Tuesday, November 5, 2019

गोरखपुर से कुशीनगर – भारी बारिश में बसों की हड़ताल


गोरखपुर से मैं कुशीनगर जाना चाहता हूं। सुबह तथागत बुद्ध के जन्मस्थान लुंबिनी से चला हूं और दोपहर तक उनके महापरिनिर्वाण स्थल तक पहुंच जाना चाहता हूं। गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने वाली सड़क पर दो सौ मीटर की दूरी पर ही बस स्टैंड है। हल्की बारिश में भिंगता हुआ मैं बस स्टैंड पहुंचता हूं। हालांकि यहां का बस स्टैंड आकर्षक नहीं है। बस स्टैंड में यह पूछते हुए कि कुशीनगर की बस कहां से मिलेगी, मैं आखिरी प्लेटफार्म तक पहुंच गया हूं। पर बस स्टैंड में सारी बसें खड़ी हैं। कोई बस जा नहीं रही है। कोई घोषणा भी नहीं हो रही है। थोड़ी देर तक पूछताछ करने पर पता चला कि सरकारी बस के चालकों ने आज अचानक हड़ताल कर दी है। तो लंबी दूरी को छोड़कर छोटी दूरी की सारी बसें आज बंद हैं।

हड़ताल का कारण है टिकट की मशीन। उसकी छपाई साफ नहीं होने के कारण संवाहक से लोगों ने मारपीट कर दी, फिर सभी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। वैसे गोरखपुर से कुशीनगर की दूरी 50 किलोमीटर के आसपास है। यहां सड़क मार्ग से ही पहुंचा जा सकता है। मेरी योजना कुशीनगर जाकर शाम तक गोरखपुर वापस लौटकर हाजीपुर के लिए ट्रेन पकड़ने की है। यह भी सोच रहा हूं कि अगर कुशीनगर से देवरिया की बस मिल गई तो देवरिया से हाजीपुर की रात में चलने वाली किसी ट्रेन में सवार हो लूंगा।
गोरखपुर से आगे कुसुम्ही के जंगल 

पर हड़ताल के कारण अब कुशीनगर जाना मुश्किल लग रहा है। मैंने स्थानीय लोगों से पूछताछ शुरू की। लोगों ने बताया कि थोड़ा आगे चल कर जाइए। कुशीनगर चौराहे से निजी अनुबंधित बसें मिल सकती हैं। एक कोशिश करने में क्या हर्ज है। तो मैं अगले चौराहे पर पहुंचा। वहां दो बसें लगी थीं। एक बस के कंडक्टर ने कहा वह गोपालगंज जा रहा है। गोपालगंज मतलब बिहार का गोपालगंज। हां, एक सहयात्री ने बताया। गोरखपुर से गोपालगंज सड़क मार्ग से महज तीन घंटे का रास्ता है। मैंने कंडक्टर को कहा मुझे कुशीनगर तक जाना है। सवारियों की भीड़ देखकर पहले तो उसने कहा कि तमकुही राज से पहले की सवारी नहीं लूंगा। पर मुझे उसने कहा कि आप बस में जाकर बैठ जाइए। मैं एक खिड़की वाली सीट पर बैठ गया। थोड़ी देर खूब भरने के बाद बस चल पड़ी।

गोरखपुर शहर का कूड़ा घाट इलाका आया। उसके बाद कैंटोनमेंट इलाका। फिर कुसुम्ही के जंगल। इन जंगलों में एक बुढ़िया माइ का मंदिर है। इस मंदिर तक जाने के लिए पहले रास्ता नहीं था लोग पैदल चलकर जाते थे पर अब अच्छी सड़क बन गई है। गोरखपुर शहर से बाहर निकलने के बाद बस सिकरौली, हाटा, चकनारायणपुर, हेतिमपुर में रुकी। इन कस्बों में कुछ लोग उतरते गए। बारिश लगातार जारी है।

करीब एक घंटे से ज्यादा सफर के बाद बस के कंडक्टर ने मुझे कहा कि कुशीनगर आ गया है उतर जाइए। मुझे हाईवे पर उतार दिया। वहां कोई बस स्टैंड या बाजार नहीं है। कोई यात्री शेड भी नहीं है। दरअसल कुशीनगर जिले का मुख्यालय कसेया बाजार में है। पर महात्मा बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर कसेया बाजार से तीन किलोमीटर पहले ही है। मैंने जब सड़क के उस पार नजर डाली तो कुशीनगर का विशाल प्रवेश द्वार नजर आया। 

नेशनल हाईवे से कुशीनगर महापरिनिर्वाण स्थली लगभग दो किलोमीटर है। आगे जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिल रहा है तो मैं हल्की बारिश में पैदल पैदल ही चल पड़ा हूं। सड़क काफी सुंदर बनी है। अखिलेश यादव के शासन काल में सड़क के दोनों तरफ फुटपाथ का निर्माण कराया गया है। मैंने बरसाती जैकेट पहन लिया है पर खुद को भींगने से नहीं बचा पा रहा हूं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
-        ( GORAKHPUR, KUSHINAGAR, KASEYA, BUDDHA, BUS STRIKE )

2 comments:

  1. बढ़िया बुद्धा circuit घुमा रहे है आप... कुशीनगर का इंतज़ार रहेगा फिलहाल की जानकारी highway से 2 km अंदर है घूमने की जगह

    ReplyDelete