Tuesday, March 3, 2020

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर – और बांस फाटक का फूल बाजार


गंगा दर्शन के बाद कई सालों बाद एक बार फिर काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने पहुंचा हूं। मैंने दशाश्वमेध रोड वाले पुराने परंपरागत मार्ग से ही प्रवेश किया है। इसे विश्वनाथ गली कहते हैं। इस गली में अत्यंत सुंदर बाजार है। इन बाजार से होकर पैदल तकरबीन आधा किलोमीटर गुजरने के बाद मंदिर का मुख्य द्वार आता है। इन दिनों मंदिर परिसर के आसपास काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण कार्य जारी है। इसके तहत मंदिर तक पहुंच मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है।

विश्वनाथ गली में चलते हुए एक जगह दो रास्ते आकर मिल जाते हैं। दशाश्वमेध रोड से आने वाली गली और बांस फाटक की तरफ से कोतवालपुरा होकर आने वाली गली एक जगह मिल जाती है। मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की दोनों तरफ से लाइन लगती है। 

विश्वनाथ मंदिर में बैग, कैमरा मोबाइल और लेदर के बने सामान यानी पर्स बेल्ट आदि लेकर जाना निषेधित है। इन सब सामनों को जमा करने के लिए अलग अलग दुकानों में लॉकर बने हैं। वे लोग अक्सर आपसे प्रसाद खरीदने की शर्त लगाते हैं। मैं भी सौ रुपये का प्रसाद लेकर सारा समान जमा करके दर्शन के लिए पंक्ति में लग गया। लाइन लंबी है। पर करीब एक घंटे बाद मैं गर्भ गृह तक पहुंच गया हूं। बाबा भोले के दर्शन के समय में वहां पर नियुक्त पंडित जी बार बार मुझे इशारा कर रहे हैं कि मैं कुछ नकदी चढाऊं। पर इसकी क्या जरूरत है। दान हमेशा दान पात्र में ही डालना चाहिए।

काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में माता अन्नपूर्णा का मंदिर है। यहां पर सालों भर लंगर चलता है। आज इस लंगर में उपमा मिल रहा है। लंगर से निकलकर मैं अपना सामान लेकर बांस पाठक की तरफ बाहर निकल आया हूं।

बांस पाठक रोड पर  काशी विश्वनाथ मंदिर का स्वागत विशाल कक्ष बनकर तैयार हो गया है। इस स्वागत कक्ष में भी सामान जमा करने की सुविधा उपलब्ध है। साथ यहां पर अलग अलग तरह के पूजा के लिए बुकिंग भी होती है। यहां से आप कई तरह के प्रतीक चिन्ह की खरीददारी भी कर सकते हैं। यह स्वागत कक्ष हाल के सालों में बनकर तैयार हुआ है। यहीं से सड़क के पूर्वी तरफ से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है। आसपास के कई भवनों को जमींदोज कर मंदिर कर पहुंचने लिए चौड़े रास्ते का निर्माण किया जा रहा है। इस मार्ग से मंदिर का दर्शन सुगम हो गया है। आने वाले सालों में यह कॉरिडोर तैयार हो जाएगा तो मंदिर तक जाना ज्यादा सहज हो सकेगा।

आपको पता बांस पाठक में सचमुच एक विशाल भवन का पूरा दरवाजा बांस का बना हुआ है। इसी बांस फाटक में पश्चिम की तरफ गली में विशाल फूलों का बाजार लगता है। 

इस फूल बाजार में मैं पहले भी कई बार आ चुका हूं। रात के नौ से ज्यादा बजे हैं। पर इस फूल बाजार में प्रवेश करता हूं तो अभी भी फूलों की दुकानें सजी हुई हैं। लोग खरीददारी कर रहे हैं। वाराणसी के आसपास के गांव में बड़े पैमाने पर फूलों की खेती होती है। ये फूल यहां मंडी में बिकने के लिए पहुंचते हैं। तो यहां आकर लगता है – फिर छिड़ी बात फूलों की...रात है या बारात फूलों की...  

-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
( VARANASI, VISHWANATH GALI, BANS PHATAK, FLOWER MARKET,  COLORS OF BANARAS) 


No comments:

Post a Comment