंचोली में रुक सकते हैं। कई बुजुर्ग लोग ऐसा भी करते हैं।
 मैं लिंचौली से आगे चल पड़ा हूं। अकेला ही, मेरे साथ अभी पीछे ही हैं। 


केदारनाथ - पैदल मार्ग

गौरीकुंड से केदारनाथ 16 किमी  - घोड़ा पड़ाव - 0.5 किमी

भैरव मंदिर चिरवासा  - 2.5 किमी  - जंगलचट्टी - 04 किलोमीटर पर

भीमबली - 6 किमी पर  - रामबाड़ा  - 07 किलोमीटर

छोटी लिनचौली – 8.5 किलोमीटर - बड़ी चिनचोली - 11 किमी पर

छानी कैंप - 1किमी पर  - रुद्रा प्वाइंट 14 किमी पर

बेस कैंप - 14.5 किमी पर - हेलीपैड- 15.5 किमी पर।

बाबा केदार मंदिर - 16 किलोमीटर पर 
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.... तो जारी है बाबा केदारनाथ की यात्रा बने रहिए हमारे साथ। अगली कड़ी में पढ़े - पहुंच गए हम बाबा के दरबार में। 
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- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( RAMBARA, CHOTI LINCHOLI, BADI LINCHOLI, KEDAR 09 ) 



4 comments:

  1. 2013 के आपदा को कोई भुला नहीं सकता है इसमे नहीं हज़ारो घर बरबाद हुए l उसे कौन भुल सकता है l
    https://yourszindgi.blogspot.com/2020/04/blog-post_74.html

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  2. धीरे धीरे हम भी चल रहे हैं आपके साथ । मनोरम फोटो के साथ रोमांच भरी यात्रा उस पर आपकी सरल शैली । मोहक पोस्ट

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