Friday, March 20, 2020

टनकपुर से माता पूर्णागिरी के दरबार में


टनकपुर बाजार से मां पूर्णागिरी के दरबार में जाने के लिए शेयरिंग जीप की सेवा मिल जाती है। ये जीप वैसे तो आपको बस स्टैंड के आसपास से मिल सकती है। पर जब यात्री कम होते हैं तो ऐसी जीप शिवाला चौक से चलती हैं। मैं लोगों से रास्ता पूछता हुआ राजाराम चौक से आगे बढ़कर शिवाला चौक पहुंच गया हूं। एक जीप वाले ने कहा कि वह पूर्णागिरी की सवारियां बिठा रहा है। मैं एक सीट पर कब्जा कर लेता हूं।

चालक महोदय ने कहा कि बाकी की सवरियां आसपास से आ रही हैं। तब तक आप चाय नास्ता कर लें। मैं सामने एक मिठाई की दुकान पर पहुंचा। समोसा 5 रुपये का एक। दो समोसे खाए। उसके बाद कलाकंद जो आज का ताजा बना हुआ था। तो 20 रुपये का कलाकंद भी खा लिया। वापस जीप के पास पहुंचा। सारी सवारियां भर लेने के बाद हमारे जीप वाले मुझे और एक दूसरी सवारी को कहा कि आप पीछे वाली जीप में चले जाएं क्योंकि हमारे पास एक समूह की सवारियां हो गईं हैं। इन्हें अलग नहीं कर सकता। खैर हमें पिछली जीप में जाना पड़ा। थोड़ी देर में भरने के बाद ये जीप चल पड़ी। शहर सेबाहर निकलने से पहले जीप ने शहर का एक चक्कर लगाया। एक सहयात्री को सोम रस लेना था।

बारिश के साथ सफर - शहर से बाहर निकलने के बाद लंढौरा वन क्षेत्र का चेकपोस्ट आया। यहां से जीप दाहिनी तरफ मुड़ गई। आगे बूम आश्रम आया। यह भी पूर्णागिरी का के मार्ग का एक दर्शनीय स्थल है। पर हम यहां पर नहीं रुक सके। थोड़ी दूर आगे पहाड़ से गिरते तीन जलस्रोत मिले। इनका पानी सड़क के ऊपर से बह रहा था। बहाव तेज था। मेरे साथ बैठी महिलाओं ने बताया कि पहाड़ पर तेज बारिश होने पर इन टपरों में पानी और बढ़ जाता है फिर रास्ता कुछ घंटों के लिए बंद हो जाता है। बारिश रुकने पर ही रास्ता खुलता है।

पत्थर गिरने पर रास्ता बंद हो जाता है - दो दिन पहले 18 अगस्त को भी पूर्णागिरी के मार्ग में पत्थर गिरने के कारण रास्ता बंद हो गया था। आगे हमें सड़क पर क्रेन दिखाई दी। वह अभी भी पत्थर हटाकर रास्ता साफ करने में लगी हुई थी। तब समझ में आया कि माता पूर्णागिरी के लिए आने वाले श्रद्धालु बारिश के दिनों में कम क्यों हो जाते हैं।

ये पहाड़ों से गिर रहे पानी के स्रोत आगे जाकर शारदा नदी में समाहित हो जाते हैं। हमारी जीप तेजी से अब पहाड़ के घुमावदार रास्ते पर चढ़ाई करने लगी है। ऊंचाई बढ़ती जा रही है। रास्ता मनोरम होता जा रहा है। इस मनोरम रास्ते में कुछ गांव भी हैं। इस बीच बारिश तेज हो गई है। हमारे ड्राईवर ने गाड़ी रोककर छत पर रखे सभी यात्रियों के बैग को उतारकर नीचे रखा। हमलोग अब ठूलीगाड़ चेकपोस्ट पर पहुंच गए हैं। यहां पर पुलिस थाना भी है। आगे एक बैरियर लगा है। हमारे ड्राईवर गाड़ी रोककर बैरियर हटाते हैं फिर आगे के लिए चल पड़ते हैं। 

दरअसल माता पूर्णागिरी की ओर शाम 6 बजे के बाद वाहनों के जाने पर रोक है। तब ठूलीगाड़ से आगे का रास्ता बंद कर दिया जाता है। यहां से पूर्णागिरी मंदिर के आधार तल यानी भैरव मंदिर की दूरी लगभग छह किलोमीटर है। थोड़ी देर में हम अपनी मंजिल पर पहुंच गए हैं। हमारी जीप में जितनी भी सवारियां बैठी हैं सभी स्थानीय लोग हैं सिर्फ एक मैं ही दर्शनार्थी हूं। पार्किंग से पहले से पूर्णागिरी मंदिर से जुड़ी दुकाने शुरू हो जाती हैं। पर इन दुकानो का नाम धर्मशाला है। इन सभी दुकानों में शौचालय, स्नानघर और सोने के लिए बिस्तर का इंतजाम है। इन सेवाओं का दुकानदार कोई शुल्क नहीं लेते। पर आपको इन दुकानदार से माता का प्रसाद लेना जरूरी होता है। इस प्रसाद की कीमत 101, 151 रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है।

स्नान कर थकान मिटाई - मैं पार्किंग के पास स्थित एक दुकान पर अपना बैग रख देता हूं। इसके बाद उनके स्नानघर में जाकर घूब जमकर स्नान करता हूं। बारिश से लेकर जनवरी महीने तक यहां सभी दुकानों में पानी पहाड़ों से आता है। इस पानी को पाइप के सहारे जमा किया जाता है। हिमालय से आने वाले प्राकृतिक जल स्रोतों के पानी में जमकर स्नान के बाद मैंने अपनी थकान मिटा ली है। अब यहां से मां पूर्णागिरी के दरबार तक जाने के लिए तीन किलोमीटर की पदयात्रा करनी है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( PURNAGIRI, TEMPLE, UTTRAKHAND ) 



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