Tuesday, March 10, 2020

शुकताल- सोलानी नदी की सुहानी धार


शुकताल में दरअसल जिस नदी से हमारा साक्षात्कार होता है। वह गंगा नहीं बल्कि गंगा की सहायक नदी सोलानी है। सोलानी नदी उत्तराखंड से निकलती है। सोलानी रुड़की से और पीछे पुहाना के आसपास से शुरू होती है। इस नदी की कुल लंबाई ज्यादा नहीं है। यह शुकताल से आगे जाकर गंगा में मिल जाती है।

तो शुकताल तीर्थ सोलानी नदी के किनारे ही बसा हुआ है। पर आस्थावान लोग इसे ही गंगा की धारा मानते हैं। सोलानी से जुड़ी कई बातें हैं। रुड़की शहर सोलानी नदी के तट पर ही बसा हुआ है। रुड़की में सोलानी नदी पर एक्यूडक्ट का निर्माण किया गया है।

ब्रिटिश राज में अपर गंगा कैनाल का निर्माण किया जा रहा था, तब नहर के मार्ग में सोलानी नदी आ गई। तब देश का पहला एक्यूडक्ट का निर्माण 1846 में सोलानी नदी पर किया गया। यानी यहां नदी और नहर का पानी एक दूसरे को क्रॉस करते हैं। नदी के ऊपर से चैनल बनाकर यहां पर नहर को गुजारा गया है।
यह तब इंजीनियरिंग का अदभुत नमूना था। इसकी लंबाई 980 फीट है। इसमें कुल 15 स्पैन बनाए गए हैं। इसके निर्माण में ईंटों का इस्तेमाल हुआ है। आज यह इलाका रुड़की के लोगों के लिए पिकनिक स्पॉट बन गया है।  

वहीं सोलानी मुजफ्फरनगर से आगे पुरकाजी में कई गांवों के लिए कोप बन जाती है। कई बार सोलानी नदी में ज्यादा पानी आता है तो इस इलाके के करीब 20 गांव इसके जद में आ जाते हैं।

शुकताल में सोलानी नदी के तट पर लंबे घाट का निर्माण कराया गया है। यह काफी कुछ हरिद्वार के हरी की पौड़ी की तरह है। इन घाटों के पास ऊंचे वाच टावर भी बनाए गए हैं। यहां सालों भर हर रोज श्रद्धालु स्नान करते हैं। लोग मुंडन समेत कई तरह के संस्कारों के लिए भी यहां पहुंचते हैं। हालांकि यहां पर मुझे सोलानी नदी का पानी ज्यादा साफ नहीं दिखाई दे रहा है। मेरी इच्छा यहां पानी में डुबकी लगाने की नहीं है। पर मैं सामने देख रहा हूं कि कई रंग बिरंगी नावें तैयार हैं। 

मोटर बोट जो आपको नदी की सैर कराते हैं। वे मांग रहे हैं 30 रुपये प्रति सवारी। मैं बिना देर किए इस सैर के लिए तैयार हो गया। कुछ और लोग भी आ गए और चल पड़ी है नाव। इसमें बैठने के लिए कुर्सियां लगी हैं। मैं किनारे बैठकर नदी की धार नजारा कर रहा हूं। नाविक बताते हैं कि गंगा और सोलानी का संगम यहां से कुछ किलोमीटर आगे हैं। यहां पर नदी पर बना एक पुराना पुल नजर आ रहा है। तकरीबन आधा किलोमीटर नदी में घुमाने के बाद वे वापस घाट पर ले आए। मैं उन्हें धन्यवाद देकर आगे की और चल पड़ा। 

नदी तट के आसपास खाने पीने की दुकानें और रहने के लिए धर्मशाला शुरू हो गए हैं। अलग अलग समाज के लोगों ने यहां पर कई आवास क्षेत्र का निर्माण कराया हुआ है। शुक्रताल में खाने पीने के लिए सीमित विकल्प मौजूद हैं। आगे बढ़ने से पहले मैं एक जगह रूककर थोड़ी सी पेट पूजा करने के लिए बैठ गया। दो समोसे उदरस्थ करने के बाद आगे चल पड़ा। तो अब हम चलेंगे विशाल हनुमान जी और गणेश जी के दर्शन करने।
यूट्यूब पर वीडियो देखें - https://www.youtube.com/watch?v=5GWigb4jouU

-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
-        ( SHUKTAL, SOLANI RIVER, BOATING, ROORKEE, MUZFFARNAGAR )


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