Thursday, February 20, 2020

सन 1862 में मुगलसराय में पहुंची थी रेल

साल 2019 में मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन ( DDU ) कर दिया गया। उसके बाद पहली बार मैं यहां पर उतरा हूं। अभी रात को दो बजे हैं और मुझे अगली ट्रेन का इंतजार करना है। पर ये इंतजार लंबा है। मेरे पास दो घंटे से ज्यादा का वक्त है। तो मैं स्टेशन के बाहर जाकर घूमने की सोचता हूं। मुझे बाहर जाने पर यह देखकर सुखद अचरज होता है कि मुगलसराय के बाजार में स्टेशन गेट के आसपास दुकानें सारी रात खुली रहती हैं। 

कुछ मिठाइयों और चाय नास्ते की दुकानें भी खुली हैं। यहां पर मिट्टी की प्याली में चाय मिल रही है। महज पांच रुपये में। वैसे मैंने दूध की चाय पीनी करीब करीब छोड़ दी है पर मिट्टी की प्याली वाली चाय पी लेता हूं। एक मिठाई दुकान से डोडा बर्फी मिठाई खरीद ली है। चार बजने से पहले कुदरा का पैसेंजर टिकट खरीदकर मैं प्लेटफार्म नंबर छह सात पर पर पहुंच गया हूं।

रेलवे स्टेशन के परिसर में सुंदर पार्क बना दिया है। इस पार्क में विशाल तिरंगा झंडा भी लहराने लगा है। स्टेशन से प्रवेश द्वार और उसके आगे फ्लाईओवर के दोनों तरफ वाराणसी और आसपास के पर्यटक स्थलों के चित्र लगाए गए हैं। ये चित्र जानकारी भी देते हैं और थोड़ी शांति और सुकून भरा संदेश भी देतें हैें। 

1862 में रेलवे से जुड़ा मुगलसराय - बात मुगलसराय ( दीनदयाल उपा) स्टेशन की। तो यह भारतीय रेलवे का अत्यंत महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह उत्तर भारत, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर भारत को जोड़ता है। ग्रैंट ट्रंक रोड ( जीटी रोड ) या शेरशाह सूरी पथ जिसे सड़क ए आजम कहा जाता है, मुगलसराय से होकर गुजरता है। पर मुगलसराय रेलवे स्टेशन बना 1862 में जब मुगलसराय पटना रेल खंड बनकर तैयार हुआ। इसके दो साल बाद मुगलसराय इलाहाबाद ( प्रयागराज) से 1864 में जुड़ गया। सन 1883 में मुगलसराय से वाराणसी के बीच रेलवे लाइन का निर्माण हो गया था,  पर लंबे समय बाद 1898 में मुगलसराय से वाराणसी होते हुए रायबरेली तक रेलवे लाइन का निर्माण हुआ। इसके बाद 1900 में मुगलसराय गया रेल खंड बनकर तैयार हुआ। इस तरह से मुगलसराय बहुत बड़ा जंक्शन बन गया। प्रसिद्ध ग्रैंड कोर्ड रेल मार्ग ( मुगलसराय-हावड़ा ) यहीं से शुरू होता है। 

मुगलसराय एशिया का सबसे बड़ा रेलवे का यार्ड है। रेलवे स्टेशन से चार किलोमीटर पहले और चार किलोमीटर बाद तक आपको अनगिनत रेल की पटरियां दिखाई देती हैं। 
मैं देख रहा हूं कि विशाल दीनदयाल नगर रेलवे स्टेशन की साफ सफाई और सौंदर्यीकरण में काफी बेहतर स्थिति हो गई है। हर प्लेटफार्म पर बैठने की पर्याप्त जगह बन गई है। प्लेटफार्म पर कुछ अच्छी कैंटीनें खुल गई हैं। कुछ साल पहले के मुगलसराय स्टेशन और अब के दीनदयाल नगर स्टेशन पर स्वच्छता और सुविधाओं के मामले में काफी अंतर आ गया है।


खैर मेरी ईएमयू ट्रेन सुबह चार बजे नहीं पहुंची। पता चला कि जो ट्रेन इलाहाबाद के सूबेदारगंज स्टेशन से चलती है, वही आगे गया ईएमयू बनकर जाती है। पर ये ट्रेन अभी लेट है।इस बीच मैंने दातून कर लिया है। मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर आपको 24 घंटे महिलाएं दातून बेचती नजर आती हैं। तो जब भी मुझे वे नजर आते हैं उनसे मैं दातून जरूर खरीदता हूं। यह दांतों के लिए टूथ ब्रश से बेहतर है। तीन घंटे लेट से गया पैसेंजर ट्रेन सुबह 4.45 बजे पहुंची। फिर यहां से सुबह के पांच बजे रवाना हुई। 

इस बीच वाराणसी आसनसोल पैसेंजर का भी समय हो गया है। पर मैं गया पैसेंजर में ही बैठ गया हूं। एक-एक करके छोटे छोटे स्टेशन पार हो रहे हैं। चंदौली मझवार, कर्मनाशा, दुर्गावती, भभुआ रोड आदि। सुबह सात बजे के आसपास मैं कुदरा रेलवे स्टेशन पर उतर गया हूं। प्लेटफार्म पर मेरे भाई अशोक मेरा इंतजार कर रहे हैं। इस सुहानी सुबह में मुझे लता जी का गीत याद आ रहा है - जहां पे सबेरा हो बसेरा वहीं है...     
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( SHAHDARA DELHI , DINDAYAL NAGAR, KUDRA ) 
और कहां, अपने गांव के निकटतम रेलवे स्टेशन पर...

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