Saturday, April 18, 2020

बांसुरी की सुमधुर तान और राजेंद्र प्रसन्ना


मैं 1995 में दिल्ली आया और 1996 में पहली नौकरी शुरू की। उसी दौरान बांसुरी वादक राजेंद्र प्रसन्ना जी से मुलाकात हुई। बनारस घराने के बांसुरी वादक प्रसन्ना जी पूर्वी दिल्ली के पांडव नगर में रहते हैं। बड़े ही सरल और सहज स्वभाव वाले प्रसन्ना जी से दिल्ली प्रवास के दौरान कई बार मिलना होता रहता है। दिल्ली में उन्हें कई बार सुनने का मौका मिला है। वे जब राग अहीर भैरव और भटियाली धुन बजाते हैं तो आपको एक अलग दुनिया में लेकर चले जाते हैं। आकाशवाणी संगीत सम्मेलन में तो कभी मंडी हाउस के आसपास हुए आयोजनों में उन्हें सुना है। कई दशक से राजेंद्र प्रसन्ना राष्ट्रपति भवन में आए खास मेहमानें लिए भी बांसुरी बजाते रहे हैं।

मुझे कई बार मौका मिला जब उनके घर पहुंचा, शाम को रियाज करते हुए वे घंटों हमें बांसुरी सुनाते। एक बार उनके घर बैठा मैं उनकी बांसुरी सुन रहा था। अचानक बजाते-बजाते वे गाने लगे-
हाथी घोड़ा चले राजा..... पालकी सजा के
अरे साधु चले भुइंया भुइंया, चुंटी बचा के
साल 2011 में जब हमलोग भोजपुरी चैनल महुआ के लांचिंग की तैयारी कर रहे थे। तब हमने प्रसन्ना जी संपर्क किया। उन्होंने हमारे लिए अपने घर में बैठकर घंटो बांसुरी की धुनें बजाई, जिसका प्रसारण हमने अपने कार्यक्रमों में सुविधानुसार किया।

बनारस घराने के साधक - राजेंद्र प्रसन्ना बनारस घराने के बांसुरी वादक हैं। उनका जन्म 15 अप्रैल 1956 को वाराणसी में हुआ। उनके पिता रघुनाथ प्रसन्ना शहनाई और बांसुरी बजाते थे। उनके दादा पंडित गौरी शंकर प्रसन्ना भी बांसुरी के साधक थे। घर में बचपन से ही उन्हें शास्त्रीय संगीत का परिवेश मिला। उन्होंने बनारस में ठुमरी सम्राट कहे जाने वाले पंडित महादेव प्रसाद मिश्रा से भी तालीम ली। सत्तर के दशक में उनका परिवार दिल्ली आ गया। उनका पूरा परिवार ही संगीत की विभिन्न विधाओं से जुड़ा हुआ है। प्रसन्ना जी ने कई साल तक शहनाई भी बजाई। बांसुरी में वे त्रिपुरा फ्लूट और कृष्णा फ्लूट दोनों को बजाने में माहिर हैं।
वह 1968 का साल था जब महज 12 साल की उम्र में कोलकाता म्युजिक फेस्टिवल में उन्होने मंच से बांसुरी बजाई। उसके बाद अलग अलग शहरों के मंच पर अपने फन का प्रदर्शन करने का सिलसिला चल पड़ा।  

कई अलबम आए - टी सीरीज से उनके शहनाई और बांसुरी के कई अलबम भी निकले। सन 1991 में आया उनका अलबम इनचेंटिंग हिमालयाज काफी लोकप्रिय हुआ। इसमें उन्होंने राग मारवा और राग यमन धुन बजाया है। उनके दस से ज्यादा लोकप्रिय अलबम बाजार में उपलब्ध हैं।

संकट मोचन संगीत समारोह में  - 2019 के वाराणसी के प्रसिद्ध संकट मोचन संगीत समारोह में पहली निशा में सुबह 3 बजे उन्होंने बांसुरी बजाई। उनका साथ दे रहे थे उनके बेटे ऋषभ प्रसन्ना।

दुनिया के बड़े मंचों से बांसुरी बजाई – अमेरिका, कनाडा, स्विटजरलैंड, ब्रिटेन,  आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान समेत वे दुनिया के तमाम देशों में बांसुरी के साथ दौरा कर चुके हैं। यूके में एडिनबर्ग फेस्टिवल में आस्ट्रेलिया के ओमाड फेस्टिवल में उनकी बांसुरी गूंज चुकी है।

संगीत नाटक अकादमी अवार्ड -  पंडित रविशंकर की बेटी अनुष्का शंकर के साथ उन्होंने संगत की थी,उस अलबम को ग्रैमी अवार्ड भी मिला। 2004 में कंसर्ट फॉर जॉर्ज के लिए उन्हें ग्रेमी अवार्ड प्रमाण पत्र मिला। प्रसन्ना जी साल 2017 में संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित किए जा चुके हैं।

लॉकडाउन में लाइव बांसुरी का आनंद लें
देश के जाने माने बांसुरी वादक राजेंद्र प्रसन्ना जी 25 मार्च से जब से लॉकडाउन हुआ है हर रोज दोपहर 12 बजे से एक बजे तक फेसबुक पर लाइव होते हैं और बांसुरी की तान छेड़ते हैं। कई हजार लोग इस एक घंटे तक उन्हें सुनते हैं।

 - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com  

( RAJENDRA PRASANNA, DELHI, FLUTE, BANARAS GHARANA , BANSURI ) 


5 comments:

  1. राग भैरवी का यूट्यूब लिंक - https://www.youtube.com/watch?v=iwcIdFF8sdM

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  2. अच्छी जानकारी

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  3. राजेन्द्र जी को कई बार मंडी हाउस के कार्यक्रमों में सुना है। लॉकडॉउन के बाद से हर प्रकार के कार्यक्रम बंद है, ऐसे में फेसबुक पर लाइव कार्यक्रम की जानकारी देकर आपने बहुत अच्छा किया। आभारी हूं।

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