Saturday, December 7, 2019

समंदर पर पुल – अंदमान ट्रंक रोड का सफर करेंगे आसान


बाराटांग द्वीप पार करने के बाद हमलोग गांधी जेट्टि से एक बार फिर समंदर में सफर कर रहे हैं। इस बार का सफर गांधी जेट्टि से उत्तरा जेट्टि के बीच है। पोर्ट ब्लेयर से डिगलीपुर जाने के रास्ते में कुल दो बार समंदर को फेरी सेवा से पार करना पड़ता है। पहली बार मिड्ल स्ट्रेट से नीलांबर जेट्टि के बीच और दूसरी बार गांधी जेट्टि से उत्तरा जेट्टि के बीच। एक बार फिर समंदर के किनारे मैंग्रोव दिखाई दे रहे हैं। नीला समंदर और हरे भरे वन।

पर मैं क्या देख पा रहा हूं कि गांधी जेट्टि और उत्तरा जेट्टि के बीच समंदर पर विशाल पुल बनाया जा रहा है। पुल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। यह पुल काफी ऊंचा बन रहा है। इतना ऊंचा कि इसके नीचे जहाज गुजर सकें। जाहिर है इस पुल के बन जाने के बाद बसों और दूसरे वाहनों को फेरी से पार करने की जरूरत नहीं रह जाएगी। इससे पोर्ट ब्लेयर से डिगलीपुर की तरफ जाने में समय की काफी बचत होगी। 

पुल को साल 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य है। मैं अपनी इस यात्रा में देख पा रहा हूं कि अधिकांश पीलर का काम पूरा हो चुका है। समंदर में बड़े बड़े क्रेन और तकनीकी उपकरण लगे हैं जो पुल पर दिन रात काम में जुटे हुए हैं। इंजीनियरों और मजदूरों की टीम निर्माण कार्य में मुस्तैद है।



अंदमान ट्रंक रोड पर मिड्ल स्ट्रेट- बाराटांग और गांधी जेट्टि-कदमतल्ला पर दो समंदर पुल के निर्माण के बाद बाराटांग, कदमतल्ला, मायाबंदर जैसे तमाम शहर और द्वीपों पर पहुंचना आसान हो जाएगा। इन दोनों समंदर पुल के निर्माण के लिए 270 – 270 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण  के मुद्दों को ध्यान रखते हुए अंदमान में समंदर पर इन पुलों के निर्माण की अनुमति प्रदान की। नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन इन पुलों का निर्माण करा रहा है। मिडल स्ट्रेट से बाराटांग के बीच बनने वाले पुल की लंबाई 960 मीटर होगी। जबकि गांधी जेट्टि और उत्तरा जेट्टि के बीच बनने वाला पुल इससे थोड़ा लंबा होगा।

अगले कुछ सालों में इन पुल के तैयार होने के बाद ये सफर सुगम होने वाला है। पर अभी बार बार बस से उतरना फिर फेरी में सवार होना, फेरी के रास्ते समंदर को पार करना इस सफर का भी अपना रोमांच है। तो ये रोमांच भविष्य में खत्म होने वाला है। पर विकास के साथ बहुत कुछ बदलाव भी होता है। अंदमान पर लगातार शोध करने वाले पर्यावरणविदों का मानना है कि फोर लेन की चौड़ी सड़कें और विशाल पुल इस द्वीप की मूल संरचना को बदल देंगे। अंदमान भूकंप प्रभावित क्षेत्र में आता है। इसलिए द्वीप पर विकास कार्य काफी सोच समझ कर ही कराया जाना चाहिए।

फेरी का सफर पूरा करके हमलोग इस पार आ गए हैं। सामने बोर्ड पर लिखा है – उत्तरा जेट्टि में आपका स्वागत है। हमलोग कदमतल्ला द्वीप पर पहुंच गए हैं। जेट्टि के भवन के आसपास बांस के बने सुंदर यात्री शेड बनाए गए हैं। भवन में शौचालय का निर्माण कराया गया है। यहां पर स्थानीय केले बिक रहे  हैं। एक दर्जन 15 रुपये में। मैंने खाने के लिए कुछ केले खरीद लिए हैं। ये प्राकृतिक रूप से पके हुए केले हैं। जेट्टि के भवन के बगल में मछली बाजार बना है। बाहर बोर्ड पर लिखा है – मत्स्य अवतरण केंद्र। यहां समंदर से निकाली जाने वाली मछलियों को स्टॉक किया जाता है। फिर उन्हें आगे भेजा जाता है।

बाराटांग से उत्तरा जेट्टि – 28 किलोमीटर
बाराटांग से रंगत – 71 किलोमीटर
बाराटांग से मायाबंदर – 141 किलोमीटर
बाराटांग से डिगलीपुर – 230 किलोमीटर
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( GANDHI JETTY , UTTRA JETTY, FISH, BRIDGE ON SEA )

अंदमान की यात्रा को पहली कड़ी से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।      


No comments:

Post a Comment