Saturday, March 28, 2020

टनकपुर से नानकमत्ता डैम वाया खटीमा




दुनिया के तमाम देश कोरोना जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं। ऐसे वक्त में घर में रहें। यात्राएं हरगिज न करें। यात्रा साहित्य पढें। नई किताबें पढ़ें। दानापानी ब्लॉग पर लगातार अपलोड हो रही यात्राएं पहले की गई हैं।

नेपाल के सिद्धेश्वर महादेव से लौटने के बाद अब टनकपुर से वापस लौटने की तैयारी है। धर्मशाला से चेकआउट करने के बाद टनकपुर के बस स्टैंड पहुंच गया हूं। यहां से खटीमा जाने वाली बस तुरंत ही मिल गई। अच्छी सड़क होने के कारण टनकपुर से खटीमा का रास्ता आधे घंटे का है। 

नेपाल का प्रवेश द्वार है बनबसा - तो टनकपुर से चलने के बाद पहले बनबसा आया। ये बनबसा शहर हमारे पड़ोसी देश नेपाल की सीमा पर है। यहां से बसें और वाहन नेपाल में प्रवेश करते हैं। दिल्ली से महेंद्र नगर जाने वाली बसें बनबसा होकर ही नेपाल में प्रवेश करती हैं। ये बसें दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे से चलती हैं। बनबसा कोई टूरिस्ट प्लेस नहीं है। पर नेपाल जाने वालों के लिए ये ट्रांजिट प्वाइंट की तरह है। इसलिए यहां पर कई सस्ते टूरिस्ट लॉज उपलब्ध हैं। यहां खाने पीने के ढाबों पर भी नेपाल की छाप नजर आती है। गोरखाली होटल और तिवारी ढाबा जैसा नाम नजर आता है।

बनबसा पन बिजली उत्पादन का भी बड़ा केंद्र है। शारदा नदी से यहां पर बिजली का उत्पादन किया जाता है। बनबसा में पावर स्टेशन भी बना हुआ है। एनएचपीसी के पावर स्टेशन का नाम टनकपुर पावर स्टेशन है। इसकी तीन इकाइयों से बिजली का 90 मेगावाट से बिजली का उत्पादन होता है।  



मुझे बस की खिड़की से दोनों तरफ हरे भरे वन दिखाई दे रहे हैं। इन वनों के बीच कहीं-कहीं लोगों को घर बड़े सुंदर दिखाई दे रहे हैं। रास्ते में सेना और एसएसबी का कैंप भी दिखाई देता है। इन्ही हरे भरे इलाके में कहीं आशियाना हो तो कितना अच्छा होता। तो टनकपुर, बनबसा के हरे भरे इलाके को अलविदा। फिर मिलेंगे। हम चंपावत जिले से दूर हो रह हैं। उधम सिंह नगर जिले की सीमा शुरू हो गई है।  


सड़क पर बस सरपट दौड़ती जा रही है। कब खटीमा आ गया पता ही नहीं चला। खटीमा उत्तराखंड के शहीद उधम सिंह नगर जिले में आता है। खटीमा उतरने पर पता चला कि नानकमत्ता जाने वाली बस चौराहे पर जाकर मोड़ पर दाहिनी तरफ वाली सड़क पर मिलेगी। खटीमा का मुख्य बाजार काफी अच्छा है। बड़ी बड़ी दुकानें दिल्ली से मुकबला करती प्रतीत होती हैं। इसी बीच एक मिठाई की दुकान में जलेबियां बनती दिखाई दे गईं। हल्की बारिश के बीच जलेबियों का स्वाद लेने के लिए मैं दुकान पर रुक गया। दस रुपये में 100 ग्राम जलेबी। 

जलेबी खाकर आगे चल पड़ा। सितारगंज मोड़ पर नानकमत्ता जाने वाला एक आटो रिक्शा खड़ा था। तो मैं आटोरिक्शा में ही बैठ गया। अब आटो में बैठना फायदे का सौदा रहा। अगर बस से जाता तो बस हमें नानकमत्ता के चौराहे पर या बाइपास चौराहे पर उतार देती। पर आटो रिक्शा वाला नानकमत्ता बाजार आने से पहले दाहिनी तरफ की सड़क पर मुड़ गए वे नानकमत्ता डैम के किनारे होते हुए चल पड़े। तो धीमी गति से चल रहे आटो में हमें नानकमत्ता जलाशय के भी दर्शन हो गए।

नानकमत्ता में नानक सागर बांध – कुछ सैलानी जलाशय देखने पहुंचे हुए हैं। डैम के किनारे व्यू प्वाइंट पर कुछ खाने पीने की भी दुकाने हैं। नानक सागर बांध के जलाशय से निकाली गई नहर से उत्तर प्रदेश के तीन जिलों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। इस जलाशय के पानी से यूपी के पीलीभीत, बरेली और उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के खेतों को पानी मिलता है। खटीमा शहर से 14 किलोमीटर दूर देवहा (सरयू) नदी की धारा को रोककर उस पर नानक सागर बांध का निर्माण किया गया है। इस बांध का निर्माण 1962 में किया गया था।

देवहा है गंगा की सहायक नदी - देवहा नदी हिमालय से निकलने वाली छोटी नदियों में से है। इसे देवा, नंधौर या गर्रा नाम से भी जाना जाता है। यह पीलीभीत जिले से गुजरती हुई आगे जाकर गंगा में मिल जाती है। हालांकि पीलीभीत में जाकर नदी बड़े पैमाने पर प्रदूषण का शिकार हो जाती है। नदी पीलीभीत शहर से होकर गुजरती है। बरेली से पीलीभीत आने पर इस नदी पर पुल मिलता है।

नानक सागर बांध की ऊंचाई 16.5 मीटर है। पहाड़ों में अच्छी बारिश होने पर नानक सागर डैम में पानी लबालब भर जाता है। पर कम बारिश होने पर कई साल इस जलाशय में पानी की कमी हो जाती है। साल 2014 और 2017 में यहां पानी काफी कम था। पर इस साल 2019 में जलाशय में खूब पानी है। कभी नानक सागर बांध उत्तर प्रदेश का हुआ करता था। उत्तराखंड बनने के बाद ये इलाका नए राज्य में आ गया। पर कुछ बांधों का परिसंपत्ति का विवाद अभी दोनों राज्यों के बीच हल नहीं किया जा सका है, उनमें नानक सागर जलाशय का भी मामला है।

नानक सागर डैम से आगे निकलने के बाद तकरीबन दो किलोमीटर चलने के बाद आटोरिक्शा ने हमें नानकमत्ता बाजार के चौराहे पर उतार दिया है। यहां कुछ निजी बस आपरेटरों के दफ्तर हैं। वहां से पता चला कि नानकमत्ता से रोज रात को दिल्ली के लिए सीधी बस सेवा है। किराया 400 रुपये है। यहां से पंजाब के प्रमुख शहरों के लिए भी सीधी निजी बसों का संचालन होता है। क्योंकि पंजाब से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नानकमत्ता पहुंचते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
( TANAKPUR, BANBASA, KHATIMA, NANAKMATTA, NANAK SAGAR DAM ) 

No comments:

Post a Comment