Thursday, March 26, 2020

सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, ब्रह्मदेव नेपाल



दुनिया के तमाम देश कोरोना जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं। ऐसे वक्त में घर में रहें। यात्राएं हरगिज न करें। यात्रा साहित्य पढें। नई किताबें पढ़ें। दानापानी ब्लॉग पर लगातार अपलोड हो रही यात्राएं पहले की गई हैं।

टनकपुर से सुबह साढ़े पांच बजे स्नान करके मैं नेपाल के ब्रह्मदेव के लिए निकल पड़ा हूं। शिवाला चौक से आगे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा वाली सड़क पर आगे बढ़ता हुआ मैं शारदा नदी के तट पर पहुंच गया हूं। एक बैटरी रिक्शा वाले से बात हुई। उसने 20 रुपये में शारदा बैराज तक पहुंचाने की बात कही, और मैं उसके के रिक्शा में बैठ गया। बाजार से बैराज की दूरी कोई दो किलोमीटर है। यह रास्ते नदी के तट से होकर जाता है। रास्ते में काफी लोग सुबह की सैर करते हुए दिखाई दिए। मैं भी सैर करता हुआ आ सकता है।

किराये पर बाइक - बैराज के पास कुछ चाय नास्ते की दुकाने हैं। सुबह सुबह ये दुकाने खुल चुकी हैं। वहां पर कई बैटरी रिक्शा वाले भी पहुंच चुके हैं। यहां पर कुछ बाइक वाले हैं जो ब्रह्मदेव तक जाने के लिए आपको बाइक किराये पर देते हैं। किराया है 125 रुपये। पर मैंने आगे का सफर पैदल करने का तय किया।  

शारदा नदी पर एनएचपीसी द्वारा बनवाए गए बैराज को मैं पैदल ही पार करने लगा। बैराज से पानी तेज गति से नीचे गिर रहा। शारदा की जलधारा की तेज आवाज वातावरण में लगातार समाहित हो रही है। इस ध्वनि के बीच मैं पैदल पैदल भारत से नेपाल की ओर बढ़ रहा हूं। नदी का पुल पार करने के बाद सीमा पर चौकी है जहां एसएसबी के जवान तैनात हैं। उन्होने मुझसे पूछा कहां जा रहे हो। मैंने बताया बाबा के दर्शन करने। 


यहां से तकरीबन डेढ़ किलोमीटर नदी के तट पर बने सड़क पर चलने के बाद दाहिनी तरफ नीचे उतरने का रास्ता है। सड़क के दोनों तरफ कुछ खाने पीने की दुकाने हैं। हम ब्रह्मदेव पहुंच गए हैं।

सिद्धेश्वर महादेव के दर्शन बिना अधूरी है पूर्णागिरी की पूजा

सिद्धेश्वर महादेव का मंदिर नेपाल के कंचनपुर जिले में ब्रह्मदेव नामक ग्राम में स्थित है। पर यह गांव शारदा नदी के किनारे भारत की सीमा पर है। माता पूर्णागिरी के दर्शन करने के बाद अक्सर श्रद्धालु नेपाल के ब्रह्मदेव में सिद्धेश्वर महादेव के दर्शन करने जरूर जाते हैं। लोग मानते हैं कि बिना सिद्धेश्वर महादेव के दर्शन किए माता पूर्णागिरी की यात्रा अधूरी है। टनकपुर शहर से नेपाल के ब्रह्मदेव की दूरी सिर्फ 4 किलोमीटर है।


मंदिर का विशाल परिसर अत्यंत हरा भरा है। इस हरित परिसर के बीचों बीच सिद्धेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में शिवलिंगम के साथ सिद्धेश्वर महादेव की आवक्ष मूर्ति स्थापित की गई है। मंदिर के चारों तरफ लोग पीले रंग का वस्त्र के टुकड़ा बांधते हैं। सिद्धेश्वर महादेव का यह मंदिर कई सौ साल पुराना बताया जाता है।



मंदिर परिसर में एक विशाल यज्ञ शाला भी बनी हुई है। मंदिर के पीछे अखंड धूना भी जलता रहता है। इस मंदिर में हर रोज न सिर्फ नेपाल से बल्कि बड़ी संख्या में भारत के राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क शौचालय का भी निर्माण कराया गया है। मंदिर का स्वच्छ वातावरण यहां आने वाले लोगों का मनमोह लेता है। परिसर में पक्षी कलरव करते नजर आते हैं। यहां के पुजारी श्रद्धालुओं को किसी तरह के पूजा पाठ संस्कार के लिए दबाव नहीं बनाते हैं।

ब्रह्मदेव में मंदिर परिसर के आसपास छोटे से बाजार में 30 से ज्यादा खाने पीने के होटल हैं। ये सभी होटल शाकाहारी हैं। यहां पर पराठे, रोटी सब्जी और चावल दाल की थाली मिल जाती है। यहां पर कपड़े, रेडीमेड वस्त्र, कंबल, कास्मेटिक्स आदि की कुछ दुकाने भी हैं।

ब्रह्मदेव से नेपाल के प्रमुख शहर महेंद्र नगर की दूरी 15 किलोमीटर है। यहां महेंद्र नगर जाने के लिए आटो रिक्शा मिल जाता है। वे साठ रुपये किराया मांगते हैं।

मैं सिद्धेश्वर महादेव के दर्शन के बाद कुछ दुकानों में गया। वहां कपड़ों और कास्मेटिक्स के बारे में जानकारी ली। उसके बाद एक भोजनालय में सुबह के नास्ते के लिए बैठ गया। दो आलू पराठा, सब्जी और दाल के साथ 60 रुपये में। खाने के बाद वापसी की राह पकड़ ली है। इस बार एक बाइक वाले मिल गए। उन्होने 20 रुपये में शारदा बैराज के भारतीय किनारे तक छोड़ दिया। यहां रोज काफी लोग बाइक से लोगों को लाने और छोड़ने का कारोबार करते हैं। छोटी सी विदेश यात्रा के बाद एक बार फिर में टनकपुर की जमीन पर हूं।



-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com 
( NEPAL, BRAHAMDEV, SIDHESHWAR TEMPLE, BIKE RIDE, SHARDA RIVER ) 




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