Saturday, November 9, 2019

दुनिया भर से लोग पहुंचते हैं कुशीनगर

बुद्ध का जीवन संदेश पूरी दुनिया में प्रसारित हुआ। इसलिए दुनिया के तमाम देशों के लोग कुशीनगर पहुंचते हैं। बुद्ध से प्रेरणा लेने के लिए। इसी क्रम में कुशीनगर में महापरिर्वाण स्थल के आसपास कई देशों के बौद्ध मंदिरों का निर्माण हुआ है। इनमें चीन और म्यांमार के मंदिर प्रमुख हैं। यहां पर बिरला परिवार द्वारा बनवाया गया एक सुंदर मंदिर भी है। 



माथा कौर मंदिर – महापरिनिर्वाण स्थल से थोड़ा आगे जाने पर माथा कौर मंदिर स्थित है। इस मंदिर के परिसर में भी कई स्तूपों के अवशेष हैं। इन स्तूपों के अवशेष को देखकर लगता है कि कभी यहां विशाल स्मारक रहे होंगे। यहां कलचुरि शासकों के समय का एक प्राचीन मंदिर हुआ करता था। अब वह मंदिर नहीं रहा।
यहां पर एक नया बौद्ध मंदिर बनाया गया है। हालांकि वर्तमान मंदिर ज्यादा पुराना नहीं है। सन 1927 में बने इस मंदिर में गौतम बुद्ध की सुनहले रंग की सुंदर प्रतिमा है।
यहां आगे डेढ़ किलोमीटर चलने पर रामाभर स्तूप तक पहुचा जा सकता है। पर फिलहाल मेरे पास समय का अभाव है। मतलब कुशीनगर भी आना हो तो कम से कम पूरा दिन आपके पास होना ही चाहिए। 

चीन और म्यांमार का बौद्ध मंदिर – कुशीनगर में मुख्य स्मारक से पहले चीन का बौद्ध मंदिर बना है। इसी पथ पर आगे म्यांमार द्वारा बनवाया गया विशाल बौद्ध मंदिर है। इसमें सुनहले रंग की विशाल आकृति है। कुछ वैसी ही जैसी म्यांमार ने लुंबिनी में बनवाई है। इस मंदिर के अंदर बुद्ध के शरण में जा रहे बौद्ध भिक्षुओं की प्रतिमाएं हैं। 

इस मंदिर के सामने एक बुद्ध सरोवर भी बना हुआ है। म्यांमार के मंदिर का वातावरण मनोरम है। इस मंदिर से थोड़ा आगे विपरीत दिशा में बिड़ला धर्मशाला है। इसी परिसर में बिरला परिवार द्वारा बनवाया गया मंदिर भी है।



पथिक निवास होटल में लंच - बिरला मंदिर के बगल में यूपी टूरिज्म का पथिक निवास होटल है। बारिश जारी है। मुझे भूख लगी है। दोपहर के भोजन के लिए मैं पथिक निवास के रेस्टोरेंट में गया। यहां पर वेज बिरयानी का आर्डर किया। मैं पूरी तरह भींग चुका हूं। जबकि बिरयानी आ रही है, खुद को सुखाने की असफल कोशिश कर रहा हूं। 

मेरे आर्डर करने के बाद बिरयानी आने में एक घंटे का वक्त लग गया। इस सरकारी रेस्टोरेंट में खूब चहल पहल है। हर टेबल भरी हुई है और वेटर काफी व्यस्त हैं। खाने पीने वालों में कई सरकारी कर्मचारी नजर आ रहे हैं। पर किसी सरकारी रेस्टोरेंट को इतना चलता हुआ देखकर खुशी हो रही है। 



इस बीच मैं अपने आगे की यात्रा के बारे में सोचता हूं। मुझे पता चल चुका है कि कुशीनगर से गोपालगंज महज दो घंटे का ही रास्ता है। तो मैं गोपालगंज में रामचंद्र चाचा जी फोन करके उन्हें अपने आने की जानकारी देता हं। वे कहते हैं आ जाओ मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। तो पेट पूजा के बाद मैं निकल पड़ा हूं। एक बाइक वाले सज्जन ने नेशनल हाईवे तक लिफ्ट दे दी है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
-        ( KUSHINAGAR, BUDDHA, UP, PATHIK NIWAS  )   

2 comments:

  1. बहुत बढ़िया यात्रा याने आज गोपालगंज भी पहुच् जाओगे

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