Sunday, April 26, 2020

मथुरा वृंदावन रेल बस का सफर


रेलवे लाइन पर बस। जी हां, देश के कुछ स्थलों पर रेल की पटरियों पर बस भी चलती है। अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो ऐसी बस को देखने के लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। मथुरा जंक्शन से वृंदावन के बीच ऐसी रेल बस रोज संचालित होती है। इसका सफर भी काफी सस्ता है। दस रुपये में मथुरा से वृंदावन पहुंचिए। 

बीच में मरम्मत के लिए कई बार बंद रहने के बाद इन दिनों इस मार्ग पर रेल बस का संचालन किया जा रहा है। दरअसल मथुरा से भरतपुर और हाथरस का मार्ग कभी मीटरगेज हुआ करता था। ये सारी लाइनें अब ब्राडगेज में बदल चुकी हैं पर मथुरा से वृंदावन की की सिंगल ट्रैक वाली कुल 14 किलोमीटर की रेलवे लाइन अभी भी मीटर गेज ही है। इसे ब्राडगेज में बदलना रेलवे के लिए फायदे का सौदा नहीं है। इसलिए इस लाइन पर रेल बस चलाने की योजना बनी।


मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक और दो से आगरा दिल्ली मार्ग की रेलगाड़ियां गुजरती हैं। स्टेशन भवन के पूरब तरफ की लाइनो से हाथरस जाने वाली रेलगाड़ियां गुजरती हैं। इनके बीच में स्टेशन का मुख्य भवन है। इससे बाहर निकलने पर एक शेड के नीचे वृंदावन जाने वाली रेल बस खड़ी रहती है।

हर रोज पांच बार वृंदावन की ओर - आजकल ये ट्रेन सुबह में दो बार मथुरा से वृंदावन की तरफ और शाम को तीन बार वृंदावन की तरफ जाती है। यानी एक रेल बस पांच बार वृंदावन की तरफ जाती है और इतनी ही बार वृंदावन से मथुरा की तरफ वापस लौटती है।

 रेल बस सुबह 6.35 बजे, 8.55 बजे, 15.20 बजे, 16.55 बजे और शाम को 19.25 बजे मथुरा से वृंदावन के लिए प्रस्थान करती है। दोपहर में इस रेल बस का सफर कुछ घंटे के लिए थम जाता है।

वृंदावन से रेल बस सुबह 7.25, 9.40, शाम को 16.10 इसके बाद 17.40 और 20.30 बजे अपने सफर पर चलती है। रात को ये रेल बस मथुरा जंक्शन पर अपने शेड में आराम फरमाती है।

वृंदावन वन रेलवे स्टेशन का स्टेशन कोड बीडीबी (BDB) है। इस रेल के सफर में रास्ते में दो स्टेशन आते हैं। मथुरा से दो किलोमीटर आगे श्रीकृष्ण जन्मस्थान और छह किलोमीटर पर मसानी। इसके बाद आखिरी स्टेशन वृंदावन। यानी ऐतिहासिक श्रीकृष्ण जन्मभूमि को यह मीटर गेज रेल नेटवर्क जोड़ती है।



इस 14 किलोमीटर की सफर के लिए रेल बस का किराया 10 रुपये है। पर आपको इसके टिकट के लिए कहीं रेलवे की खिड़की पर जाकर लाइन में लगने की कोई जरूरत नहीं है। इसका टिकट रेल बस में ही मिल जाता है। हालांकि स्थानीय लोगों में यह रेल बस सेवा ज्यादा लोकप्रिय नहीं हैं। इसलिए रेल बस के सफर में कोई खास भीड़ नहीं होती।

एक कोच वाली यह रेल बस डीजल इंजन से संचालित होती है। रास्ते में जहां जहां सड़कों के समपार आते हैं वहां पर लोको पायलट को खुद सावधानी बरतते हुए बस की रफ्तार को धीमी करके ट्रेन का संचालन करना पड़ता है। कई साल इस ट्रैक पर रेल सेवा बंद रहने पर पटरियों के आसपास लोगों ने अतिक्रमण कर लिया था।

इस रेल बस का निर्माण रेलवे के इज्जतनगर वर्कशॉप में किया गया है। पहले एक रेल बस हुआ करती थी। साल 2019 में एक और रेल बस उपलब्ध कराई गई। रेल बस के कोच के बाहर कृष्ण के जीवन से जुड़ी झांकियों की पेंटिंग लगी है। मथुरा से वृंदावन दर्शन के लिए रेल बस से सफर एक सस्ता तरीका है।
मथुरा जंक्शन पर रेल बस का डिपो बना हुआ। इस रेल बस की व्यवस्था एक सीनियर सेक्सन इंजीनियर के हवाले है। यह रेल बस सेवा उत्तर मध्य रेलवे के तहत आती है।
ऐसी ही एक रेल बस दक्षिण भारत में कर्नाटक के कोलार और बंगारपेट के बीच चलती थी जो अब बंद हो गई। 


मेट्रो रेल की योजना - भविष्य में मथुरा वृंदावन के इस रेलवे लाइन को ऊपर एलिवेटेड मेट्रो रेलवे ट्रैक बनाने की योजना पर काम चल रहा है। जहां अभी रेलवे लाइन है वहां सड़क और उसके ऊपर रेलवे ट्रैक बिछाने का प्रस्ताव है। अगर ऐसा हुआ तो मीटर गेज रेल बस सेवा इतिहास बन जाएगी।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
-        ( MATHURA, VIRNDAVAN, RAIL BUS, METER GAUGE )

8 comments:

  1. इसी तरह की एक लाइन एट से कोंच के लिए भी है, दस-ग्यारह किमी की. उस पर तीन डिब्बों की ट्रेन चलती है. ये हमारे जिले में है.

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    1. हां, पर तीन डिब्बों की रेल को बस नहीं कहेंगे

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  2. बढ़िया जानकारी दी आपने।

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  3. हमेशा की तरह बहुत ही सुंदर सारगर्भित और सटीक जानकारी दी आपने हमेशा की तरह ही बेहद उपयोगी पोस्ट

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