Thursday, December 26, 2019

अंदमान में अनूठा ज्वालामुखी - मड वाल्केनो


हाथी लेवल से हमलोग अनूठे ज्वालामुखी की ओर चल पड़े हैं। हाथी लेवल में आकर पक्की सड़क खत्म हो गई है। यहां से आगे हमें जंगल में प्रवेश करना है। स्थानीय लोग इसे जोल टेकरी कहते हैं। मतलब जल पहाड़। बांगला उच्चारण में जल जोल जैसा सुना जाता है। हमलोग जंगल में प्रवेश कर चुके हैं। कोई गाइड साथ में नहीं है। हल्की हल्की बारिश का मौसम है।  कुछ लोगों से आने जाने से जंगल में पांव के निशान बने हुए हैं। इससे रास्ते का अंदाज लग रहा है और हमलोग आगे बढ़ते जा रहे हैं सुनसान जंगल में।

मड वाल्केनो को गारामुखी या पंकमुखी हिंदी में कह सकते हैं। जमीन से इसका प्रस्फुटन ज्वालामुखी की तरह ही होता है। बस इसमें अंदर से कीचड़ पानी और गैस आदि निकलती रहती हैं। जमीन के नीचे से लगातार निकलते तरल पदार्थ यानी कीचड़ से एक टीला बन जाता है। इसलिए स्थानीय लोग इस जल टेकरी कहते हैं। यानी पानी से बना पहाड़। 

मड वाल्केनो समान्य ज्वालामुखी जिससे लावा निकलता रहता है। उससे काफी अलग है। धरती के अंदर जगह जगह कई तरह की गैस पाई जाती हैं। मड वाल्केनो इन गैसों के कारण ही बनता है। पर यह भी प्रकृति का अनूठा चमत्कार है। धरती के नीचे लगातार बनने वाले गर्म पानी बनने कारण अंदर की मिट्टी कीचर के रूप में बदलकर फूटकर बाहर निकलने लगती है।

दुनिया में बहुत कम स्थलों पर मड वाल्केनो पाए जाते हैं। एशियाई देशों की बात करें तो पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 80 के करीब सक्रिय मड वाल्केनों है। एशिया में इंडोनेशिया, फिलीपींस, ताइवान, इरान और अजर बाइजान में भी मड वाल्केनो पाए जाते हैं। पर भारत में मड वाल्केनों सिर्फ अंदमान निकोबार में ही देखा जा सकता है।

तो सुनसान जंगल में कोई एक किलोमीटर चलने के बाद हमें पहले मड वाल्केनों के दर्शन हुए। जंगल के बीच एक ऊंचा टीला दिखाई दिया। यहां पर छोटे छोटे पानी के बुलबुले निकल रहे थे। पर यह पंकमुखी ज्यादा बड़ा नहीं था। हमलोग फिर आगे बढ़ लिए। हमने जंगल से छोटे छोटे डंडे ले लिए हैं अपनी सहायता के लिए। थोडी देर में दूसरे नंबर का पंकमुखी नजर आया। इसे देखने के बाद हमलोग फिर आगे बढ़ चले। फिर थोड़ा चलने पर तीसरे नंबर का मड वाल्केनो आया। इसे भी थोड़ा निहारने के बाद हमलोग फिर आगे बढ़े।

तकरीबन जंगल में दो किलोमीटर चलने के बाद हमलोग चौथे नंबर के पंकमुखी तक पहुंच गए हैं। यहां पर एक साथ कई मड वाल्केनो हैं। इनसे लगातार कीचड़ निकल रहा है। हमलोग कुछ फोटो लेने और वीडियो बनाने में लग गए। यहां कोई मोबाइल नेटवर्क काम नहीं कर रहा है।


पर चौथे नंबर के इस मड वाल्केनो में कोई सात अलग अलग पंकमुखी हैं जिनसे लगातार कीचड़ निकल रहा है। कभी कभी इनसे आवाज भी होती है। हम यह सब देखकर आनंदित हो रहे हैं। जो कीचड़ इन वाल्केनो से निकल रहा है उसका रंग सीमेंट जैसा है।

अचानक वीडियो बनाते हुए आनादि का एक पांव फिर दोनों ही पांव कीचड़ में जाकर फंस गए। हालांकि इतनी गहराई नहीं थी कि फंसने जैसी कोई बात हो, उनके पांव बुरी तरह गंदे हो गए। हमने आसपास से पत्ते तोड़कर कीचड़ साफ करने की कोशिश की, पर कोई खास लाभ नहीं हुआ। अब कीचड़ सने पांव के साथ ही हमलोग जंगल से बाहर वापस की ओर लौटने लगे। तो ये मड वाल्केनो का सफर यादगार रहा है। पर आगे कुछ और यादगार अनुभव हमारा इंतजार कर रहे हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( MUD VOLCANO, DIGLIPUR, ANDAMAN ) 





2 comments:

  1. मैंने अभी आपका ब्लॉग पढ़ा है, यह बहुत ही शानदार है।

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