Friday, February 21, 2020

कुदरा से मुंडेश्वरी धाम की ओर

कुदरा में सुबह सुबह कई साल बाद श्याम सुंदर चाचा और उनके परिवार से मिलना हुआ। सुबह का रास्ता उनके घर। कई तरह के फल सब्जियों का सलाद और सिलबट्टे पर पीसी हुई चटनीजिसे हम भोजपुरी में कुछिला कहते हैं। उसके बाद मेथी के पराठे। अब हमारा कार्यक्रम है मुंडेश्वरी घाम जाने का।

तो अशोक भाई की आल्टो निकल पड़ी है। कुदरा बाजार को पार करते हुए हमलोग भभुआ रोड पर चल पड़े हैं। कई सालों बाद मैं कुदरा को देख रहा हूं। यहां बाजार काफी विकसित हो गया है। शहर विस्तार लेता जा रहा है। कुदरा से भभुआ की सड़क काफी अच्छी है। 


हमलोग भभुआ शहर में प्रवेश करने से पहले ही नगर वाले रास्ते से आगे बढ़ गए हैं। अशोक भाई ने कहा कि शहर के ट्रैफिक से बचते हुए हमलोग आगे बढ़ जाएंगे। एक नहर के साथ वाली सड़क पकड़ी है। आगे भगवानपुर बाजार आया। वहां से बायीं तरफ का रास्ता लिया। थोड़ी देर बाद हमलोग माता मुंडेश्वरी के मंदिर के करीब हैं। मंदिर परिसर में जाने वाले वाहनों को पार्किंग फीस चुकानी पड़ती है। मंदिर से ठीक पहले एक छोटा सा बाजार है। यहां पूजा और प्रसाद की दुकाने हैं। ज्यादातर दुकाने महिलाएं और लड़कियां संचालित कर रही हैं।

मुंडेश्वरी देवी का मंदिर कैमूर की पहाड़ की तलहटी में एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है। तो मंदिर तक जाने के लिए दो रास्ते हैं। या तो आप सीढ़ियों के रास्ते से पैदल चलकर जाएं। ज्यादातर श्रद्धालु ऐसा करते हैं। अगर आपके पास अपना वाहन है और आप निष्णात चालक हैं तो वाहन चलाते हुए घुमावदार रास्ते से मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंच सकते हैं।  


अशोक भाई कार चलाते हुए मंदिर तक पहुंच गए। मंदिर के प्रवेश द्वार पर गाड़ी पार्क करके हमलोग मंदिर में प्रवेश कर गए। दोपहर में मंदिर बंद होने से पहले हमें दर्शन करने का सौभाग्य मिल गया।

मंदिर परिसर में पीछे की ओर हवन कुंड बना है। मुंडेश्वरी मंदिर परिसर में सैकड़ो पुरानी टूटी फूटी मूर्तियों को अवशेष नजर आते हैं। दरअसल यह एक पंचायत शैली का मंदिर था। यहां के कई मंदिर अब नष्ट हो चुके हैं। सिर्फ मुख्य मंदिर बचा है। वह भी पूरी तरह यानी साबुत नहीं बचा है।

पर इस मंदिर से जुड़ी हुई तमाम मूर्तियां आप पटना के संग्रहालय में देख सकते हैं। छठी सातवीं शताब्दी में बनी मुंडेश्वरी से प्राप्त मूर्तियों को वहां पर संग्रहित किया गया है।
अब हमलोग मंदिर में दर्शन के बाद हमलोग मंदिर के प्रवेश द्वार से बाहर निकलकर पीछे पहाड़ी का नजारा करने चल पड़े। यहां पर एक पहाड़ी का आकर ऐसा है जो किसी दैत्य की जिह्वा जैसा नजर आता है। पहाड़ी से नीचे के आसपास के गांव नजर आते हैं।

हमारे आसपास के गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि चार पांच दशक पहले मुंडेश्वरी मंदिर तक पहुंचने का रास्ता इतना आसान नहीं था। सिढ़ियां भी नहीं थीं। पर अब प्रशासन की ओर से काफी इंतजाम कर दिए गए हैं। रास्ता बेहतर हो गया। मंदिर के आसपास सुरक्षा और खाने पीने का इंतजाम भी है। मंदिर के प्रवेश द्वार के आसपास दिन भर रौनक रहती है। तो कुछ घंटे माता के दरबार में गुजारने के बाद हमलोग वापस लौट चले हैं।
मंदिर के बारे में और पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं-  मुंडेश्वरी देवी 
मुंडेश्वरी मंदिर समूह के बारे में और जानें - पटना संग्रहालय में मुंडेश्वरी देवी की मूर्तियां। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com

-        ( MUNDESHWARI DEVI, KAIMUR, BHABUA, BIHAR )  
   


No comments:

Post a Comment