Saturday, January 18, 2020

कार्बाइन कोव की रुमानी शाम और चना जोर गरम


विज्ञान केंद्र से हमलोग कारबाइन कोव की तरफ चल पड़े हैं। समंदर के साथ बनी सड़क का सफर बड़ा ही मनोरम है। थोड़ी देर में हमलोग कारबाइन कोव तट पर पहुंच गए हैं। पोर्ट ब्लेयर शाम गुजारने के लिए यह बेहतरीन जगह है। यहां पर दूसरी बार पहुंचा हूं। पर पिछली बार अकेला था। पर इस बार इस द्वीप पर कुछ बदलाव हो चुका है। यहां पर स्पीड बोट भी चलने लगी है। मतलब समंदर में अटखेलियां करनी हो तो स्पीड बोट पर सवार हो जाइए। वरना इस तट पर उछल कूद मचाएं। मजे लें। यहां हर उम्र के लोग मिल जाएंगे। बच्चे, बूढ़े और जवान। समुद्र तट पर कुछ रेस्टोरेंट हैं। स्ट्रीट फूड की कई दुकाने हैं। शॉपिंग के लिए छोटी छोटी दुकाने सजी हैं। हां नारियल पानी तो होगा ही।

पीछे नारियल के हरे भरे पेड़, उसके बाद बालुका राशि की चौड़ी पट्टी और उसके आगे आती जाती समंदर की लहरें। ये सब कुछ मिलकर कारबाइन कोव के माहौल को रुमानी बनाती हैं। यहां जब शाम को धीरे धीरे सूरज समंदर के आगोश में समाने लगता है तो यह नजारा बड़ा ही सुंदर लगता है। ऐसा लगता है जैसे समंदर सूरज को निगलता जा रहा हो।
कारबाइन कोव समुद्र तट पर 1986 में एक स्तंभ का निर्माण कराया गया है। हालांकि यह स्तंभ है लेकिन इसका नाम रखा गया है कारबाइन कोव समुद्री दीवार।

बंगाली बाबू का चना जोर गरम - तो बहुत हो गया घूमना फिर अब कुछ खाना पीना हो जाए। कारबाइन कोव तट पर मिल गए हैं चना जोर गरम वाले। ये बंगाली बाबू हैं नाम है शिवदास। हमने उनसे 40 रुपये का चना जोर गरम बनवाया। फरही, चना, नमक, प्याज, मिर्च, खीरा, टमाटर, मूली, मसाले, सेव दालमोट, सरसों तेल आदि मिलाकर उन्होंने बड़ा ही सुस्वादु चना जोर गरम बनाया। अनादि को भी इनका चना जोर गरम खूब पसंद आया। 
यह एक सेहतमंद खाद्य पदार्थ है जिसे आप कहीं भी खा सकते हैं। हमने गंगटोक जाने के रास्ते में भी खाया था चना जोर गरम। वैसे तो आपने चना जोर गरम जगह जगह खाए होंगे, पर हर जगह का स्वाद भी अलग अलग होता है। पर ये चना जोर गरम बंगाल में खूब प्रसिद्ध है। तो शिवदास भी बंगाली मानुस हैं। पर वे पिछले दो दशक से पोर्ट ब्लेयर में ही हैं। जब यहां आए तो पहले कई जगह मजदूरी का काम किया। पर इन कामों में मन नहीं रमा। बाद में उन्होंने अपना स्टार्ट अप शुरू किया। मतलब चना जोर गरम बेचने का काम। 

धीरे-धीरे ये काम चल पड़ा। अब वे इस काम में रम गए हैं। पोर्ट ब्लेयर आने वाले सैलानी और स्थानीय लोग भी चना जोर गरम खाते हैं। बताते हैं इसमें जीने खाने पर कमाई हो जाती है। पोर्ट ब्लेयर के बाहरी इलाके में किराये पर रहने के लिए कमरा ले लिया है। बंगाल की तुलना में यहां पर रहने में उन्हें ज्यादा आनंद आता है। पर उनका बंगाल से मोह कम नहीं हुआ है। वे साल में एक बार अपने घर चले जाते हैं। हालांकि आना जाना महंगा है। वे पानी के जहाज से जाते हैं। बंक क्लास में बैठ कर। तो चना जोर गरम वाले भाई की मेहनत को सलाम। आगे चलते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        ( PORT BLAIR, CHANA JOR GARAM, CARBYNS COVE )





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