Thursday, February 6, 2020

मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन और कबीर की काशी


दिल्ली मंडुवाडीह सुपरफास्ट एक्सप्रेस बिल्कुल समय पर मंडुवाडीह स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर छह पर पहुंच गई है। कई साल बाद इस रेलवे स्टेशन पर पहुंचा हूं। इस बीच स्टेशन का कायाकल्प हो चुका है। किसी जमाने में यह मीटर गेज का रेलवे स्टेशन हुआ करता था। वाराणसी से इलाहाबाद सिटी जाने वाली छोटी लाइन की ट्रेने यहां से गुजरती थीं। बाद में मीटरगेज लाइन ब्राडगेज में बदल गई। हाल के सालों में मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का विस्तार किया गया है। अब यहां कुल आठ रेलवे प्लेटफार्म हैं। 

वाराणसी कैंट स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों की भीडभाड कम करने के लिए कई ट्रेनों को मंडुवाडीह स्थानांतरित किया गया है। अब शिवगंगा एक्सप्रेस, नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस जैसी तमाम ट्रेनें यहीं से बनकर चलती हैं। अब यह स्टेशन एक टर्मिनल के तौर पर विकसित हो रहा है। स्टेशन के बगल में स्थित रेलवे फाटक के ऊपर सुंदर फ्लाईओवर बन चुका है।   

मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर मुझे कबीर नजर आते हैं। कबीर के चित्र के साथ उनका एक दोहा लिखा है-
कबीरा कुआं एक है पानी भरें अनेक।
भांडे में ही भेद है, पानी सबमें एक।
काशी मतलब कबीर की काशी, आदि कवि महर्षि वाल्मिकी की काशी। यह संयोग है कि कबीर को  जुलाहे नीरू और नीमा से जिल तालाब से प्राप्त किया था वह तालाब मंडुआडीह रेलवे स्टेशन से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है। 

लहरतारा का तालाब। इसी तालाब के किनारे एक दिन जुलाहे नीरु को एक बच्चा मिला था। उसका धर्म क्या था। किसी को नहीं मालूम। वैसे बच्चा पैदा होता है तो उसका धर्म क्या होता है। धर्म की चादर तो हम बाद में ओढा देते हैं ना। तो इस तरह कबीर मुसलमान ही हुए। खैर मंडुआडीह रेलवे स्टेशन पर रेलवे प्रशासन ने कबीर की यादें संजोई हैं। तो इसके साथ ही सारनाथ के गौतम बुद्ध को याद किया है। दीवारों पर लगे म्युरल में सारनाथ का धमेक स्तूप दिखाई देता है।

अर्धनारीश्वर शिव की प्रतिमा - प्लेटफार्म नंबर आठ के द्वार के पास बने विशाल झरना युक्त प्रदर्शनी में शिव के अर्धनारीश्वर रूप को प्रदर्शित किया गया है। यह प्रदर्शनी इतनी सुंदर और भव्य बनी है कि आते जाते लोग रुक जाते हैं। देर तक उसे निहारते हैं फिर उसके साथ अपनी तस्वीरें लेते हैं।

प्लेटफार्म नबंर आठ की ओर से अब मुख्य प्रवेश द्वार बना दिया गया है। मुख्य भवन मंदिर की शक्ल में है। प्लेटफार्म नंबर आठ पर कई नए वेटिंग हॉल बनाए गए हैं। ये हॉल वातानुकुलित है। शानदार सोफे लगे हैं। दीवारों पर शहर बनारस की पेंटिंग लगी है। प्लेटफार्म नबंर आठ पर विशाल कैफेटेरिया भी बना है। स्टेशन के बाहर विशाल मैदान है। इसमें एक सरोवर बनाकर उसमें कई फव्वारे लगाए हैं। मतलब आप स्टेशन पर कुछ घंटे भी गुजारें तो बोरियत नहीं महसूस होगी।

नैरोगेज का स्टीम लोकोमोटिव - प्लेटफार्म नंबर आठ के प्रवेश द्वार पर रेलवे ने नैरोगेज का एक डीजल इंजन भी स्थापित किया है। यह इंजन गुजरात के बडौदा के आसपास में चलने वाले नैरोगेज नेटवर्क से लाया गया है। यह मियागाम कर्जन से मोतीकोरल, डभोई के बीच संचालित होता था। हालांकि यह इंजन ज्यादा पुराना नहीं है। इस लोकोमोटिव जेडडीएम 541 का निर्माण 1993 में चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स द्वारा किया था। कई सेवाएं देने के बाद ये जब रिटायर हो गया तो इसे मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन पर लाकर स्थापित कर दिया गया।

मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन से महज एक किलोमीटर की दूरी पर डीजल रेल कारखाना स्थित है। पहले यह मीटर गेज और ब्राडगेज के लोकोमोटिव का देश का एकमात्र निर्माता था। अब यहां पर इलेक्ट्रिक इंजन बनाए जा रहे हैं। साथ ही पुराने डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में परिवर्तित भी किया जा रहा है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
-        ( MANDUVADIH RAILWAY STATION, NG LOCO, VARANASI )

No comments:

Post a Comment