Monday, December 30, 2019

डिगलीपुर से वापसी – एसएस ट्रैवल्स की बस से

जल टेकरी में विजय विश्वास के घर खालिस दूध पीने में अनादि को दिक्कत हुई पर पेड़ से टपका हुआ आम उन्हें काफी पसंद आया। तो आम को चाव से खा लिया। अब हम वापसी की राह पर हैं। जल टेकरी से डिगलीपुर वापसी के लिए हमें बस मिल गई है।
शाम को 5.30 बजे वहां से आखिरी बस चलती है। हम इसी आखिरी बस में सवार हो गए हैं। इस बस में दो लोगों का डिगलीपुर का किराया 48 रुपये है। वापसी में बस खाली खाली है। शहर की ओर जाने वाली सवारियां कम ही हैं। रास्ते में तेज बारिश होने लगी। पर जब हम डिगलीपुर पहुंचे तो बारिश बंद हो चुकी थी।

हमने रात का डिनर उसी फूडीज रेस्टोरेंट में लिया। रात के दस बजे हैं। हमें अब डिगलीपुर से पोर्ट ब्लेयर की वापसी वाली बस लेनी है। इस बस में आरक्षण हमने डिगलीपुर में ही कराया है। सरकारी बस सेवा और आनंद बस सेवा में हमारी इच्छित तारीख में जगह नहीं थी। लोगों एसएस बस काउंटर पर जाने की सलाह दी। इसमें फिर हमें सबसे पीछे की ही तीन सीटें मिल सकीं। पर हम अपनी वापसी और टाल नहीं सकते थे इसलिए मजबूरी में इस सीट को लेना ही पड़ा। 


होटल से चेकआउट के बाद हमलोग डिगलीपुर चौराहा पर पहुंच गए हैं। एसएस ट्रैवल्स की बस जाने के लिए तैयार है। हमें पीछे वाली सीट मिली है। पर इस सीट में तो हैंडल भी नहीं है। आनंद बस की सीट में हर यात्री के बीच में हैंडल था जिस पर हाथ रखने से थोड़ा सहारा मिल जाता था। इस सीट को लेकर हमलोग थोड़े दुखी हैं पर सफर तो करना ही है। ठीक रात 11 बजे बस चल पड़ी है।

कुछ घंटे के सफर के बाद बस रंगत के आसपास एक छोटे से कस्बे में रुकी। लोगों को 15 मिनट का ब्रेक टायलेट आदि जाने के लिए दिया गया। यहां पर लगे माइल स्टोन पर लिखा है बादामी नाला दो किलोमीटर।
इसके बाद बस फिर आगे के सफर पर चल पड़ी। मेरे बगल वाले सहयात्री को बार बार नींच आ रही है और वह मेरे ऊपर गिर पड़ता है। मैं उसे बार बार सीधा करता हूं।

कई घंटे के सफर के बाद रात के साढ़े तीन बजे के आसपास बस कदमतल्ला से पहले एक नाका के पास जाकर रुक गई। बताया कि यह जारवा चौकी है। यहां से बस सुबह साढ़े चार बजे चलेगी। रात के अंधेरे में काफी गाड़ियां लाइन में लगी हैं। हमलोग बाहर निकल कर टहलने लगे। कानवॉय का समय होने पर इस चौकी से बस आगे की ओर चल पड़ी। 

उजाला होने से पहले हमलोग एक बार फिर उत्तरा जेट्टि पहुंच चुके हैं। यहां पर बस से उतरकर फेरी में सवार होना पड़ा। ठीक वही प्रक्रिया जो आते समय में अपनाई गई थी। उत्तरा जेट्टि में भी यात्रियों के बैठने के लिए सुंदर शेड बनाए गए हैं। हमलोग जिस फेरी में बैठे हैं। हमारी बस भी उसी में सवार हो गई है। इस बार हमलोग फेरी की छत पर आकर बैठ गए हैं। 

थोड़ी देर में हमलोग गांधी घाट पहुंच गए हैं। एक बार फिर बस में सवार। और बस चल पड़ी है। इधर सड़क काफी खराब है। तो बस की उछल कूद का असर हम पर काफी पड़ रहा है। सुबह के साढ़े छह बजे हमलोग बाराटांग के नीलांबर जेट्टि पहुंच गए हैं। यहां पर हमने एसएस बस को अलविदा कह दिया। अपना सामान उतार कर हमलोग नीलांबर जेट्टि में ही रुक गए। हमारी बस फेरी में सवार हो गई। पर हम फेरी में सवार नहीं हुए। पर ऐसा क्यों। हमने हालांकि टिकट तो पोर्ट ब्लेयर तक का ले रखा है। पर हम अब इस बस में आगे नहीं जाएंगे। दरअसल हमारा कार्यक्रम बाराटांग की लाइम स्टोन गुफाएं देखने का है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( RETURN FROM DIGLIPUR ) 








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