Thursday, December 5, 2019

अंदमान का बाराटांग द्वीप – रांची वालों की बस्ती


बाराटांग में ताजे नारियल भी बिक रहे हैं। वैसे अंदमान में आप जहां से भी गुजरेंगे नारियल पानी तो मिल ही जाएगा। बाराटांग में नीलांबर जेट्टी पर थोड़े इंतजार के बाद अगली फेरी में हमारी बस भी आ गई। सब लोग तेजी से बस में चढ़ने लगे। हमने भी एक बार फिर बस में अपनी जगह ले ली। सभी लोगों के बैठते ही बिना किसी देरी के बस एक बार फिर आगे बढ़ने लगी है। पर अब सड़क पहले जैसी अच्छी नहीं है। 

इस सड़क पर चलते हुए लग रहा है जैसे हम गांव की इस उबड़ खाबड़ सड़क पर चल रहे हैं। पीछे की सीट पर होने के कारण हमें कुछ ज्यादा ही बस की उछाल झेलनी पड़ रही है। हालांकि सड़क के दोनों तरफ खूब हरियाली है। पर बस का सफर मुश्किलों भरा हो रहा है। वैसे ये मुश्किल दिन भर हमारे साथ रहने वाली है।

बाराटांग अंदमान निकोबार का एक विशाल द्वीप है। पर बाराटांग द्वीप के क्षेत्र में रहने और खाने पीने के लिए कुछ सीमित विकल्प ही उपलब्ध हैं। बाराटांग का विस्तार करीब 238 वर्ग किलोमीटर में है। साल 2011 की जन गणना के मुताबिक इस द्वीप क्षेत्र में महज 5600 लोग निवास करते हैं।  इसे रांची वाला द्वीप भी कहते हैं। ब्रिटिश काल में यहां रांची से लाए गए लोगों को बसाया गया था। ये मजदूर वर्ग के आदिवासी लोग थे जिन्हें यहां खेती करने के लिए लाया गया था। ये लोग यहां आने के बाद ब्रिटिश काल में चर्च के प्रभाव में आकर ईसाई बन गए।  

बाराटांग द्वीप पर लाइम स्टोन गुफा के अलावा मड वाल्केनो भी है। नीलांबर जेट्टी से आठ किलोमीटर आगे मड वाल्केनो देखा जा सकता है। प्रशासन के लिहाज से बाराटांग रंगत तालुका का हिस्सा है। बाराटांग द्वीप पर कुल 12 गांव हैं। इनमें नीलांबर, सुंदरगढ़ आदि की आबादी सबसे ज्यादा है। पर इस द्वीप के लोग 100 फीसदी साक्षर हैं। अगर आप नीलांबर में रुकना चाहते हैं तो यहां पंचायत का गेस्ट हाउस और पीडब्लूडी का गेस्ट हाउस भी उपलब्ध है। 



वैसे आमतौर पर यहां आने वाले सैलानी दिन भर घूमने के बाद शाम को वापस पोर्ट ब्लेयर लौट जाते हैं। तो चलिए आगे चलते हैं हमारी बस का सफर तो जारी है। नीलांबर गांव के लोगों को मुख्य काम मछली पकड़ना है। यहां पर सरकार की ओर फिश मार्केट भी बनाया गया है। इधर से मछलियों को पोर्ट ब्लेयर के बाजार में भेजा जाता है।

उबड़ खाबड़ रास्तों पर कुछ किलोमीटर चलने के बाद हमारी बस सुंदरगढ़ से होकर गुजर रही है। यह एक गांव है। यहां पर बस स्टाप बना है। इस पर लिखा है ग्राम पंचायत सुंदरगढ़। यह नीलांबर के बाद का गांव है। इसके बाद भी सड़क की हालत काफी खराब है। आबादी कम दिखाई दे रही है। दोनों तरफ हरे भरे जंगल हैं।

करीब 28 किलोमीटर के उबड़खाबड सफर के बाद हमलोग गांधी जेट्टी या गांधी घाट पहुंच गए हैं। यहां हमें एक बार फिर बस से उतर जाना है। एक बार फिर समंदर को स्टीमर से पार करना है। गांधी घाट पर यात्रियों के बैठने के लिए दो सुंदर शेड बने हुए हैं। पर हमारे पास यहां बैठने का वक्त बिल्कुल नहीं है। यहां पर कुछ खाने पीने की दुकाने हैं। कुछ फल भी मिल रहे हैं।

हमलोग पहले की तरह फटाफट जाकर सामने लगे स्टीमर में सवार हो गए हैं। हमारी बस भी इसी स्टीमर में आकर लद गई है। हमलोग एक बार फिर बस समेत समंदर में सफर कर रहे हैं। हां हम अपनी 325 किलोमीटर की यात्रा में तकरीबन 120 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। 
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( BARATANG, SUNDARGARH, LIME STONE CAVES, KADAMTALLA, GANDHI GHAT ) 
बाराटांग से कदमतल्ला – 28 किलमीटर
बाराटांग से रंगत – 71 किलोमीटर
बाराटांग से मायाबंदर – 141 किलोमीटर
बाराटांग से डिगलीपुर – 230 किलोमीटर


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