Friday, January 31, 2020

तुगलकाबाद फोर्ट – दिल्ली का सबसे विशाल नगर था


दिल्ली अलग अलग काल खंड में सात बार सात नामों से बसी। इनमें से एक है तुगलकाबाद। आजकल दिल्ली में तुगलकाबाद नाम से रेलवे स्टेशन और मेट्रो स्टेशन हैं। जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है कि ये नगर चौदहवीं सदी में तुगलककाल में आबाद हुआ था। 

यह दिल्ली का सबसे विशाल किला किला प्रतीत होता है। यह लालकिला से भी काफी बड़ा है। यह दिल्ली के सात शहरों में तीसरा शहर है। इसकी स्थापना गयासुद्दीन तुगलक ने की थी। किले के सामने सड़क के उस पार गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा भी है। यह मकबरा लाल बलुआ पत्थरों का बना हुआ है। किले के सबसे ऊंचे प्वाइंट पहुंचने पर पास ही करणी सिंह शूटिंग रेंज नजर आता है।

कई लोग इसे भी दिल्ली के भूतहा यानी हाउंटेड प्लेस के तौर पर देखते हैं। इसका भी कारण है। किले के आसपास बड़ा वन क्षेत्र है। रोज किले को देखने कुछ सौ लोग ही पहुंचते हैं। लिहाजा यह दिन भर सुनसान रहता है। किले में प्रवेश के लिए टिकट है। यहां पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से चौकीदार नियुक्त किए गए हैं। ये लोग किला घूमने मेंआपकी मदद करते हैं। पर वे सलाह देते हैं कि किले के अंदर बहुत दूर तक अकेले नहीं जाएं। कई इलाके से खुला होने के कारण इसमें बाहरी लोग कहीं से घुस आते हैं। कई बारे अकेले में घूमने वालों के साथ लूटपाट हो सकती है। लिहाजा वहीं तक जाएं जहां तक चौकीदार आपको सलाह दें। अगर आप बड़े समूह में हैं तो बेखौफ कहीं भी घूम सकते हैं। आमिर खान की लोकप्रिय फिल्म रंग दे बसंती समेत कुछ फिल्मों में इस किले को देखा जा सकता है।

तुगलकाबाद किले का विस्तार छह किलोमीटर में है। इस लिहाज से यह दिल्ली का सबसे बड़ा किला था। इसका निर्माण 1321 में आरंभ हुआ। पर यह किला कभी भी पूरी तरह आबाद नहीं हो सका। गयासुद्दीन तुगलक को ये किला 1327 में छोड़ देना पड़ा। वास्तव में उस समय दिल्ली में राजधानी का संचालन सिरी फोर्ट से होता था। तभी विकल्प के तौर पर इस किले का निर्माण शुरू हुआ। पर एक तरफ से ये किला बस रहा था, वहीं दूसरी तरफ लोग इसे छोडकर जा भी रहे थे।

किले को लेकर एक दिलचस्प कहानी है। गयासुद्दीन तुगलक ने जब पहाड़ी पर ये किला बनवाना शुरू किया तो उसने बड़ी संख्या में मजदूर लगा दिए। उसी समय सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया अपने लिए बावली भी बनवा रहे थे। मजदूरों के किला निर्माण में लग जाने से बावली का काम ठप हो गया। ऐसी सूरत में उन्होंने उन मजदूरों को रात में काम करने के लिए राजी कर लिया। मजदूर दिन में किला बनाते और रात में जाकर बावली में अपना योगदान देते। 

पर ऐसा कहा जाता है कि सुल्तान सूफी संत औलिया से चिढ़ता था। उसने निजामुद्दीन बस्ती से मिलने वाला तेल बंद करा दिया। रोशनी की व्यवस्था न होने से बाउली का काम ठप हो गया। उस वक्त औलिया ने नाराज होकर कहा था, सुल्तान यह जो किला बनवा रहा है इसमें या तो सियार बसेंगे या गूजर। तो सूफी संत की बददुआ के कारण ये किला कभी पूरी तरह आबाद नहीं हो सका।
कैसे पहुंचे – बदरपुर बार्डर से महरौली जाने वाली किसी बस में बैठें। वह आपको तुगलकाबाद किले के प्रवेश द्वार पर उतार देगी। महरौली बदरपुर रोड यानी एमबी रोड तुगलकाबाद फोर्ट के बीच से होकर गुजरती  है। दूसरा तरीका है कालकाजी या गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन से आटो रिक्शा लेकर पहुंचे। यहां से किले की दूरी पांच किलोमीटर है। किला तुगलकाबाद गांव, तुगलकाबाद एयरफोर्स स्टेशन के पास स्थित है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
( TUGLAKABAD FORT, DELHI, GAYASUDDIN TUGLAK )



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