Wednesday, April 15, 2020

बरसाना में लाडली जी यानी राधा रानी का मंदिर


कृति मंदिर के बाद में बरसाना के पुराने राधारानी मंदिर की तरफ चल पड़ा हूं। स्थानीय लोगों से रास्ता पूछता हूं। वे पूछते हैं कैसे जाना है पैदल या बाइक से। मैंने कहा बाइक से। दरअसल राधारानी का मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। वहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का रास्ता है। दूसरा रास्ता सड़क मार्ग का भी है। यह थोड़ा लंबा है। जो लोग सार्वजनिक वाहन से बरसाना पहुंचते हैं वे पैदल चलकर सीढ़ियों के मार्ग से पहुंचते हैं।

मैं बाइक से जाना चाहता हूं। इसके लिए बरसाना चौराहे से बायीं तरफ का रास्ता पकड़कर थोड़ी बाजार में चलने के बाद दाहिनी तरफ मुड़ कर भीड़ भाड़ वाले बाजार में प्रवेश कर गया हूं। किसी कस्बाई बाजार से गुजरते हुए एक अलग किस्म की खुशबू आती है। गुड़, तेल और हिंग की खुशबू। इसके बीच से गुजरते हुए मुझे बरसाना का डाक घर दिखाई देता है। यहां से आगे बढ़ने पर रास्ता पहाड़ी पर चढ़ने लगता है। लगभग एक किलोमीटर की चढ़ाई के बाद एक पार्किग मिला। यहां पर मैं अपनी बाइक पार्क करके आगे पैदल चल पड़ा हूं। 

पार्किंग से दाहिनी तरफ लगभग आधा किलोमीटर पैदल चलने के बाद राधारानी का मंदिर है। ये रास्ता सुंदर बना हुआ है। पर इस रास्ते में जगह जगह साधु, भीख मांगने वाले और बंदर नचाने वाले दिखाई दे रहे हैं। मेरे आसपास दक्षिण भारत के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में राधारानी का मंदिर देखने पहुंचे हैं। मंदिर से ठीक पहले जूते चप्पलों का स्टैंड है। यहां पर निःशुल्क सुविधा है। यह राहत की बात है।


ऊंचे पर्वत पर विराजती हैं लाडली जी
मथुरा जिले का बरसाना गांव राधारानी के पिता वृषभानु जी का निवास स्थान हुआ करता था। वे वैश्य बिरादरी के थे और भगवान कृष्ण के पालक नंद महाराज के मित्र थे। वे जिस पर्वत पर निवास करते थे उसका नाम ब्रह्मगिरी पर्वत था। इसे लोग बाद में भानुगढ़ कहते थे। इसी स्थल का नाम बाद में बरसाना हो गया। राधारानी को उनके पिता के नाम से वृषभानुजा भी कहते हैं।


बरसाना में ऊंचे पर्वत पर स्थित राधारानी का मंदिर पूरब रुख का है। करीब 250 मीटर ऊंची पहाड़ी पर बने इसे लाडली जी का मंदिर भी कहते हैं। इस मंदिर का निर्माण 1675 ई में हुआ था। इसका निर्माण राजा वीर सिंह ने करवाया था। बाद में स्थानीय लोगों ने भी इसमें योगदान दिया। मंदिर के अंदर मूर्तियों में राधाकृष्ण का दरबार सजा हुआ है। मुख्य मूर्ति राधारानी की है।

देश भर के लोगों की राधारानी में आस्था है। कहा जाता है कि राधा जी भक्तों की बहुत जल्द सुन लेती हैं। इसलिए देश के हर कोने से लोग इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। दक्षिण भारतीय श्रद्धालु भी यहां अच्छी संख्या में दिखाई दे जाते हैं। बड़ी संख्या भक्त राधारानी के जयकारे लगाते हुए मंदिर की सीढ़ियों पर चढ़ाई करते हुए नजर आते हैं।


राधा कृष्ण का संबंध - आखिर राधा कौन थीं। राधा कृष्ण के ब्याहता पत्नी नहीं थीं। पर दोनों में आध्यात्मिक प्रेम था। कृष्ण मानते थे कि राधा उनके हृदय में बसती हैं। राधा कृष्ण से उम्र में भी बड़ी थीं। कहीं उनकी उम्र 11 माह अधिक तो कहीं पांच साल अधिक बताई जाती है। ऐसा भी कहा जाता है कि राधा का विवाह माता यशोदा के भाई रायण से हुआ था। इस नाते से वे कृष्ण की मामी हुईं। पर तमाम मंदिरों में राधा और कृष्ण की मूर्तियां साथ-साथ मिलती हैं। महाभारत या श्रीमदभागवत पुराण में राधा का जिक्र नहीं मिलता है। राधा का जिक्र ब्रह्मवैत पुराण और पद्मपुराण में मिलता है। 

मोरों को लगाते हैं भोग - राधा रानी को रोज लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। इन लड्डूओं को बाद में मोरों को समर्पित कर दिया जाता है। क्योंकि मोरों को राधाकृष्ण का स्वरूप माना जाता है। राधा रानी के मंदिर में आने वाले भक्त राधारानी का जयकारा लगाते उनके भजन गाते हुए सीढ़ियां चढ़ते हैं...
एक बार जो बोले राधा, कट जाएं जीवन की बाधा। कृपा करो महारानी, राधा रानी हमारी॥


राधा अष्टमी पर मेला -  हर साल राधा अष्टमी पर राधा रानी के मंदिर में खास आयोजन होता है। इस दिन लाडली जी का जन्म दिन होता है। इस दिन बरसाना में मेला लग जाता है। लोग नाच गाकर बधाइयां गाते हैं। वैसे तो यहां सालों भर ही मेले जैसा माहौल रहता है।

पर बरसाना के राधारानी मंदिर में आकर कुछ निराशा भी होती है। दरअसल इस मंदिर के स्वामित्व को लेकर लड़ाई चल रही है। मामला अदालत में है। मंदिर में रिसीवर बहाल है। यहां राधारानी के प्रेम में चलकर आने वाले भोले भाले भक्त कई बार ठगे भी जाते हैं। जय श्री राधे।
राधा रानी की बातें अभी जारी रहेंगी, पढ़ते रहिए दानापानी...
-        विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com ( RADHA RANI TEMPLE, BARSANA, LADLI JI TEMPLE )

2 comments:

  1. भव्य मंदिर। चित्रमय विस्तृत जानकारी।

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    1. धन्यवाद, आगे भी लगातार पढ़ते रहिए

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