Wednesday, March 18, 2020

बरेली से टनकपुर वाया पीलीभीत


आला हजरत की दरगाह से निकलने के बाद पैदल पैदल ही सौदारगन, फिर कासगरन, मलूकपुर होते हुए बिहारीपुर चौराहे पर पहुंचा हूं। सुबह के नास्ते  एक बड़ा नान खाने के बाद मैं एक मुस्लिम दुकानदार से पूछता हूं कि बस स्टैंड कैसे जाना होगा। वे पूछते हैं कि बस लेनी है। टनकपुर की। तो फिर आत बरेली सेटेलाइट बस स्टैंड जाएं। एक शेयरिंग बैटरी रिक्शा वाला मुझे बरेली सेटेलाइट बस स्टैंड छोड़ देता है। यह अपेक्षाकृत छोटा बस स्टैंड है। पर पीलीभीत की तरफ जाने वाली बसें यहीं से मिलती हैं। हालांकि बरेली से टनकपुर ट्रेन से भी जाया जा सकता है। पर ट्रेन दोपहर में है जो शाम को पहुंचाएगी। मैं बस से चलकर जल्दी पहुंच जाउंगा।

मैं सीधे टनकपुर जाने वाली बस में बैठ गया हूं। पर टिकट पीलीभीत तक का ही लिया है। बस पीलीभीत रोड पर चलती जा रही है। रास्ते में दाहिनी तरफ महात्मा ज्योतिबा फूले रोहिलखंड विश्वविद्यालय का परिसर दिखाई देता है। कुछ किलोमीटर चलने के बाद बस रिढौरा नामक कस्बे से गुजर रही है। रक्षाबंधन गुजर चुका है। पर यहां बाजार में अभी भी राखियां बिक रही हैं। एक सहयात्री ने मेरे कौतूहल पर बताया कि जन्माष्टमी आने वाली है। लोग इधर कान्हा जी को राखी बांधते हैं।

नवाबगंज नामक कस्बे से बस आगे बढ़कर पीलीभीत जिले में प्रवेश कर गई है। उत्तर प्रदेश का यह तराई क्षेत्र वाला जिला है। खेतीबाड़ी के लिहाज से समृद्ध क्षेत्र है। पीलीभीत से मेनका गांधी सांसद रह चुकी हैं। 2019 में यहां से उनके बेटे वरुण गांधी चुनाव जीते हैं। पीलीभीत शहर में जगह जगह उनके पोस्टर दिखाई देते हैं। पीलीभीत जिले का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र है। जिले की बड़ी सीमा नेपाल के साथ भी लगती है।

पीलीभीत में मैंने बस बदल ली है। हालांकि बरेली से सीधे टनकपुर के लिए खूब बसें मिलती हैं। ये बस भी बरेली से आ रही है। भीड़ बिल्कुल नहीं है। थोड़ी देर में बस पीलीभीत शहर को पार कर आगे बढ़ने लगी है। हम पहुंच गए हैं खटीमा। ये उत्तराखंड के जिला उधम सिंह नगर का प्रमुख शहर है। खटीमा में बहुत पुरानी चीनी मिल है। खटीमा का बाजार काफी साफ सुथरा है। कुछ मिनट बस यहां रुकने के बाद आगे चल पड़ी। 
चकरपुर नामक छोटे से बाजार के साथ जिला उत्तराखंड का चंपावत जिला आरंभ हो चुका है। अगला पड़ाव है बनबसा।  बनबसा नेपाल की सीमा पर बसा छोटा सा कस्बा है। यहां से नेपाल में प्रवेश के लिए सड़क मार्ग है। यहां चेक पोस्ट भी है। दिल्ली से नेपाल के महेंद्र नगर के लिए सीधी बस जाती है जो बनबसा बार्डर से नेपाल की सीमा में प्रवेश करती है।

हमने कभी दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे में नेपाल के महेंद्र नगर जाने वाली बस को देखा था। बनबसा से महज 10 किलोमीटर आगे चलने के साथ ही बस टनकपुर शहर की सीमा में प्रवेश कर गई है। दोपहर से पहले ही बस ने हमें टनकपुर के बस स्टैंड में उतार दिया है। टनकपुर का बस स्टैंड छोटा सा है। देर शाम के बाद यहां से कहीं के लिए बसें नहीं जाती हैं। यहां पर विभिन्न स्थानों के लिए जाने वाली बसों की समय सारिणी लिखी गई है। 


पास में ही टनकपुर रेलवे स्टेशन है। यह बरेली-पीलीभीत टनकपुर मार्ग का आखिरी रेलवे स्टेशन है। कभी ये लाइन मीटर गेज हुआ करती थी। अब ब्राडगेज में बदल चुकी है। दिल्ली से टनकपुर के लिए सीधी ट्रेन चलने लगी है। यूपी से सिंगरौली से टनकपुर के लिए त्रिवेणी एक्सप्रेस नामक ट्रेन आती है। टनकपुर रेलवे स्टेशन से पीलीभीत के लिए पैसेंजर ट्रेन भी चलती है। भारतीय रेलवे का टनकपुर रेलवे स्टेशन, साफ सुथरा और शांत दिखाई दे रहा है।

हिमालय पर्वत की तलहटी में बसा टनकपुर साफ सुथरा शहर है। यह चंपावत जिले की तहसील है। इसके एक तरफ पर्वतराज हिमालय है तो दूसरी तरफ शारदा नदी बह रही है। टनकपुर में खाना पीना किफायती है। रहने के लिए दर्जनों रियायती होटल और धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। टनकपुर से आगे चंपावत (71 किलोमीटर) और पिथौरागढ़ की ओर सड़क मार्ग से जाया जा सकता है।


-        विद्युत प्रकाश मौर्य  vidyutp@gmail.com
( BARELY, NAWABGANJ, RIDHAURA, PILIBHIT, KHATIMA, BANBASA, TANAKPUR )     

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