Wednesday, April 29, 2020

बौद्ध संस्कृति का बड़ा केंद्र था मथुरा

किसी जमाने में मथुरा बौद्ध कला संस्कृति का बड़ा केंद्र था। यह बात मथुरा संग्रहालय की वीथियों में भ्रमण के दौरान और पुख्ता हो जाती है। संग्रहालय में गौतम बुद्ध की कई नायाब मूर्तियों का संग्रह है। किसी जमाने में मथुरा बौद्ध धर्म का बड़ा केंद्र था। यहां बुद्ध अपने जीवन काल में दो बार पधारे भी थे। 

बुद्ध की पहली मूर्ति मिली यहां पर - कान्हा की नगरी मथुरा से बुद्ध का बहुत पुराना रिश्ता है। गौतम बुद्ध की पहली मूर्ति मथुरा से ही मिली थी। मानव के रूप में बनी बुद्ध की यह मूर्ति 1860 में खुदाई के दौरान कटरा केशवदेव से मिली थी। यह मूर्ति कुषाण काल की बनी हुई है। कनिष्क के समय हुई बौद्ध धर्म की चौथी संगीति (महासभा) के बाद महायान शाखा के अनुयायियों ने बुद्ध की पहली मूर्ति मथुरा में बनाई थी।

बौद्ध शिक्षा का बड़ा केंद्र - बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने मथुरा में शिक्षा ग्रहण की थी। यहां पर 42 बौद्ध भिक्षु यमुना के किनारे रह कर शिक्षा ग्रहण करते थे। तब यहां 16 बौद्ध विहार हुआ करते थे। कुषाण काल में मथुरा उच्च शिक्षा का बड़ा केंद्र था। तब यह शहर कला के उच्चतम शिखर पर था। बौद्धधर्म के विद्वान आचार्य उपगुप्त मथुरा निवासी थे। उन्हें सम्राट अशोक ने प्रवचन के लिए पाटलिपुत्र आमंत्रित किया था। आचार्य उपगुप्त के बाद मथुरा बौद्ध संप्रदाय का बड़ा केंद्र बन गया।

कुषाण काल में ही मथुरा में बड़ी संख्या में बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण हुआ। मथुरा के शिल्पी गांधार कला में निर्मित बुद्ध की मूर्तियों से काफी प्रभावित थे। पर मथुरा के शिल्पियों की अपनी अलग शैली रही है। बुद्ध के जीवन से जुड़ी सबसे ज्यादा मूर्तियां गांधार और मथुरा कला शैली में ही बनी हैं।
मथुरा संग्रहालय में भगवान बुद्ध की पहली और दूसरी शताब्दी में बनी मूर्तियां देखी जा सकती हैं। यहां रामनगर ग्राम से प्राप्त महात्मा बुद्ध की आदमकद प्रतिमा देखी जा सकती है।

गौतम बुद्ध आए थे मथुरा - बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय के मुताबिक गौतम बुद्ध का मथुरा आगमन भी हुआ था। वेरंजक ब्राह्मण सुक्त में भी बुद्ध के मथुरा आने का प्रकरण मिलता है। वहीं पाली ग्रंथों के मुताबिक बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के 12 वर्ष बाद मथुरा आए थे। इसके बाद निर्वाण से कुछ पहले वे दूसरी बार मथुरा आए। तत्कालीन शासक अवंतिपुत्र ने उनका स्वागत सत्कार किया था। उन्होंने नगर की जनता को आशीर्वाद दिया था। उनकी प्रेरणा से काफी स्थानीय लोगों ने बौद्ध धर्म की दीक्षा भी ली थी।

मथुरा के राजकीय संग्रहालय में स्थित भगवान बुद्ध की प्रसिद्ध मूर्ति पास के जमालपुर टीले से प्राप्त हुई थी। यह भारतीय मूर्तिकला के श्रेष्ठ नमूनो में गिनी जाती है। इस मूर्ति के कमल के समान नेत्र, घुंघराले बाल, लंबे कान लोगों को आकर्षित करते हैं। मूर्ति चारों दिशाओं में ज्ञान का प्रकाश बिखेरती हुई प्रतीत होती है।

मूर्तिकला का बड़ा केंद्र सन 150 से 300 ईस्वी तक मथुरा मूर्ति कला का बड़ा केंद्र था। इस दौरान यहां शिल्पियों ने खूब मूर्तियां बनाई। मथुरा में भूतेश्वर टीला, कंकाली, कटरा केशवदेव, चामुंडा टीला, गोवर्धन, सौंख, महोली, अन्योर आदि से भी भगवान बुद्ध की कई प्रतिमाएं मिली हैं। इससे प्रतीत होता है कि मथुरा कुषाण काल में बौद्ध संस्कृति का बड़ा केंद्र था।

बुद्ध का जीवन दर्शन देखिए मूर्तियों में - मथुरा मूर्तिकला में बुद्ध के जीवन की चार प्रमुख घटनाओं को प्रदर्शित किया गया है। ये घटनाएं हैं - जन्म, संबोधि, धर्मचक्र प्रवर्तन (सारनाथ में दिया पहला उपदेश) और महा परिनिर्वाण। इसके अलावा बुद्ध के जीवन की तीन गौण घटनाओं को भी यहां प्रदर्शित मूर्तियों में देखा जा सकता है। इनमें इंद्र को भगवान बुद्ध का दर्शन देना, बुद्ध का स्वर्ग से माता को ज्ञान देकर वापस जाना और लोकपालों द्वारा बुद्ध को भिक्षापात्र अर्पण करना।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( MATHURA, GAUTAM BUDDHA MURTI, LIFE OF BUDDHA  )
आगे पढ़िए - संग्रहालय में शिव के रुपों का दर्शन करें 

6 comments:

  1. ज्ञानवर्धक !!!

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  2. आपके ब्लॉग से अच्छी जानकारियाँ मिल रही हैं !

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