Monday, December 9, 2019

उत्तरा जेट्टि से रंगत वाया कदमतल्ला - बंगाली बस्ती


उत्तरा जेट्टि से बस में सवार होकर हमलोग एक बार फिर आगे चल पड़े हैं। अब हम कदमतल्ला से होकर गुजर रहे हैं। कदमतल्ला अंदमान का एक बड़ा गांव है ऐसा समझ लिजिए। यह मध्य अंदमान के रंगत तहसील का हिस्सा है। पोर्ट ब्लेयर से कुछ सरकारी बसें कदमतल्ला तक भी आती हैं। 

उत्तरा जेट्टि से कदमतल्ला बाजार तक के लिए आटो रिक्शा भी चलते हैं। ये दिन में 20 रुपये किराया लेते हैं। कदमतल्ला बाजार में रहने के लिए समान्य सुविधा वाले गेस्ट हाउस भी उपलब्ध हैं। कदमतल्ला में क्षेत्र में जारवा लोगों का निवास पड़ता है। इस बात की जानकारी हमें डिगलीपुर से वापस आते समय मिली।
कदमतल्ला में बंगाली समुदाय के लोग ज्यादा संख्या में है। ये लोग भी सेटलर हैं। संभवतः उन लोगों ने इस इलाके का नाम कदमतल्ला रखा होगा। क्योंकि ऐसा नाम बंगाली बहुत इलाकों में सुनने को मिलता है।

बस से चलते हुए हमें कुछ पक्के मकान, स्कूल और सरकारी भवन दिखाई दे रहे हैं। नारियल के पेड़ों के संग रास्ता हरा भरा है। पर सड़क की दशा ज्यादा ठीक नहीं है। सड़क किनारे संदेश लिखा है कि प्लास्टिक कचरा जहां तहां नहीं फेंके। यहां हमें आनंद की डिगलीपुर से आकर पोर्ट ब्लेयर की ओर जाती हुई बस दिखाई दी।

कदमतल्ला गांव को पार कर हमारी बस रंगत की ओर बढ़ रही है। सुबह के 11 बजने वाले हैं और हमलोग रंगत पहुंच गए हैं। रंगत पहुंचने का मतलब हम अपने सफर की आधी से ज्यादा दूरी तय कर चुके हैं। रंगत की बातें आगे भी करेंगे पर पहले थोड़ी चर्चा अंडमान ट्रंक रोड की।

लाइफलाइन है अंडमान ट्रंक रोड - वास्तव में अंडमान ट्रंक रोड जो राजधानी पोर्ट ब्लेयर को डिगलीपुर से जोड़ती है अंदमान की लाइफलाइन है। यह नेशनल हाईवे नंबर 223 के तौर पर भी पहचानी जाती है। इसकी कुल लंबाई 333 किलोमीटर है। अब इसे 2100 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड किया जा रहा है।

सन 2000 के आसपास अंडमान ट्रंक रोड की हालत बहुत खराब थी। स्थानीय आदिवासी जनजातियों पर आसन्न खतरों को लेकर इस सड़क पर आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। पर अब इस सड़क को फोर लेन का बेहतर ऑल वेदर रोड बनाने पर काम चल रहा है। नीति आयोग की 2018 की रिपोर्ट कहती है कि शानदार सड़क बन जाने के बाद इस क्षेत्र में साल 2030 तक सालाना 12 लाख सैलानी आएंगे जो अभी चार लाख के आसपास ही आते हैं। 

भारत सरकार ने 1960 से 1970 के दशक में अंदमान ट्रंक रोड का निर्माण कराया था। तब इस क्षेत्र के जंगलों में रहने वाले जारवा लोगों ने सड़क निर्माण का खूब विरोध किया था। इस दौरान जारवा लोगों ने सड़क निर्माण से जुड़े कई लोगों की हत्या भी कर दी थी। पर कई दशक गुजरने के बाद जारवा लोगों के व्यवहार में बदलाव आया है।

बेशकीमती लकड़ियों का कारोबार – एटीआर पर सफर करते हुए हमें रास्ते में कई जगह सड़क के किनारे लकड़ियां काटकर रखी हुई दिखाई देती हैं। दरअसल इन क्षेत्रों से अंदमान पादुक समेत दूसरी बेशकीमती लकड़ियों का कारोबार होता है। तो ये जंगल बेशकीमती हैं। इन्हें हमें बचाकर रखना होगा।    


बाराटांग से उत्तरा जेट्टि – 28 किलोमीटर
उत्तरा जेट्टि से कदमतल्ला बाजार – 20 किलोमीटर
उत्तरा जेट्टि से रंगत – 43 किलोमीटर
पोर्ट ब्लेयर से रंगत – 210 किलोमीटर
रंगत से मायाबंदर – 70 किलोमीटर
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
(KADAMTALLA, ANDAMAN TRUNCK ROAD, RANGAT ) 

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