Sunday, February 16, 2020

दुर्गावती जलाशय परियोजना - बन गई हकीकत


शेरगढ़ किले से उतरने के बाद हमलोग दुर्गावती जलाशय की ओर चल पड़े हैं। यह शेरगढ़ किले की तलहटी यानी राजघाट से कोई एक किलोमीटर आगे है। यह रोहतास और कैमूर जिले के बहुप्रतिक्षित जलाशय परियोजना है जो कई दशकों बाद जाकर पूरी हो सकी है। जलाशय परियोजना पर जो शिलापट्ट लगा है उसके मुताबिक यह 2014 में पूरी हुई। तब इसका उदघाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम माझी ने किया था। हालांकि आसपास का नजारा देखकर लग रहा है कि यहां अभी भी काम चल रहा है।

इस परियोजना का निर्माण बिहार सरकार के सिंचाई विभाग ने किया है। सत्तर के दशक में दुर्गावती नदी में बांध बनाकर नहर निकालने पर विचार हुआ था। इस बांध की जद में करमचट नामक गांव आ गया। इसलिए आसपास के लोग इसे करमचट डैम भी कहते हैं। दुर्गावती जलाशय परियोजना के पूरा हो जाने से कैमूर और रोहतास जिले के काफी गांव को लाभ हुआ है। इससे निकाली गई  नहरों से भभुआ और चेनारी के आसपास के गांव में पानी पहुंचने लगा है। इससे खेती बाड़ी सहज हो गई है।

हमलोग दुर्गावती जलाशय के मुख्य बांध पर चल रहे हैं। यह करीब डेढ़ किलोमीटर से भी ज्यादा लंबा है। इसके दूसरे कोने पर पहुंचने पर एक पहाड दिखाई देता है। इस पहाड़ की लंबाई चौड़ाई ज्यादा नहीं है पर यह ऊंचाई में कई मंजिले मकान की तरह तनकर खडा है। इसे देखकर किसी दैत्य जैसा अनुभव होता है। कई लोग इस पहाड़ के साथ तस्वीरें निकालने में व्यस्त हैं।


दुर्गावती जलाशय परियोजना के बारे में हम बचपन से सुनते आए हैं। हमारे कई रिश्तेदार इस परियोजना में नौकरी करते थे। पर सरकारी लालफीताशाही के कारण ये परियोजना कई दशकों तक लटकी रही। इसका काम कछुए की गति से चल रहा था। कई सालों तक तो इसमें कर्मचारी बिना काम किए वेतन उठाते रहे। इस बीच कई सरकारें आई और गईं। इलाके की जनता मांग करती रही पर जन प्रतिनिधि अनसुना करते रहे। पर सन 2010 के बाद इसके काम में तेजी आई। तत्कालीन सांसद मीरा कुमार ने इसमें रुचि ली। राज्य सरकार ने भी सहयोग किया फिर जाकर ये परियोजना हकीकत बन सकी। 

इस परियोजना के पूरा होने में कुल 38 साल लगे। इस परियोजना की आधारशिला 1976 मे तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जगजीवन राम ने रखी थी। दुर्गावती नदी बिहार उत्तर प्रदेश की सीमा कर्मनाशा के आसपास से निकलती है। आगे इसमें और कई छोटी छोटी नदियां समाहित हो जाती हैं।


दुर्गावती जलाशय परियोजना के बांध की ऊंचाई 90 मीटर है। इससे पानी छोड़े जाने पर आसपास का 40 हजार हेक्टेयर जमीन सींचित हो सकता है। जब इस परियोजना की शुरुआत हुई तो इसकी लागात का आकलन 25 करोड़ रुपये किया गया था। पर अब तक इसमें एक हजार करोड रुपये से ज्यादा खर्च किया जा चुका है। 

अतीत में जाएं तो इस परियोजना की मांग 1951-52 में स्थानीय लोगों ने तत्कालीन वित्त मंत्री अनुग्रह नारायण सिंह से की थी। तब इस क्षेत्र में अकाल पड़ा था। एक बार फिर 1966 के अकाल के बाद इस परियोजना की मांग की गई। पर इस पर काम की शुरुआत इसके दस साल बाद हो सकी।  
दुर्गावती जलाशय के पास से ही गुप्ता बाबा के धाम जाने का रास्ता है। यहां से धाम की दूरी 12 किलोमीटर है। आप पैदल,  बाइक या फिर ट्रैक्टर से जा सकते हैं। स्थानीय लोग सुगवा घाट और पनेरिया घाट से पदयात्रा करते हुए धाम तक जाते हैं। 


- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( DURGAWATI DAM PROJECT, KARAMCHAT DAM, ROHTAS, KAIMUR, JAGJEEVAN RAM, MIRA KUMAR) 


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