Monday, February 10, 2020

शेरगढ – एक तिलिस्मी किले की ओर

सासाराम के जिला सत्र न्यायालय की ऐतिहासिक इमारत। 
इस बार जब अपने गृह जिला रोहतास पहुंचा हूं तो अपने जिले के किसी दर्शनीय स्थल को घूमने की योजना बनाई। अपने कुछ दोस्तों से बात की। पहले रोहतासगढ चलने पर चर्चा हुई। हमारे साथ परमेश्वर प्रताप ने सलाह दी कि रोहतासगढ सावन के मेले मे चलेंगे। फिर तय हुआ कि शेरगढ ही चला जाए। भले ही मैं रोहतास जिले का निवासी हूं और मेरे गांव से शेरगढ की दूरी महज 40 किलोमीटर के दायरे में है मेरे लिए ये किला अनदेखा था। 

तो हमलोग चल पडे सासाराम से शेरगढ की ओर। अगर आप देश के किसी कोने से शेरगढ़ पहुंचना चाहते हैं तो आपको दीनदयाल नगर- गया रेलवे लाइन पर कुदरा रेलवे स्टेशन उतरना चाहिए। पर रोहतास जिला के मुख्यालय सासाराम से शेरगढ़ जाने के लिए तीन रास्ते हैं। पहला वाया कुदरा चेनारी।दूसरा वाया शिवसागर चेनारी। तीसरा सासाराम से सीधे बेदा नहर के साथ लगती सड़क पकड़ कर चेनारी पहुंचे। मैं मेरे फुफेरे भाई अरविंद मेहता और साथी परमेश्वर प्रताप एक गाड़ी में चल पड़े हैं। पर सासाराम शहर से बाहर निकलते ही जीटी रोड पर भारी जाम लगा है। हमारे चौथे साथी जो हमारे साथ जाने वाले हैं वे कुदरा में सकरी मोड पर हमारा इंतजार कर रहे हैं।

वे हैं मेरे एक और भाई अशोक वर्मा। हमने अशोक को सलाह दी कि आप सीधे चेनारी पहुंच कर हमें मिलें। हमलोग शिवसागर से ही जीटी रोड छोड़ कर चेनारी की तरफ चल पडेंगे। पर सासाराम से शिवसागर पहुंचने में ही हमें दस किलोमीटर के सफर में जाम के कारण एक घंटे लग गए। खैर शिवसागर से चेनारी जाने वाली सड़क स्टेट हाईवे है और काफी अच्छी हालत में है। रास्ते में एक गांव पड़ा बरताली। यहां रुक कर हमने गाड़ी में पेट्रोल लिया। थोडी दूर चलने पर यह सड़क। नहर वाली सड़क में मिल गई।

चेनारी से ठीक पहले हाटा गांव आया। इस हाटा गांव में हमारी एक रिश्तेदारी है। गांव के सुदर्शन चाचा की ननिहाल है। इसलिए हमलोग उनकी मां को हाटा वाली दादी कहते थे।
चेनारी बाजार में हमारी मुलाकात अशोक वर्मा से हुई। चेनारी रोहतास जिले का एक ब्लॉक, थाना और विधानसभा क्षेत्र भी है। कैमूर की पहाड की तलहटी में चेनारी अच्छा खासा बाजार बन चुका है। बचपन में अपने गांव के एक चाचा की बारात में ट्रैक्टर से हमलोग चेनारी आए थे। इसके आगे तुर्की नाम के गांव में बारात गए थे। लौटते हुए चेनारी के बाजार से हमने महुआ खरीदा था। ये महुआ दूध देने वाली गाय को खिलाने के लिए था। मुझे पता चला कि चेनारी गुड़ के लड्डू के लिए प्रसिद्ध है। पर बाजार के अंदर गुड़ के लड्डू की प्रसिद्ध दुकान पर हमलोग नहीं जा सके।

चेनारी बाजार में अशोक वर्मा साथ हो लिए। हम चार लोग आगे बढ चुके हैं। अगला गांव है -मल्हीपुर । पर मेरे पिताजी बताते हैं किसी समय में मल्हीपुर बडा बाजार हुआ करता था। हमारे गांव के लोग हल बैल से जुडे कई उपकरण खरीदने यहां आते थे। यहां बड़ी मंडी लगा करती थी। अब चेनारी बड़ा बाजार हो गया है। इसे छेदी पासवान ने आदर्श ग्राम बनाने के लिए गोद ले रखा है। पर यहां एक प्रवेश द्वार के अलावा आदर्श के नाम पर कोई चीज नहीं दिखाई दी।

गांव में लोगों ने बताया कि शेरगढ़ यानी करमचट डैम तक जाने के लिए सीधे जाकर दाहिनी तरफ जाने वाली सड़क पर मुड़े। ये सड़क एक नहर के साथ चल रही है। शेरगढ़ के बगल में बादलगढ गांव है। यहां सीआरपीएफ का शिविर है। पहाड़ की तलहटी में अपनी गाड़ी पार्क करके हमलोग शेरगढ़ की ओर बढ़ चले हैं। किले तक पहुंचने के लिए कोई चार किलोमीटर की चढ़ाई करनी है। (यात्रा जारी है...)
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com 
( CHENARI, SHERGARH FORT,  ROHTAS ) 


2 comments:

  1. रोचक वृत्तांत। अगली कड़ी का इन्तजार है।

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    1. जरूर चार कड़ियां हैं

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