Tuesday, December 24, 2019

डिगलीपुर से हाथी लेवल - मड वाल्केनो की ओर


मड वाल्केनो मतलब वैसी ज्वालामुखी जिसमें से कीचड़ निकलता हो। अंदमान में दो जगह मड वाल्केनो हैं। बाराटांग में और डिगलीपुर के पास हाथी लेवल में। तो हमलोगों की अगली मंजिल मड वाल्केनो देखने की। स्मिथ – रॉस और कालीपुर बीच से लौटने के बाद माधवी ने थकान के कारण आगे जाने से इनकार कर दिया। तो वे होटल में आराम करने चली गईं। हमलोगों ने दोपहर का भोजन नहीं किया है। पर मन में मड वाल्केनो देखने की उमंग है। ऐसी उमंग की दोपहर का खाना गोल कर दिया। टैक्सी के इंतजार में थोड़ा नास्ता किया। 

हमलोग डिगलीपुर चौराहे के टैक्सी स्टैंड पर पहुंच गए हैं। यहां से शेयरिंग जीप हाथी लेवल तक जाती हैं। जीप के इंतजार के दौरान हमलोगों ने एक-एक प्लेट छोले चाट खाकर थोड़ी सी भूख मिटा ली। यहां पर दुकान में मिनी ट्रैक्टर दिखाई दे गया। इसे पॉवर ट्रेलर भी कहते हैं। यह छोटे किसानों के लिए बेहतर होता है। इस तरह के मिनी ट्रैक्टरों की यहां पर मांग है।

डिगलीपुर से श्यामनगर की तरफ बस भी जाती है। पर थोड़े इंतजार के बाद हाथी लेवल की तरफ जाने वाली जीप आ गई। हमें जीप में जगह मिल गई है। जीप चल पड़ी है। सड़क अच्छी है। पर हल्की बारिश शुरू हो गई है। हमें पीछे वाली सीट मिली है। रास्ते में छोटे छोटे कस्बे आ रहे हैं जहां लोग उतरते जा रहे हैं।

हमलोग श्यामनगर रोड पर चल रहे हैं। रास्ते में पहला गांव लक्ष्मीपुर आया। इसके बाद अगला गांव है मिलन ग्राम। यहां भी कुछ ग्रामीण लोग जीप से उतर गए। इसके बाद अगला गांव है स्वराज ग्राम। हर गांव के बाहर हम प्लास्टिक के बड़े बड़े पानी की टंकिया देख रहे हैं। दरअसल इन टंकियों में प्रशासन की ओर पीने के पानी की सप्लाई होती है। लोग इन टंकियों से पानी निकालकर अपने घर में ले जाते हैं।

इसके बाद आया राधा नगर और फिर श्यामनगर। श्यामनगर बसों और जीप का आखिरी पड़ाव है। पर अब बस और जीप इससे दो किलोमीटर आगे जल टेकरी तक जाने लगी हैं।

करीब 35 किलोमीटर की दूरी एक घंटे में तय करके हमलोग हाथी लेवल पहुंच गए हैं। इस जगह का नाम हाथी लेवल क्यों है। पता चला कि बहुत साल पहले हाथियों ने यहां स्कूल भवन पर हमला कर दिया था। हाथियों ने उस स्कूल भवन को तोड़तर समतल कर दिया। इसलिए इस जगह का नाम हाथी लेवल पड़ गया।
जीप ने हमें जल टेकरी में उतार दिया है। 

यहां पर एक झोपड़ी में छोटी सी चाय की दुकान है। दुकानदार महोदय से थोड़ी देर रोचक बातें हुईं। उनकी दुकान पर हमने नींबू की चाय पी। इसके दुकानदार ने हमें मड वाल्केनो तक जाने का रास्ता बताया। यूं समझ लिजिए कि वे हमारे लोकल गाइड बन गए। यहां पर सरकार की ओर से सिर्फ एक साइन बोर्ड लगा है। पक्की सड़क यहां पर खत्म हो जाती है। आगे के रास्ते को भी लकड़ी के डंडों से बंद कर दिया गया है। दिन भर में गिने चुने लोग ही यहां पर मड वाल्केनो देखने के लिए आते हैं। हम इस कीचड़ के ज्वालामुखी तक जाने वाले अकेले यात्री हैं। तो चलिए चलते हैं इस अनूठे ज्वालामुखी की ओर...
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com 
( MUD VOLCANO, DIGLIPUR, JAL TEKRI ) 

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