Monday, February 10, 2020

ऐतिहासिक धर्मचक्र प्रवर्तन स्थल और मूलगंध कुटी मंदिर


सारनाथ का मूलगंध कुटी गौतम बुद्ध से जुड़ा हुआ प्रमुख मंदिर है। यह बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक घटना धर्म चक्र प्रवर्तन स्थल और धमेक स्तूप के पास बना हुआ है। यह अत्यंत सुंदर मंदिर है। इस परिसर काफी हरा भरा है। सातवीं शताब्दी में भारत आए चीनी यात्री ह्वेनसांग ने इसका वर्णन 200 फीट ऊंचे मूलगंध कुटी विहार के नाम से किया है। इस मंदिर पर बने हुए नक्काशीदार गोले और छोटे-छोटे स्तंभों से लगता है कि इसका निर्माण गुप्तकाल में हुआ होगा।

पर आजकल यहां गुप्तकालीन मंदिर मौजूद नहीं है। वर्तमान में जो मूलगंध कुटी मंदिर है उसका निर्माण साल 1931 में महा बोधि सोसाइटी ने कराया। यह अपने मुरल्स और फ्रेस्को के लिए प्रसिद्ध है। मूलगंध कूटी मंदिर के अंदर आकर्षक भित्ति चित्र भी देखे जा सकते हैं। इसे जापान के एक प्रसिद्ध चित्रकार कोसेत्सु नोसु ने बनाया था। इस विहार के प्रवेश द्वार पर तांबे की एक बड़ी सी घंटी लगी हुई दिखाई देती है, जिसे जापान के एक शाही परिवार ने दान में दिया था। 




धर्म चक्र प्रवर्तन स्थल ( TURNING THE WHEEL OF LAW ) -  मंदिर के बगल में धर्म चक्र प्रवर्तन की घटना की याद में गौतम बुद्ध की अपने पांच शिष्यों को दीक्षा देते हुए मूर्तियां बनाई गई हैं। वाराणसी के निकट सारनाथ में प्रथम उपदेश देने की इस घटना को धर्म चक्र प्रवर्तन के नाम से जाना जाता है।  बुद्ध पूर्णिमा के दिन सारनाथ में गौतम बुद्ध जिन पांच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिया उनके नाम थे  – कौण्डिन्य, वप्पा, भादिया, अस्सागी और महानामा। 


शिष्यों की तलाश में पहुंचे सारनाथ-  कहा जाता है कि बोध गया में जब बुद्ध को परमज्ञान प्राप्त हुआ तब बुद्ध को ने सोचा कि पहले मैं उन पांच शिष्यों की ही तलाश करूं जो मुझे छोड़ कर चले गए थे। कुछ भी हो, वे मेरे साथ वर्षों रहे। वे मुझे छोड़ कर चले गए हैं, मैंने उन्हें नहीं छोड़ दिया है। उनकी नासमझी के लिए इतना बड़ा दंड देना उचित नहीं है। तो वे उनकी तलाश में आए, इसीलिए सारनाथ तक आए। उन्हें पता चला था वे सारनाथ में रुके हुए हैं।  बुद्ध ने उपदेश में चार आर्य सत्यों के बारे में बताया था। ये हैं- दुख है, दुख का कारण है, दुख का निदान है, निदान का मार्ग निर्वाण है।


यहां से खरीदें स्मृति चिन्ह-  मूलगंध कुटी के आसपास सड़क पर बाजार है। यहां से कई तरह के बुद्ध की मूर्तियां खरीद सकते हैं। यहां पर बाजार गुलजार है। आप चाहें तो थंगक पेंटिंग भी खरीद सकते हैं। हमने यहां से मिट्टी की बुद्ध प्रतिमा खरीदी महज दस रुपये में। यहां खाने पीने की दुकाने भी हैं। आप गन्ने का जूस पी सकते हैं। लिट्टी-चोखा या गोलगप्पे का स्वाद ले सकते हैं।

मूलगंध कुटी के सामने बिडला परिवार द्वारा निर्मित धर्मशाला भी है। यहां रहने के लिए रियायती दरों पर कमरे उपलब्ध हैं। यहां महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया का दफ्तर भी है। आप सारनाथ में अलग अलग देशों के प्रमुख बौद्ध मंदिर और मठों को भी देख सकते हैं। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com 

( SARNATH, BUDDHA, MULGANDH KUTI, DHAMEK STUPA, COLORS OF BANARAS)



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