Sunday, March 1, 2020

गंगा में नाव से काशी दर्शन - मणिकर्णिका घाट से हरिश्चंद्र घाट

लंका से चलकर दशाश्वमेध घाट पहुंच गया हूं। बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन से पहले गंगा जी के घाट की ओर चल पड़ा हूं। गोदौलिया से दशाश्वमेध रोड पर वैसी ही रौनक है। सजी हुई साड़ियों की दुकानें। फुटपाथ पर छोटी छोटी दुकानें और भीड़ आदमी से टकराता आदमी। मैं धीरे धीरे आगे बढ़ रहा हूं। तभी सामने से आते एक सज्जन ने मुझे रोका। वे मेरे पुराने मित्र शैलेंद्र सिंह हैं। कभी हमलोग महुआ चैनल में साथ साथ थे। वे अपने परिवार के साथ बनारस घूमने पहुंचे हैं। उनका भीड़ में यूं मिल जाना इत्तिफाक रहा। दुआ सलाम, हाल समाचार के बाद मैं आगे बढ़ा। राजेंद्र प्रसाद घाट के पास सीढियों से जैसी ही नीचे उतरने को हुआ, एक पुजारी जी ने मेरे ललाट पर तिलक लगा दिया। दशाश्वमेध घाट पर आरती अभी अभी खत्म हुई है। घाट पर लोगों की खूब भीड़ है। मैं धीरे-धीरे जगह बनाता हुआ नीचे सीढ़ियां उतरता हूं।

गंगा जी के घाट पर कई नावें तैयार है। काफी लोग नाव में बैठकर काशी दर्शन करते हैं। सुबह में भी और रात को भी। दर है सौ रुपये प्रति सवारी। मैं तैयार हो गया गंगा दर्शन के लिए। एक नई नाव आई है उसकी कुर्सियां थोड़ी आरामदेह है उसमें सैर करने की दर है 200 रुपये प्रति सवारी। मैं 100 रुपये वाले में बैठा हूं। हमारी इस नाव में 40 लोग हैं। सभी अलग अलग प्रांत से हैं।

कोई कर्नाटक से कोई बंगाल से तो कोई मुंबई और चंडीगढ़ से। नाव वाले ने बताया कि वह मणिकर्णिका घाट से हरिश्चंद्र घाट तक की सैर कराएगा। नाव चल पड़ी है। पहले उत्तर दिशा की ओर यानी मणिकर्णिका घाट की ओर। दशाश्वमेध घाट के ठीक बगल में राजेंद्र प्रसाद घाट है। ज्यादातर सरकारी आयोजन इसी घाट पर होते हैं।

हर साल एक अप्रैल को यहां पर महामूर्ख कवि सम्मेलन होता है। इसमें देश भर के हास्य कवियों का जमावड़ा लगता है। इसके ठीक बगल मे मान मंदिर घाट है। नाव से काशी के घाट जगमगाते हुए नजर आ रहे हैं। घाटों पर रोशनी का अक्श गंगा जी के पानी में दिखाई दे रहा है। इसलिए रातों को इन घाटों को देखना सुखद अनुभूति है। थोड़ी ही देर में हम पहुंच गए हैं मणिकर्णिका घाट पर। यहां पर कभी चिता नहीं बुझती। हमारे सामने कई चिताएं जलती हुई दिखाई दे रही हैं। नाविक लोगों को काशी के घाटों के बारे में बता रहे हैं।

यहां से नाव दक्षिण दिशा में चल पड़ी है। हमलोग एक बार फिर दशाश्वमेध से आगे की ओर हैं। काशी में गंगा तट पर कुल 64 घाट हैं। ये घाट अस्सी घाट से राजघाट के बीच हैं। इनमें बहुत सारे घाट देश के अलग अलग राजाओं द्वारा बनवाए गए हैं। इसलिए इन घाटों के नाम भी उन्ही रजवाड़ों पर रखे गए हैं। दरभंगा घाट का निर्माण दरभंगा महाराज ने करवाया था। अहिल्या बाई घाट, रीवा कोठी घाट जैसे नाम आपको देखने को मिल जाएंगे।

दक्षिण की दिशा में हमारा सफर हरिश्चंद्र घाट तक है। यहां पर भी शवदाह होता है। इस घाट तक वाहन पहुंच जाते हैं। यहां से हमारी नाव एक बार फिर वापस चल पड़ी है। फिर उसे दशाश्वमेध घाट पर उन्होंने हम सबको उतार दिया है। यह घाट देर रात तक गुलजार रहता है। और अहले सुबह स्नानार्थियों का  तांता एक बार फिर लग जाता है।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
-        ( DASHASHMEDH GHAT, BOATING IN GANGA, GHAT OF VARANASI, MANIKARNIKA TO HARISHCHANDRA GHAT )

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