Tuesday, January 7, 2020

अंदमान के आदिवासियों की अनूठी दुनिया


पोर्ट ब्लेयर से बाराटांग जाते हुए सैलानियों को जारवा लोगों के बारे में तो कुछ पता चल जाता है पर अंदमान के आदिवासियों के बारे में आपको ज्यादा जानना है तो उसके लिए पोर्ट ब्लेयर की ट्राइबल म्यूजियम अच्छी जगह हो सकती है। यहां आप कुछ घंटे गुजारकर अंदमान में रहने वाले अलग अलग आदिवासी समूहों के बारे में जान सकते हैं। पहली यात्रा में इस ट्राईबल म्यूजियम को देखने गया था। दूसरी यात्रा मे भी समय निकाल कर इस म्युजियम को एक बार फिर देखा। अनादि और माधवी ने भी अंदमान के जनजातीय समाज को जानने में खूब रूचि दिखाई। 


तीर धनुष से मछली पकड़ते हैं जारवा लोग - जारवा लोग शरीर को सजाने के लिए फूल पत्ते, सीपियों को इस्तेमाल करते हैं। वे लोग अब वाहन का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। जारवा लोग लट्ठे से बेड़ा बना लेते हैं। डोंगी वाली नाव बना लेते हैं। जारवा लोग लकड़ी की बाल्टी भी बना लेते हैं। जारवा महिलाएं मछली और सीपियां चुनने का काम करती हैं। आपको पता है जारवा लोग तीर धनुष से मछली का शिकार करते हैं।


इंदिरा प्वाइंट तक रहते हैं शोंपेन लोग - शोंपेन लोग ग्रेट निकोबार में आखिरी छोर यानी इंदिरा प्वाइंट तक रहते हैं। ये लोग मछलियां पकड़ने में माहिर होते हैं। इनके पास भी अपनी डोंगी होती है। इनकी पहली तस्वीर 1890 में कैमरे से खींची गई थी। 

दुनिया की सबसे अछूती जनजाति - मेरी पहली अंदमान यात्रा और दूसरी यात्रा के बीच एक बड़ी घटना हुई। एक युवा विदेशी नागरिक ने अंदमान के संरक्षित आदिवासियों से मुलाकात की कोशिश की और वह मारा गया। हम बात कर रहे हैं अंदमान के सेंटनलीज जनजाति की। ये आज की तारीख में बाहरी दुनिया से सबसे ज्यादा अछूती जनजाति है। इन्हें पाषाण काल का आदिवासी माना जाता है। पिछले 60 हजार सालों से ये बाहरी दुनिया से कटे हुए रह रहे हैं।
साल 2018 में युवा अमेरिकन नागरिक जॉन चाऊ की हत्या के बाद से ये जनजाति एक बार फिर चर्चा में आ गई। अंडमान के सबसे नजदीक गांव से सेंटीनल द्वीप तक पहुंचने में करीब तीन घंटे लग जाते हैं।

बाहरी दुनिया से बिल्कुल संपर्क नहीं - सेंटनलीज अंदमान के छोटे से आकार के उत्तरी सैंटलीज द्वीप में रहते हैं। इस द्वीप का आकार मैनहट्टन शहर के बराबर है। कई सौ साल गुजरने के बाद भी इन्होंने बाहरी दुनिया से संपर्क का आक्रामक तरीके से प्रतिरोध किया है। जो भी इनके पास जाता है, ये उस पर हमला कर देते हैं। सेंटीनलीज बाहरी दुनिया के संपर्क में रहना पसंद नहीं करते हैं। उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर हमारी सेना या एयरफोर्स भी नहीं उतर सकती है। ये लोग विमानों पर भी तीर कमान से हमला कर देते हैं।

कितनी आबादी संशय बरकरार - सेंटीनलीज की कुल कितनी आबादी है इसको लेकर भी संशय बना हुआ है। साल 2011 में इनकी आबादी 40 आंकी गई थी। चाउ के मुताबिक, कुछ झोपड़ियों में करीब 10 सेंटनलीज आदिवासी रहते हैं जबकि कुछ में 50 आदिवासी रहते हैं। चाउ ने उनकी आबादी 250 बताई।  2004 में सुनामी के बाद भारत सरकार ने द्वीप का हवाई निरीक्षण किया था, तब उनकी आबादी 40 से लेकर 200 के बीच होने का अनुमान था। उस समय में सेंटनलीज ने हेलीकॉप्टर पर तीर बरसाए थे।

चाऊ का दर्दनाक अंत - चाऊ को तो अंडमान द्वीप के सेंटनलीज आदिवासियों के साथ संपर्क करने की जिद सवार थी। वह नवंबर 2018 में सेंटनलीज के द्वीप पर एक छोटी सी नाव के सहारे पहुंचा। वह एक ईसाई मिशनरी था और सेंटनलीज आदिवासियों को ईसाई धर्म के बारे में बताने लिए मनाने पहुंचा था। वो जानता था कि वहां खतरा है। फिर भी उसने खतरा मोल लिया। पर वह वापस नहीं लौट सका।

चाऊ के ने अपने नोटबुक में लिखा कि 15 नवंबर 2018 की सुबह को जब वह द्वीप पर पहुंचा तो वह एक शख्स से मिला जो शायद उनका नेता था। उस शख्स ने फूलों से बना एक सफेद ताज पहन रखा था। चाऊ ने लिखा, वह शख्स एक चट्टान पर चढ़ा और मेरे ऊपर चिल्लाया। चाऊ ने यह भी लिखा कि सेंटनलीज बहुत तेज ध्वनियां निकलाते थे। खैर, चाऊ पिछले 12 सालों में द्वीप तक पहुंचने वाला पहला बाहरी शख्स था।
-       विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-       ( ANDAMAN, TRIBE , SENTINELESE )

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