Tuesday, February 4, 2020

प्रयाग में संगम तट पर सवा महीने कल्पवास



सुबह सुबह इलाहाबाद रेलवे स्टेशन से मंडुआडीह सुपरफास्ट वाराणसी की ओर बढ रही है। खिली खिली धूप निकल आई है। दारागंज रेलवे स्टेशन पार करने के बाद ट्रेन गंगा नदी के पुल को पार कर रही है। पुल पार करते ही गंगा तट पर झूसी की तरफ विशाल टेंट सिटी मेरी नजरों के सामने है। टेंट सिटी में कुछ शिविरों में लोग भजन करते हुए तो कुछ शिविरों में नास्ते का लंगर छकते हुए नजर आ रहे हैं। 

सहयात्रियों से जानकारी ली तो पता चला कि पूरे पौष और माघ महीने लोग यहां पर कल्पवास करते हैं। पौष माह के आखिरी दिनों में लोग प्रयाग के इस टेंट सिटी में पहुंचने लगते हैं। ये तंबू प्रशासन की ओर से लगाए जाते हैं। मतलब यहां रहने की व्यवस्था मुफ्त में मिल जाती है। पर सोने के लिए पुआल (पराली) का का गद्दा। माघ का महीना जब जाडा यानी सरदी अपने चरम पर होती है लोगों की दिनचर्या यहां बडी चुनौतीपूर्ण होती है। 

हर रोज सुबह चार बजे ही जग कर गंगा जी में डुबकी लगाकर स्नान करना। इसके बाद दिन भर नास्ता भोजन। आम तौर पर कल्पवास करने वाले लोग यहां अपना खाना भी खुद तैयार करते हैं। हालांकि यहां कई धार्मिक संस्थाओं की ओर से लंगर भी चलाया जाता है। पर ज्यादातर लोग स्वपाकी होते हैं।
इस कल्पवास के दौरान पौष की पूर्णिमा का स्नान उसके बाद मौनी आमवस्या का स्नान महत्वपूर्ण होता है। इसके बाद माघ में वसंत पंचमी के दिन स्नान होता है। इस स्नान के बाद यह टेंट सिटी धीरे धीरे खाली होने लगती है।

प्रयाग में संगम तट पर सवा महीने गुजारने के लिए ज्यादातर लोग ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। हम शहरी लोग जब सर्दी के दिनों में स्नान करने के लिए गीजर का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं तब मुंह अंधेरे ये लोग गंगा जी के शीतल जल में स्नान करते हैं। ये अदभुत श्रद्धा है। ऐसी श्रद्धा और ऐसे साहस को नमन है। वक्त बदलने के साथ आसपास के ग्रामीण लोगों में प्रयाग जाकर संगम पर स्नान करने और यहां एक महीने से ज्यादा वक्त गुजारने को लेकर उत्साह कम होता नहीं दिखाई देता है। हर साल जनवरी में प्रयाग में प्रशासन की ओर से मेले की तैयारी शुरू हो जाती है।

हालांकि ठहराव नहीं है पर हमारी ट्रेन झूसी रेलवे स्टेशन पर रुक गई। ट्रेन के रुकते ही हमारे आरक्षित डिब्बे में महिलाओं का एक दल चढ गया। 27 महिलाओं के इस दल में एक महिला इस दल की मुखिया है। ये लोग गोरखपुर के पास सहजनवा से मौनी आमवस्या का स्नान करने आए थे। इस दौरान ये लोग तीन दिन गंगा तट पर रुके। 

महिला ने बताया कि हमलोग रोज सुबह गंगा स्नान करते थे। स्नान के बाद कुछ लोग अलाव के किनारे बैठ जाते हैं। पर इस महिला ने बताया कि मैं कभी अलाव के किनारे नहीं बैठी। महिलाओं का दल अपने साथ घर से तिल के लड्डू बनाकर लाया। उस महिला ने मुझे एक लड्डू खाने को दिया।

ट्रेन चल पडी है। अगला स्टेशन ज्ञानपुर रोड है। यहां पर कई पकौडे बेचने वाले प्लेटफार्म पर घूम रहे हैं। कुल 20 रुपये में पांच पकौडे चटनी के साथ। तो सुबह के नास्ते में ज्ञानपुर रोड के पकौडे खाएं जाएं। ट्रेन समय से पहले चल रही है। इसलिए ज्ञानपुर रोड में देर तक रुक गई है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
( ALLAHABAD, PRAYAGRAJ, GANGA, HOLY BATH, MAGH, KALPWAS)
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