Thursday, March 12, 2020

शुकताल में 77 फीट के बजरंग बली


शुकताल में सोलानी नदी के तट से निकल कर वापस चल पड़ा हूं। मैं लोगों  से बजरंगबली की विशाल प्रतिमा तक पहुंचने का रास्ता पूछता हूं। दरअसल शुकताल की पहचान बजरंग बली की विशाल प्रतिमा के लिए भी है। यहां पर बजरंग बली खड़े मुद्रा में है जो दूर से ही नजर आते हैं। हनुमान जी एक हाथ में गदा लिए हुए हैं और दूसरे हाथ से आशीर्वाद दे रहे हैं।

हनुमान जी के इस विशाल विग्रह की स्थापना सन 1987 में हुई। सतह से हनुमान प्रतिमा की ऊंचाई 77 फीट है। यहां 12 फीट ऊंचे प्लेटफार्म पर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की गई है। इस विग्रह के अंदर देश की अलग अलग लिपियों में 700 करोड़ बार ईश्वर के नाम लिखकर संकलित किए गए हैं। मूल प्रतिमा के चारों तरफ विश्व में पाई जाने वाली सभी वानरों के प्रजाति की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।

प्रतिमा के परिसर में सुंदर सा मंदिर भी है। इस हनुमन धाम की स्थापना स्वामी चक्र जी महाराज के प्रेरणा से हुई थी। श्रीराम के भक्त हनुमान के इस मंदिर को देखने के लिए दूर दूर से लोग यहां आते हैं। मंदिर परिसर में साहित्यिक पुस्तकों की दुकान भी है। यहां श्रद्धालुओं के लिए भंडारा भी लगता है।



गणपति की विशाल प्रतिमा – हनुमान जी प्रतिमा के बगल में एक गणेश जी का मंदिर है। इस मंदिर में गणेश जी विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। इसी परिसर में गीता प्रेस के पुस्तकों की भी दुकान है। यहां पर आयुर्वेदिक औषधियां भी मिलती हैं। परिसर में एक साहित्यिक पुस्तकों की भी दुकान है। मंदिर के आसपास गुर्जर धर्मशाला और दंडी स्वामी का आश्रम भी स्थित है।

गणपति की प्रतिमा से आगे बढ़ने पर मुझे एक स्थानीय खादी की दुकान नजर आती है। वहां मुझे एक कुरता पसंद आ जाता है। दाम भी वाजिब है। छूट के बाद 315 रुपये,  तो खरीद ही लेना चाहिए। खादी वाले दुकानदार मुझे शुकताल के बारे में और भी जानकारी देते हैं। 

दिल्ली से एक दिन में अगर आप किसी धार्मिक स्थल की यात्रा करना चाहते हैं तो आपके पास शुकताल अच्छा विकल्प हो सकता है। यह जगह प्रकृति के करीब तो है ही, रहने खाने-पीने में भी किफायती है। यहां का परिवेश अभी तक ग्रामीण है। महानगर के कोलाहाल से दूर प्रदूषण मुक्त स्थल है जहां पर आप एक या दो दिन गुजार सकते हैं। 

-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
(SHUKTAL, LONGEST HANUMAN, BIG GANESH,  VAT VRIKSHA, SWAMI KALYAN DEV )
आगे पढ़िए- यहीं सुनाई थी शुकदेव जी ने श्रीमदभागवत कथा 

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