Wednesday, February 19, 2020

सितारों को खबर ही नहीं मुसाफिर ने कहां दिन गुजारा कहां रात की...

छोटी सी सूचना पर गांव जाने का कार्यक्रम बन गया। वहां मेरे एक चचेरे भाई की शादी है। ट्रेन में मुगलसराय ( दीनदयाल नगर ) तक का आरक्षण मिल पाया है 15484 महानंदा एक्सप्रेस में। मैंने समय सारणी में देखा दिल्ली में एक रेलवे स्टेशन है दिल्ली शाहदरा। कुछ एक्सप्रेस ट्रेनें यहां भी रुकती हैं। इनमें से महानंदा एक्सप्रेस भी एक है। सुबह 6.50 में शाहदरा पहुंचने वाली ट्रेन में मेरा टिकट कनफर्म हो गया है।


तो मैं शाहदरा सुबह 6.10 बजे पहुंच गया हूं। मेरे घर से तकरीबन चार किलोमीटर होगा ये रेलवे स्टेशन। इसका स्टेशन कोड है DSA कुछ ही एक्सप्रेस रेलगाड़ियां शहादरा में रुकती हैं। पर ये रेलवे स्टेशन जंक्शन है। यहां से शामली सहारनपुर की लाइन अलग होती है। शहादरा उन रेलवे स्टेशनों से शामिल है जिसके ठीक बगल में मेट्रो रेलवे का स्टेशन भी स्थित है। यानी यहां गाड़ी बदलना सुगम है। यह दूसरी बार है जब मैं शाहदरा से ट्रेन पकड़ने पहुंचा हूं। 



सुबह सुबह ही इस स्टेशन पर खूब चहल पहल दिखाई दे रही है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर पूड़ी सब्जी और छोले भठूरे की दुकानें गुलजार हैं। यहां 30 रुपये में दो छोला भठूरा मिल रहा है। हमारी ट्रेन महानंदा एक्सप्रेस बिल्कुल समय पर है। सुबह सात बजे मैं अपने कोच में सवार हो गया हूं। कुछ लोग इस ट्रेन की आलोचना करते हैं पर आपको कहीं जाना हो तो जिस ट्रेन में आरक्षण मिल जाए उस समय उसी ट्रेन को अच्छा मानना चाहिए।

कानपुर तक महानंदा एक्सप्रेस का सफर समय पर चलता रहा। कानपुर जंक्शन पर बाहर उतर कर हमने पराठे खाए। कानपुर से चलने के बाद ट्रेन थोड़ी थोड़ी लेट होने लगी। मैंने अपनी किताबें निकाल ली है। पढ़ते हुए सफर कट रहा है। इलाहाबाद जंक्शन पहुंचते हुए रात हो गई है। अभी इलाहाबाद से मुगलसराय का सफर भी काफी लंबा है। रात में नींद भी नहीं आ रही है। मैं वक्त काटने के लिए यूट्यूब पर कोई फिल्म सर्च करने लगा। मुझे गौतम घोष की पार फिल्म नजर आई और मैं इसे देखने लगा। इसकी कहानी बिहार के मुंगेर जिले के कोइरी ग्राम से शुरू होती है। यह मुशहर जाति के लोगों की संघर्ष कथा है। बेहतरीन फिल्म है। खास तौर पर क्लाइमेक्स तो शानदार और मर्मस्पर्शी है। 



दीनदयाल नगर पहुंचने से पहले महानंदा हर रेलवे स्टेशन पर रुक जा रही है। जीवनाथपुर जैसे छोटे से स्टेशन पर काफी देर तक रुकी रही। ऐसा कई ट्रेनों के साथ होता है। दीन दयाल जंक्शन वाले ट्रेन को स्टेशन में प्रवेश करने का सिगनल ही नहीं देते। धीरे धीरे हमारी ट्रेन विशाल रेलवे स्टेशन के यार्ड में प्रवेश करने लगी है।

वैसे तो दीनदयाल नगर में इसका निर्धारित समय रात्रि नौ बजे का है पर यह ट्रेन रात दो बजे के बाद दीनदयाल नगर पहुंची है। यहां से मेरी अगली ट्रेन सुबह 4 बजे है। जो मुझे अपने गांव के निकटकम रेलवे स्टेशन कुदरा पहुंचाएगी। यह गया पैसेंजर है जो हमारे गांव के निकटतम स्टेशन कुदरा में रुकती है। पर इस बीच मेरे पास तकरीबन दो घंटे का समय है। अपने छात्र जीवन से लेकर अब तक अनगिनत बार मुगलसराय रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ी होगी या फिर यहां से उतर कर वाराणसी की ओर प्रस्थान किया होगा। पर अब ये विशाल स्टेशन नए रंग रुप में संवर रहा है।
मैं सुबह पांच बजे घर से निकला हूं। रात के दो बजे स्टेशन के बाहर टहल रहा हूं।  मेरा ये सफर कुछ इस तरह हो गया है मानो - सितारों को खबर ही नहीं मुसाफिर ने कहां दिन गुजारा कहां रात की...






- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( SHAHDARA DELHI , DSA, KANPUR, DINDAYAL UPA JN, MUGALSARAI, MAHANANDA EXPRESS, KUDRA , cOLORS OF BANARAS) 

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