Saturday, March 14, 2020

सुरमा बरेली वाला अंखियों में ऐसा डाला


जैसे दिल्ली से पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल की तरफ जाने के लिए 24 घंटे लगातार बसें मिलती रहती हैं,उसी तरह आप दिल्ली से बरेली भी हमेशा जा सकते हैं। दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे से बरेली मार्ग के लिए बसें मिलती हैं। रात 12 बजे के बाद भी लगातार बरेली के नॉन स्टाप बसें चलती हैं। मैं रात को 12.30 बजे आनंद विहार बस अड्डे में पहुंचा हूं। यहां से हर 15 मिनट पर बरेली की एक बस चल रही है। कंडक्टर साहब ने बताया छह घंटे का रास्ता है बरेली का। समान्य बसों का किराया 310 रुपये। 

बस रात 12.45 बजे निकल पड़ी है। गाजियाबाद शहर पार करने के बाद डासना मसूरी होते हुए बस पिलखुवा को पार कर रही है। एक्सप्रेसवे बन चुका है। बस सरपट भाग रही है। हापुड़ से निकलने के बाद बस बाबूगढ़ में एक ढाबे पर खाने के लिए रुकी। बाबूगढ़ में सड़क के दोनो तरफ कई ढाबे हैं। सबके नाम शिवा टूरिस्ट ढाबा है। सब असली होने का दावा कर रहे हैं। मामा यादव भी और दूसरे भी। अब असली आपको खुद तय करना है।

इसके बाद गढ़ मुक्तेश्वर में गंगा जी का ब्रज घाट आया। गंगा नदी को पार करने का बाद गजरौला, अमरोहा फिर मुरादाबाद। इसके बाद रामपुर। रामपुर से नैनीताल,हलद्वानी की तरफ जाने वाली बसें रास्ता बदल लेती हैं। रामपुर के बाद बस बरेली के करीब पहुंच रही है। फतेहगंज कस्बे को पार करने के बाद बस बरेली में पहुंच गई। मैं शहर में चौपाला में उतर गया। यहां से एक तरफ रेलवे स्टेशन है तो दूसरी तरफ पुराना बरेली शहर।


बरेली का सुरमा  - बरेली की बात हो तो सुरमा की बात जरूर होगी। बरेली शहर प्रसिद्ध है अपने सुरमा के लिए। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाजार में हर जगह आपको बरेली का सुरमा बिकता हुआ मिल जाएगा। इस सुरमा के साथ आपको सुरमेदानी भी बिकती हुई दिखाई देती है। पीतल की सुंदर सुंदर सुरमेदानियां।

आंखों को कई तरह की बीमारियों से बचाने व चेहरे की खूबसूरती को चार चांद लगाने के लिए कभी सुरमा महिलाओं की पहली पसंद हुआ करता था। देश के तमाम दूसरे शहरों में भी बरेली के सुरमा की प्रसिद्धि है। समय बीतने के साथ नए-नए सौंदर्य प्रसाधनों ने सुरमे के क्रेज को थोड़ा कम किया है। पर बरेली का सुरमा आज भी पाकिस्तान के शहरों में काफी लोकप्रिय है।

हासमी सुरमा वाले चले गए कराची- बरेली में कई सुरमा बनाने वाली कंपनियां हैं जो सैकड़ो साल पुरानी है। हासमी सुरमा की बात करें तो इसकी स्थापना हकीम मोहम्मद हासिम ताजिर द्वारा 1794 में की गई थी। सन 1947 में देश विभाजन के बाद हासमी सुरमा कंपनी ने बरेली शहर को छोड़ दिया। उन्होंने पाकिस्तान जाना पसंद किया। बंटवारे के बाद इस समूह ने अपना कारोबार पाकिस्तान के शहर कराची में स्थापित कर लिया। आज भी वह पाकिस्तान का बड़ा सुरमा ब्रांड है। पर वे वहां भी बरेली की विरासत को शान से बेचते हैं।  

बरेली का सुरमा बनाने की प्रक्रिया बहुत पेचीदी है। बताया जाता है कि सुरमा बनाने के लिए सऊदी अरब से कोहिकूर नामक पत्थर का इस्तेमाल किया जाता है। इस पत्थर को छह माह गुलाब जल में, फिर छह माह सौंफ के पानी में डुबोकर रखा जाता है। सूखने पर इसकी घिसाई की जाती है। इसके बाद इसमें सोना, चांदी और बादाम का अर्क मिलाया जाता है और तब सुरमा बनाया जाता है। हालांकि आजकल इतनी पेचीदी प्रक्रिया से सुरमा बनता हो ये कहना मुश्किल है। पर सुरमा बेचने वाले बताते हैं कि सुरमा एक आयुर्वेदिक औषधि है। यह कई तरह की बीमारियों से बचाता भी है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( SURMA BAREILLY WALA, HASMI SURMA  )



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