Wednesday, April 22, 2020

कुसुम सरोवर के पास महाराजा सूरजमल की छतरी


गोवर्धन शहर में घूमते हुए इस बार राजस्थान के भरतपुर के जाट राजाओं की समाधि देखने की इच्छा है। पिछली बार मैं उन्हें नहीं देख पाया था। ये समाधि कुसुम सरोवर के पास स्थित है। ये समाधि उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन है। मैं जब वहां पहुंचा जो मौके पर मौजूद केयरटेकर ने कहा कि अंदर जाने की इजाजत नहीं है। और कुरेदने पर वे कहते हैं- ये तो राजाओं की कब्रगाह है, आप इसे क्यों देखना चाहते हो। 

दरअसल लोग मानते हैं कि भले ही शाही श्मशान घाट हो पर यहां पर उनकी आत्माएं विचरण करती होंगी। इसलिए लोग यहां आने और अंदर जाने से भय खाते हैं। पर राजा लोग तो अपने समाधि को भी भव्य बनाना चाहते थे। तभी तो उनकी छतरियां और देवल को भी इतना भव्य रूप प्रदान किया गया है। राजस्थान में इसी तरह जोधपुर के राजाओं की छतरियां मंडोर में बनाई गई हैं।
भरतपुर के जाट राजाओं का रिश्ता मथुरा के शहर गोवर्धन से रहा है। दरअसल गोवर्धन भरतपुर के अंतर्गत आता है। वैसे तो महाराजा सूरजमल युद्ध लड़ते हुए दिल्ली में खेत रहे थे। पर उनकी सुंदर छतरी का निर्माण मथुरा के पास गोवर्धन में किया गया है। हालांकि महाराजा सूरजमल की समाधि को लेकर थोड़ा विवाद है।

महाराजा सूरजमल दिल्ली में यमुना के किनारे शाहदरा के पास जंगलों में युद्ध लड़ते हुए दुश्मनों से घिर जाने के बाद बचकर नहीं निकल सके। उनका वहीं पर निधन हो गया। नियति कुछ ऐसी रही कि भरतपुर का राजघराना उनके शव को नहीं प्राप्त कर सका। दो दिनों तक उनके अंतिम संस्कार को लेकर राजघराने में चर्चा चलती रही। ऐसी हालत में उनकी एक महारानी ने महाराजा सूरजमल का एक पुराना दांत निकाला, जो उनके पास निजी संग्रह में निशानी के तौर पर मौजूद था। तो उनके दांत से ही महाराजा सूरजमल का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया गया। बाद में उनकी याद में गोवर्धन में कुसम सरोवर के पास विशाल छतरी का निर्माण कराया गया।

भरतपुर के राजाओं की ये छतरियां बड़ी कलात्मक हैं। तीन मंजिला इमारत में सुंदर झरोखे बने हैं। इन झरोखों में शानदार नक्काशी की गई है। जाट राजाओं ने इन छतरियों के निर्माण के साथ तत्कालीन शिल्पियों को खूब रोजगार उपलब्ध कराया। पर आजकल इस कलात्मकता के कद्रदान कम हैं।

गंगा बाग नाम से मशहूर - भरतपुर के राजाओं की छतरियों का ये परिसर गंगा बाग के नाम से विख्यात है। यह परिसर करीब 4.35 एकड़ में फैला है। यहां सभी भरतपुर के राजाओं का दाह संस्कार किया जाता था। यहां बनी छतरियों में राजा बलदेव सिंह और बलवंत सिंह की छतरियां काफी कलात्मक हैं। इन छतरियों के निर्माण में राजस्थान से लाए गए पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इनके मेहराब में पक्षियों की सुंदर कलाकृतियां हैं। खासतौर पर शुक (तोता) और मयूर का चित्रण बेहतरीन है। इन छतरियों का निर्माण इस विश्वास के साथ कराया गया है कि मरणोपरांत राजा इन महलों में अपने अनुचरों के साथ रह सकें। यहां रानियों की समाधि भी बनाई गई है जिसमें पालकीनुमा मंडप है।

प्रतापी राजा सूरजमल - महाराजा सूरजमल जन्म 13 फरवरी 1707 में हुआ था। उनका निधन 25 दिसंबर 1763 को हुआ। उनका जन्म और मुगलशासक औरगंजेब की मृत्यु का काल खंड एक ही है। महाराजा सूरजमल के पिता का नाम राजा बदन सिंह था। महाराजा सूरजमल भरतपुर के प्रतापी राजा थे उन्होने 1733 में भरतपुर रियासत की स्थापना की थी।


महाराजा सूरजमल और पानीपत की तीसरी लड़ाई- साल 2019 के अंत में पानीपत फिल्म के प्रदर्शन होने के बाद महाराजा सूरजमल की भूमिका को लेकर विवाद उठा। फिल्म की स्क्रिप्ट के मुतबिक पानीपत की तीसरी लड़ाई में 1761 में मराठाओं की सेना का महाराजा सूरजमल ने साथ नहीं दिया। इस लड़ाई में मराठा अहमद शाह अब्दाली से हार गए थे। मराठा सेना को रसद के अभाव में भूखे प्यासे लड़ना पड़ा। पर इसमें आंशिक सच्चाई है।


दिल्ली में महाराजा सूरजमल की समाधि - दिल्ली में जहां महाराज सूरजमल का निधन हुआ वहां पर आजकल महाराजा सूरजमल पार्क का निर्माण कराया गया है। यहां पर बाद में महाराज सूरजमल की एक समाधि का भी निर्माण कराया गया है।

इसके ठीर बगल में पूर्वी दिल्ली की एक आवासीय कॉलनी भी है जिसका नाम सूरजमल विहार रखा गया है। भारत सरकार ने साल 2009 में महाराजा सूरजमल के सम्मान में उनके ऊपर एक पांच रुपये का डाक टिकट भी जारी किया था। 

: विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
(MAHRAJA SURAJMAL KI CHATRI,  GOVARDHAN,  MATHURA) 
   


7 comments:

  1. सर आपकी पोस्ट की विशेष बात होती है उनमें दी गई कमाल की जानकारी । सार्थक लेखन कर रहे हैं आप और बेहद उपयोगी भी । बहुत बेहतरीन ब्लॉग है आपका सर ।

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  2. हम तो कई बार गोवर्धन गये है पर इस छतरी के विषय में जानकारी आप से मिली ।
    शुक्रिया ।

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  3. हमेशा की तरह उत्तम ---- शुभकामनाएँ !

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