Saturday, April 4, 2020

मिलिए इन महान घुमक्कड़ से – 4000 किलोमीटर के पदयात्री



दुनिया के तमाम देश कोरोना जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं। ऐसे वक्त में घर में रहें। यात्राएं हरगिज न करें। यात्रा साहित्य पढें। नई किताबें पढ़ें। दानापानी ब्लॉग पर लगातार अपलोड हो रही यात्राएं पहले की गई हैं।

जीटी रोड पर बाइक से चलते हुए कोसी कलां के आसपास मैं अपने आगे एक सज्जन को सड़क पर पैदल जाते हुए देख रहा हूं। उनके हाथ में एक स्ट्राली बैग है, जिसे वे खींचते हुए चल रहे हैं। उन्होने कबीर पंथियों की तरह सफेद रंग के कपड़े पहन रखे हैं। उनके गले में भी कोई पट्टिका लटकी हुई है। मेरी बाइक उनसे आगे निकल गई है। पर अचनाक मैं अपनी बाइक रोक देता हूं। उस पदयात्री के अपने करीब आने का इंतजार करता हूं। फिर मैं उन्हे रोककर बातचीत का सिलसिला शुरू करता हूं।

वे बताते हैं कि वैष्णो देवी के दर्शन करके पैदल लौट रहा हूं। उनकी ये आने और जाने की यात्रा कोई चार हजार किलोमीटर से अधिक की है। वे हर रोज अपनी क्षमता के मुताबिक 20 से 40 किलोमीटर तक पैदल चलते हैं। उन्होंने अपने स्ट्राली बैग पर और अपने गले में लटकी पट्टिका पर अपनी यात्रा के बारे में जानकारी लिखवा रखी है। वे बता रहे हैं कि अपनी पदयात्रा के साथ वे लोगों के बीच सर्व धर्म समभाव, मानव धर्म का पालन और राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हुए चलते हैं।

रात्रि विश्राम कहां करते हैं। मेरे पूछने पर वे कहते हैं – कभी किसी मंदिर तो किसी गुरुद्वारे में ठिकाना बना लेता हूं। कहीं पर किसी धर्मशाला में ठहर जाता हूं। रास्ते में सादा शाकाहारी भोजन लेते हुए वे लगातार चलते रहते हैं।  
उनकी पदयात्रा 6 फरवरी 2019 को शुरू हुई। मध्य प्रदेश के सीवनी जिले से। उनका जाने का मार्ग है उज्जैन से होते हुए जम्मू कश्मीर में माता वैष्णो देवी तक। वापसी का मार्ग है- दिल्ली से मैहर होते हुए सीवनी तक। सीवनी में वे शिवदया धाम भाटेखारी में जाकर अपनी यात्रा का समापन करेंगे।
तो ये महान पथिक मध्य प्रदेश के सीवनी जिले के रहने वाले हैं। यह जिला मंडला के आसपास पड़ता है।

उन्होंने अपने घर से चलने के बाद उज्जैन पहुंच कर महाकाल के दर्शन किए। फिर राजस्थान के रास्ते पंजाब में प्रवेश कर वे जम्मू पहुंचे। यानी जाने के मार्ग में दिल्ली नहीं था। बताते हैं पूरे रास्ते उन्हें कहीं कोई परेशानी नहीं हुई।
तो देखिए उन्होने अपने गले  लटके बोर्ड पर लिखवा रखा है- मानव धर्म की जय हो, प्राणियों में सदबुद्धि का विकास हो। विश्व में सुख शांति और समृद्धि का सम्राज्य हो। सब धर्मों के मानने वालों की जय हो। सत्य की जीत हो। पाप का नाश हो। इंसानियत ही मानव का सबसे बड़ा मजहब है। हम अनेक रास्ते अनेक. पर मंजिल सबकी एक।

तो ऐसा संदेश है इस महान घुमक्कड़ का। इस पदयात्री के स्ट्राली बैग में जरूरत की सारी चीजें हैं। हां उनके हाथ में एक टार्च भी है। यह रात में या अंधेरा होने पर चलने में उनकी मदद करती है। उनकी कुल पदयात्रा का काल करीब एक साल का है। 

जब मेरी मुलाकात हुई तो अपनी यात्रा का 60 फीसदी से अधिक हिस्सा वे पूरा कर चुके हैं। लोगों को बाइक से कार से और साइकिल से यात्राएं करते देखा है। पर पैदल इतनी लंबी यात्रा पर अकेले चल निकलना, सचमुच बड़े साहस का काम है। इस महान घुमक्कड़ को मेरा प्रणाम।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( GHUMMAKAR ON FOOT, SIVANI, MP, KOSI KALAN )





5 comments:

  1. अत्याधुनिक साधनों ने यात्रा को सुगम बना दिया हैं.. लेकिन पैदल या परंपरागत प्राचीन माध्यमों से भृमण करना एक रोमांचकारी अनुभव हैं..यात्री के साथ साथ हम एक नये परिवेश मे विचरण करने लगते हैं.राहुल सांकृत्यायन जी का यायावर लेखन अपूर्व आंनद की अनुभूति हैं..




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  2. नमन है इन महान घुम्मकड को। सचमुच पैदल इतनी बड़ी यात्रा करना अपने आप में एक बड़ा कार्य है। उम्मीद है अब तक उनकी यात्रा पूरी हो चुकी होगी और वह अपने घर सुरक्षित पहुँच गये होंगे।

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    1. हां मुझे भी ऐसा ही लगता है

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  3. श्री श्री 1008 महान संत बाल ब्रह्मचारी, श्री शांति दया आश्रम। ग्राम भट्टे खारी-मेहरा पिपरिया। जिला सिवनी। मध्य प्रदेश (मोगली लैंड)/जिला छिंदवाड़ा और जिला मंडला के बीच.
    सर्वधर्म समभाव, सर्व धर्म एकता, विश्व शांति। जैसे महान उद्देश्यों की पूर्ति के लिए। संत की अनोखी पदयात्रा। यह उनकी चौथी यात्रा है।
    और लगभग समाप्ति की ओर। वह अपने गंतव्य से मात्र 80 किलोमीटर की दूरी पर है।
    गुरुवर की इस महान तपस्या के लिए उन्हें बारंबार नमन है। जो संसार की मोह माया से दूर अकेले। वन में विचरण करने वाले हैं।
    ऐसे महान संतो के दर्शन दुर्लभ ही होते हैं।
    आपने उनके बारे में लिखकर। विदित कराया कि, ऐसे महान संत आज भी होते हैं ।

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