Friday, April 17, 2020

बरसाना में कुशल बिहारी जी का मंदिर


बरसाना के राधारानी मंदिर से निकलकर वापस आ गया हूं। पर पार्किंग के पास मुझे राधा कृष्ण का एक और विशाल मंदिर नजर आता है। मैं उसके पास चला जाता हूं। बरसाना में स्थित राधारानी के इस अति सुंदर मंदिर को कुशल बिहारी जी का मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस विशाल मंदिर को राजस्थान वालों के नाम से भी लोग जानते हैं। दूर से ही किसी राजमहल सा नजर आने वाला यह मंदिर देवस्थानम विभाग राजस्थान के अधीन आता है। इस मंदिर में दर्शन के लिए आपको किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
विशाल प्रवेश द्वार - 
कुशल बिहारी जी के मंदिर का प्रवेश द्वार विशाल है। इसके दोनों तरफ झरोखे बने हुए हैं। इन झरोखों में नक्काशी का काम मोहक है। मंदिर के निर्माण में बड़ी मात्रा में पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है। प्रवेश द्वार के दोनों तरफ बने चौबारे पर साधुगण बैठे हुए नजर आ रहे हैं। 

दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग - 
मंदिर के आंतरिक दीवारों पर सुंदर पेंटिंग बनी हुई हैं। इन पेंटिंग में श्रीकृष्ण की लीलाएं देखी जा सकती हैं।

यह मंदिर 1918 जयपुर रियासत के राजा माधो सिंह द्वितीय ने बनवाया था। महाराजा माधो सिंह की राधारानी में गहरी आस्था थी। वे राधारानी का विग्रह लेकर जयपुर में मंदिर बनवाना चाहते थे। पर किसी कारण से विग्रह वहां तक नहीं पहुंच सका। फिर यहीं पर मंदिर का निर्माण कराया गया। 

राजा माधो सिंह की रानी कुशलबाई के नाम पर इसका नाम कुशल बिहारी मंदिर रखा गया। मंदिर के निर्माण में बंशी पहाड़पुर से लाए गए पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। तब इसके निर्माण में तकरीबन 60 लाख रुपये की लागात आई थी। मंदिर की संरचना दो मंजिला है। इसमें छह दर्जन कमरे बनवाए गए हैं। ब्रह्मांचल पर्वत पर स्थित यह मंदिर दूर से किसी किले की तरह नजर आता है।

मंदिर निर्माण के बाद बड़े समारोह में यहां प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। माधो सिंह द्वितीय का शासन काल 1880 से 1922 के बीच का था। कुशल बिहारी मंदि का निर्माण 1911 में पूरा हो गया था। पर इसमें प्राण प्रतिष्ठा 1918 में कराई गई। मंदिर की सेवा और पूजा निबांर्क परंपरा के अनुसार होती है।



जयपुर रिसायत ने मंदिर की पूजा के लिए महान कृष्ण भक्त राधेश्याम ब्रह्मचारी को पहला पुजारी नियुक्त किया था। इस मंदिर की व्यवस्था जयपुर रियासत ही देखा करता था। देश आजाद होने के बाद इस मंदिर की व्यवस्था देवस्थानम बोर्ड को सौंप दी गई।

खुलने का समय- मंदिर ग्रीष्मकाल में सुबह 4.30 बजे तोशरद काल में सुबह 5.30 बजे खुल जाता है। गर्मियों में मंदिर नौ बजे रात को और सर्दियों में रात आठ बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है।

आवास का भी इंतजाम - कुशल बिहारी जी के मंदिर में यात्रियों के ठहरने के लिए आवास की सुविधा उपलब्ध है। विश्रांति गृह में धार्मिक यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु ठहर सकते हैं। मंदिर परिसर के दोनों तरफ कमरे बने हुए हैं।  कुशल बिहारी मंदिर के बाहर एक कैंटीन भी है। यहां चाय, नास्ता, भोजन और मिठाइयां मिल जाती हैं।

पूरे देश में राधारानी के भक्तों की एक अलग परंपरा है। ये लोग आपस में बड़े प्रेम से मिलते हैं। और राधारानी का जयकारा लगाते हैं। वे बरसाना को अपनी आध्यात्मिक राजधानी के तौर पर देखते हैं। इसलिए सिर्फ होली या राधाअष्टमी ही नहीं, सालों भर कृष्ण भक्तों का बरसाना आने का सिलसिला चलता रहता है। तो बोले – राधे राधे राधे बरसाने वाली राधे।
और अनूप जलोटा की आवाज में सुनें ...
ओ मीठे रस सूं भरयोडीराधा रानी लागे, महारानी लागे
म्हाने कारो-कारो जमुनाजी रो पानी लागे।
यमुना जी तो कारी कारी राधा गोरी गोरी।
वृन्दावन में धूम मचावे बरसाने री छोरी।
ब्रजधाम राधाजू की रजधानी लागे।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( KUSHAL BIHARI TEMPLE, RADHA RANI, BARSANA, MATHURA )

3 comments:

  1. लेख बहुत सुंदर है बीच बीच में चित्र लगा कर लेख बहुत सुन्दर बन गया है । बाकी साम्रगी कोई जबाब नहीं ...।
    - बीजेन्द्र जैमिनी
    bijendergemini.blogspot.com

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    1. धन्यवाद जेमिनी जी लगातार पढ़ते रहें. हर दूसरे दिन एक नई पोस्ट आती है.

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  2. ब्लागर सुशांत सिंघल जी ने यात्रा पर लिखने वालों की सूची बनाई है - http://indiatraveltales.in/travel-bloggers-sortable-list/

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