Sunday, November 3, 2019

गोरखपुर रेलवे स्टेशन और मीटर गेज की याद

हल्की बारिश के बीच गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर हूं। वैसे तो 2007 के बाद कभी रेलवे स्टेशन के काउंटर पर जाकर मैंने रेल का आरक्षित टिकट नहीं बनवाया। पर अभी इसकी जरूरत पड़ गई है। तीन दिन बाद मेरे पास पटना से दिल्ली जाने के लिए मगध एक्सप्रेस के एसी 3 के दो कन्फर्म टिकट हैं। वे बेटे और पत्नी माधवी के नाम हैं। अब मुझे भी उसी दिन उनके साथ जाना है। मगध में अब वेटिंग चल रहा है। अगर ऑनलाइन टिकट लिया तो मैं उन लोगों के साथ उस कोच में नहीं जा पाउंगा क्योंकि टिकट कनफर्म नहीं होने पर ईटिकट अपने आप रद्द हो जाता है। तो मैंने गोरखपुर में उसी ट्रेन का एक पेपर टिकट खरीदा। हालांकि बाद में मेरी बर्थ हाजीपुर के जीएम कोटे से कनफर्म हो गई।

सबसे लंबा रेलवे प्लेटफार्म -  टिकट बनवाने के बाद में गोरखपुर रेलवे प्लेटाफार्म पर चहलकदमी करने निकल पड़ा। गोरखपुर के नाम रिकार्ड है देश के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफार्म का। इससे पहले ये रिकार्ड बिहार के सोनपुर रेलवे स्टेशन के पास था। फिर ये खड़गपुर के पास गया। पर अब गोरखपुर के पास सबसे लंबा रेलवे प्लेटफार्म है। इसकी लंबाई 1.366 किलोमीटर है। इसके नंबर आता है कोल्लम का जहां प्लेटफार्म की लंबाई 1.1880 किलोमीटर है।

गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर एक हथकरघा समिति की कपड़ो की दुकान नजर आती है। एक मुस्लिम बुजुर्ग इस दुकान को चलाते हैं। उनकी दुकान से मैं एक केसरियारंग का तौलिया खरीदता हूं महज 50 रुपये में।

 वे बताते हैं कि रेलवे स्टेशन पर उनकी दुकान 40 साल से भी ज्यादा पुरानी है। गोरखपुर रेलवे स्टेशन का भवन काफी बड़ा है। कुछ पुराने रेलवे स्टेशन की तरह लाल रंग की विशाल इमारत है। पर इन दिनो मुख्य भवन के नवीकरण का कार्य जारी है। इसकी आंतरिक सज्जा में बदलाव किया जा रहा है।

गोरखपुर रेलवे के एक जोन पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय है। यहां पर पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक का कार्यालय है। इसलिए यह रेलवे का बहुत बड़ा केंद्र है। किसी जमाने में पूर्वोत्तर रेलवे के पास मीटर गेज रेलवे लाइन का सबसे बड़ा नेटवर्क हुआ करता था। पर अब मीटरगेज लाइनें तो नहीं रहीं। पर चलिए आपको मीटर गेज की कुछ स्मृतियों से मिलवाते हैं। गोरखपुर रेलवे स्टेशन के परिसर में दो लोकोमोटिव तैनात दिखाई देते हैं। ये भाप इंजन हैं।


दो पुराने लोकोमोटिव – पहले देखते हैं वाईएल 5001 को। ये 1952 से 1956 के बीच का बना हुआ मीटर गेज का स्टीम लोकोमोटिव है। यह ब्रिटेन की कंपनी मेसर्स राबर्ट स्टीफेन हाथोर्न द्वारा निर्मित है। तब इस लोकोमोटिव का इस्तेमाल कम क्षमता वाली गाड़ियों की शंटिंग के लिए किया जाता था। यह लखनऊ के चार बाग लोको शेड का लंबे समय तक हिस्सा रहा। सन 1994 में इसे गोरखपुर लाकर रेलवे कारखाना में रखा गया था। 31 मार्च 2015 को इसे गोरखपुर रेलवे स्टेशन के बाहर स्थापित कर दिया गया।

मीटर गेज का डीजल लोकोमोटिव - अब आइए देखते हैं मीटर गेज के डीजल लोकमोटिव को। गोरखपुर रेलवे स्टेशन के परिसर में ही वाईडीएम 4 श्रेणी का डीजल लोकोमोटिव स्थापित किया गया है। वाईडीएम4 – 6335 इज्जतनगर लोकोशेड का हिस्सा हुआ करता था। डीजल रेल इंजन कारखाना वाराणसी में इस श्रेणी के लोकोमोटिव का निर्माण 1968 से 1990 के बीच किया गया। यह लोकोमोटिव 1973 का बना हुआ है। तब इसकी निर्माण लागात 18 लाख 08 हजार रुपये आई थी। इसका इस्तेमाल मालगाड़ियां खींचने के लिए किया जाता था। कुल 1350 हार्स पावर के इस लोको की अधिकतम गति 96 किलोमीटर प्रतिघंटा थी। कुल 36 साल की सेवा के बाद ये लोको 2009 में रिटायर हुआ।

गोरखपुर में एक रेलवे म्युजियम भी है। जहां पर कई पुराने लोकोमोटिव देखे जा सकते हैं। यह म्युजियम स्टेशन से एक किलोमीटर आगे कूड़ाघाट रोड पर है। बारिश रुकने का नाम नहीं ले रहीं। मैं भिंगता हुआ अब बस स्टैंड की तरफ चल पड़ा हूं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com
-        (GORAKHPUR, RAILWAY STATION, LONGEST PLATEFORM, STEAM LOCOMOTIVE )  

 

1 comment:

  1. बहुत़ ही सुंदर दृश्यों के साथ यात्रा वर्णन भी शानदार

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