Sunday, March 8, 2020

दिल्ली से शुकताल - गंगा की तलाश में


शुकताल दिल्ली के करीब एक सुंदर तीर्थ स्थल है। दिल्ली से एक दिन में जाकर शुकताल में गंगा स्नान और यहां के आस्थामय वातावरण का आनंद लेकर लौटा जा सकता है। तो गंगा नदी की तलाश में एक दिन मैं चल पड़ा शुकताल की ओर..

रास्ता कैसे होगा। तो चलिए दिल्ली से मेरठ। फिर मेरठ से मुजफ्फरनगर। वहां से चलकर शुक्रताल। एक दिन दिल्ली से किसी काम से मेरठ जाना हुआ। काम जल्दी हो जाने के बाद मैंने शुकताल जाना तय किया। तो मेरठ के भैंसाली डिपो से मुजफ्फरनगर की बस में बैठ गया। पर इस बस ने मुजफ्फरनगर के मुख्य बस स्टैंड से पहले ही उतार दिया। वहां से बैटरी रिक्शा से बस स्टैंड पहुंचा। तो पता चला कि शुकताल जाने वाली बसें यहां से नहीं मिलतीं। इसके लिए मुझे दूसरे बस स्टैंड जाना पड़ेगा।
तो मैं महावीर चौक से एक बैटरी रिक्शा पर सवार हुआ। उसने मुझे शुकताल वाले बस स्टैंड पर यानी भोपा अड्डा पहुंचा दिया।  दरअसल भोपा मुजफ्फरनगर से 18 किलोमीटर दूर एक कस्बा है। इसके नाम पर यहां भोपा अड्डा बना हुआ है। यह निजी बसों का एक छोटा सा पड़ाव है। संयोग से शुकताल वाली बस चलने ही वाली थी। ये स्थानीय निजी बस है। इसमें सवारियां खूब भरी हैं। मुझे पीछे एक सीट मिल गई। हालांकि बस स्थानीय सवारियां ज्यादा थीं। बस रास्ते में धीरे-धीरे खाली होती गई। 
रास्ते में विश्वकर्मा चौक, मखियाली और जट मुझेडा गांव आए। रास्ते में गन्ने के खेत खूब दिखाई दे रहे हैं। इन गन्ने के खेतों के साथ साथ कई जगह गन्ने का रस निकालने वाली मशीने लगी हैं। गुड़ निकालने वाला कलुहाड़ लगा हुआ है। हालांकि अभी गन्ना तैयार होने में थोड़ा वक्त है इसलिए ये मशीने चल नहीं रही हैं।

इस मार्ग पर कई पेपर मिल भी दिखाई देती हैं। इनमें बिंदल पेपर मिल काफी बड़ा है। मतलब मुजफ्फरनगर का ये इलाका बड़ा कागज उत्पादन का क्षेत्र भी है। थोड़ी देर के सफर के बाद भोपा शहर आया। भोपा  गंग नगर दिखाई देती है। इस पर बने पुल को बस पार करती है। हमलोग मोरना पहुंच गए हैं। मोरना में बस लगभग खाली हो गई है। यहां पर बस थोड़ी देर के लिए रुक गई है। अब आगे शुक्रताल जाने वाली सवारियां सिर्फ दो चार ही बची हैं। मैं ड्राईवर साहब की अनुमति के लेकर नीचे कुछ खाने पीने के लिए उतर जाता हूं।

मोरना तक मुजफ्फनगर से कई बसें आती हैं। पर सारी बसें शुकताल तक नहीं जातीं। मोरना से एक रास्ता बिजनौर जिले की तरफ चला जाता है। थोडी देर बाद हमारी बस फिर से चल पड़ी है। मोरना से शुकताल का रास्ता बड़ा मनोरम है। रास्ते में कुछ आश्रम और धर्मशालाएं नजर आने लगती हैं। शुकताल में पहुंचने के बाद बस के चालक ने पूछा आपको कहां उतरना है। मैंने जवाब दिया – नदी तट के करीब। हमारी पहली प्राथमिकता तो गंगा दर्शन करने की है। 
उसके बाद शुकताल के शेष दर्शनीय स्थलों का रुख करूंगा। तो बस ने आखिरी स्टैंड पर उतार दिया। 

बस स्टैंड से रास्ता पूछता हुआ मैं नदी तट की ओर चल पड़ा। यहां पर थोड़ी रौनक दिखाई दे रही है। घाट पर दुकानें सजी हैं। यहां पर एक सैना का एक पुराना टैंक भी लाकर स्थापित किया गया है। गंगा स्नान के दिनों में शुकताल में मेला लगता है। श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है पर आज माहौल शांत सा है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
-        ( SHUKTAL, SOLANI RIVER, GANGA, MUZAFFARNAGAR, BHOPA, MORNA )



2 comments:

  1. सर आप शुक्रताल आये और मुझे भूल गए, कम से कम कुछ सेवा का मौका तो देते.....

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