Sunday, December 22, 2019

कालीपुर बीच – कछुओं के प्रजनन के लिए मशहूर


रॉस एंड स्मिथ द्वीप की सैर से एरियल बे जेट्टि में हमारी वापसी हो चुकी है। अपने बोट के साथ रहे अलग अलग राज्य के साथियों को अलविदा कहने के बाद हमलोग कालीपुर बीच पर जाना चाहते हैं। एरियल बे से कालीपुर बीच छह किलोमीटर आगे है। पर यहां के वाहन उपलब्ध नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उधर जाने वाली बस आएगी थोड़ी देर में। तो हमलोग बस का इंतजार करने लगे। 

आधे घंटे इंतजार के बाद बस आ गई। बस के कंडक्टर से हमारी बात हुई। उसने बताया है कि वह हमें कालीपुर बीच उतार देगा। साथ ही उसने बताया कि यही बस एक घंटे बाद वापस लौटेगी। आप लोग वापस आकर बस स्टाप पर रहना तो हम आपको डिगलीपुर वापस ले चलेंगे। यह सब जान लेना जरूरी था। नहीं तो हमें वापसी में परेशानी होती। 

हरे भरे टेढ़े मेढ़े ग्रामीण रास्तों से होते हुए बस ने हमें कालीपुर बीच के पास उतार दिया। सड़क से समुद्र तट ढाई सौ मीटर की दूरी पर है। हमलोग पैदल समुद्र तट की तरफ चल पड़े। कालीपुर बीच शिबपुर ग्राम पंचायत में आता है। ये पूरा इलाका बांग्लाभाषी लोगों का है। पर वे लोग यहां हिंदी बोलते हैं।

दरअसल कालीपुर बीच कालीपुर गांव से तीन किलोमीटर पहले पड़ता है। कालीपुर गांव में छोटा सा बाजार है। डिगलीपुर से लोकल मिनी बसें कालीपुर गांव तक जाती हैं। यही बस वापस भी लौटती है। जंगलों से होकर कच्चा रास्ता जा रहा है। अचानक हमें विशाल समुद्र तट के दर्शन होते हैं। यहां पर वन विभाग का सुरक्षा गार्ड तैनात है। कालीपुर बीच पर हमारे अलावा अभी कोई सैलानी नहीं है। हमारी नजरों के सामने विशाल समंदर है। पर उसका तट निर्जन है। मानो यह बीच सिर्फ हमारे स्वागत में ही बना हो।

समुद्र तट के बालू के बीच हमें कई तरह के जीवों के अवशेष और सीप दिखाई दे रहे हैं। पर यहां से कुछ भी उठाकर ले जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अंदमान के समुद्र तट पर जो कुछ भी बिखरा हुआ दिखाई देता है उसे उठाकर अपने साथ ले जाना अपराध है। इसके लिए आप एयरपोर्ट पर पकड़ लिए जा सकते हैं।

कछुओं के प्रजनन के लिए मशहूर – कालीपुर बीच कछुओं के लिए जाना जाता है। यहां सर्दियों के दिनो में खास तौर पर कछुएं अपनी संतति बढ़ाने के लिए प्रजनन करते हैं। कालीपुर बीच विश्व के उन प्रसिद्ध गिने चुने द्वीपों में शुमार है जहां कई दुर्लभ प्रजाति के कछुए प्रजनन करते हैं। इनमें ओलिव रीडली, लेदर बैक, हॉक्सबिल और ग्रीन टर्टल मशहूर हैं। आमतौर पर रात में कछुए अंडे देते हैं। इन्हे सुबह में समंदर में छोड़ दिया जाता है। दूर दूर से सैलानी टर्टल नेस्टिंग देखने के लिए भी यहां पहुंचते हैं।

वन विभाग ने यहां पर कछुओं के प्रजनन के लिए खास इंतजाम भी किए हैं। अगर उनके प्रजनन काल के दौरान यहां पहुंचे हैं तो आपको कछुए देखने को मिल सकते हैं। कछुआ कितना महंगा और कितना महत्वपूर्ण जीव है यह तो बताने की जरूरत नहीं है। ये इलाका मायाबंदर वन विभाग के तहत आता है। यहां पर लगे साइन बोर्ड में सी टर्टल के बारे में जानकारियां भी दी गई हैं। यहां पर दिसंबर और जनवरी महीने में आने पर आपको कछुए प्रजनन करते हुए दिखाई दे जाएंगे।

कालीपुर बीच से वापस लौटकर हमलोग सड़क पर खड़े हो गए हैं। यहां पर नया नया पंचायत भवन बना हुआ दिखाई दे रहा है। प्रशासन की ओर शौचालय भी बनवाया गया है। पर उसमें ताला लगा हुआ है। मजबूरी में आपको निस्तारण के लिए खुले में जाना पड़ता है। थोड़ी देर में वही बस वापस आ गई है। इसमें हम सवार हो गए हैं। डिगलीपुर का टिकट ले लिया है। संयोग से बस में सीट भी मिल गई है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 
(KALIPUR BEACH, TURTLES NESTING ) 









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